
बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर की चुनौती, नितिन नवीन ने झोंकी ताकत
बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की चुनौती से बीजेपी की चिंता बढ़ी है। पारंपरिक सीट बचाने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने खुद घर-घर जाकर प्रचार किया।
Byepoll: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर आज (30 जुलाई) हो रहे उपचुनाव में कड़े मुकाबले की आशंका को देखते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन अपनी पार्टी की जीत तय करने में कोई कसर छोड़ते नजर नहीं आ रहे हैं।
गलियों में उतरकर मांगा वोट
पिछले तीन दिनों में नितिन नवीन ने आक्रामक तरीके से चुनाव प्रचार किया। उन्होंने पदयात्राएं कीं, घर-घर जाकर संपर्क किया और घनी आबादी वाले आवासीय इलाकों की तंग गलियों में नुक्कड़ सभाएं करके लोगों से संपर्क साधा। इस दौरान नितिन नवीन बांकीपुर के मतदाताओं के साथ भावनात्मक रिश्ता जोड़ने की कोशिश करते भी दिखे। उन्होंने कहा कि उनका जन्म यहीं हुआ है और वह इलाके में अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेला करते थे।
स्थानीय होने का दिया हवाला
बीजेपी अध्यक्ष ने यह साबित करने की पूरी कोशिश की कि वह यहीं के मूल निवासी हैं और बांकीपुर से ही ताल्लुक रखते हैं। पिछले तीन हफ्तों में नितिन ने अपने गृह नगर पटना का तीन बार दौरा किया और वहां डेरा डालकर पार्टी उम्मीदवार के लिए जमकर प्रचार किया। केंद्र और राज्य दोनों जगह सत्ता में रहने वाली किसी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को इस तरह इस शहर की सड़कों पर उतरकर वोट मांगते पहले कभी नहीं देखा गया।
नितिन नवीन का बदला अंदाज
दिलचस्प बात यह है कि नितिन नवीन ने खुद इस सीट से चुनाव लड़ते समय भी कभी पदयात्रा या घर-घर जाकर प्रचार अभियान नहीं चलाया था। वह 2006 से 2025 तक लगातार चार बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
नेताओं की फौज उतारी
यह बीजेपी नेताओं के उस सार्वजनिक दावे के भी उलट है, जिसमें वे कह रहे हैं कि बांकीपुर में कोई मुकाबला ही नहीं है। लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। पार्टी ने अपने पारंपरिक कैडर और मतदाताओं को एकजुट रखने के लिए 50 विधायकों, एमएलसी, आधा दर्जन सांसदों और बिहार के 16 मंत्रियों को मैदान में उतार दिया है।
पीके की एंट्री से मुकाबला कड़ा
ऐसे स्पष्ट संकेत हैं कि यह उपचुनाव बांकीपुर में सत्तारूढ़ बीजेपी के लिए मुश्किल साबित होने वाला है। इसकी मुख्य वजह यह है कि चुनावी रणनीतिकार से नेता बने जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (पीके) इस बार खुद चुनाव मैदान में हैं।
राजनीति का बढ़ा तापमान
हालांकि प्रशांत किशोर का यह पहला प्रत्यक्ष चुनावी मुकाबला है, फिर भी वे बीजेपी के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। इस महीने की शुरुआत में बांकीपुर सीट पर प्रशांत किशोर के मजबूत उम्मीदवार के रूप में उतरने के बाद बिहार की राजनीति अचानक गरमा गई। यह सीट मार्च 2026 में नितिन नवीन के राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद खाली हुई थी।
बीजेपी का पुराना गढ़
इस सीट का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह बीजेपी का शहरी गढ़ और नितिन नवीन का पारंपरिक क्षेत्र रहा है। इसे वे बार-बार अपना घर कहते हैं।
लगातार जीत का रिकॉर्ड
पटना के बीचों-बीच बसा बांकीपुर बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है। 1990 के दशक के मध्य से पार्टी यहां लगातार चुनाव जीतती आ रही है। नवीन ने खुद चार बार और उनके पिता वरिष्ठ बीजेपी नेता नवीन किशोर सिन्हा ने भी इतनी ही बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया है। 2008 से पहले इस विधानसभा सीट को पटना पश्चिम के नाम से जाना जाता था।
वोट बैंक खिसकने का डर
अब नवीन हर हाल में इस सीट पर बीजेपी का कब्जा बनाए रखना चाहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यही वजह है कि उन्होंने तंग गलियों का रुख किया और हाथ जोड़कर लोगों से बीजेपी को वोट देने की अपील की।
बूथ स्तर पर खास तैयारी
बीजेपी सूत्रों ने स्वीकार किया कि नवीन पर इस बात का दबाव दिख रहा है कि प्रशांत किशोर बीजेपी के कोर वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पारंपरिक मतदाताओं का एक वर्ग बीजेपी से खुश नहीं है। इन रिपोर्टों को देखते हुए नवीन ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को हर एक मतदाता से संपर्क करने और प्रत्येक बूथ पर ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया है।
जंगलराज का उठाया मुद्दा
प्रचार के आखिरी दिन रोड शो और जनसभा के दौरान नवीन ने खुद को आश्वस्त दिखाने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि बांकीपुर एक अभेद्य किला है और बीजेपी यहां नया रिकॉर्ड बनाएगी। हालांकि, जब उन्होंने जंगलराज का जिक्र किया और लोगों से इसे वापस न आने देने की अपील की, तो उनकी घबराहट छिप नहीं सकी। यह साफ नहीं है कि उन्होंने जंगलराज का मुद्दा क्यों उठाया, जिसका संबंध आमतौर पर आरजेडी से जोड़ा जाता है, जबकि बांकीपुर में उनकी मुख्य टक्कर प्रशांत किशोर से है।
विधायक का जीत का दावा
पटना के कुम्हरार से बीजेपी विधायक संजय गुप्ता ने कहा, "बांकीपुर हमारे पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन जी का क्षेत्र है और हम सभी इस उपचुनाव को बड़े अंतर से जीतने के लिए काम कर रहे हैं। नितिन जी अपनी लोकप्रियता के कारण बांकीपुर जीतते रहे हैं। सामाजिक समीकरण एक बार फिर पार्टी के पक्ष में है।"
छात्रों के गुस्से का असर
राजनीतिक विश्लेषक और टिस पटना के पूर्व प्रोफेसर पुष्पेंद्र कुमार का मानना है कि यह नवीन की राजनीतिक मजबूरी थी। प्रोफेसर कुमार ने कहा, "बीजेपी डरी हुई है। छात्रों के विरोध प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई का असर बांकीपुर में भी पड़ना तय है। यह समझकर कि राह आसान नहीं है, नितिन नवीन उन मतदाताओं को मनाने के लिए सब कुछ कर रहे हैं जो अब पार्टी का समर्थन करने के इच्छुक नहीं हैं।"
जनता मांग रही है बदलाव
बांकीपुर में कदमकुआं के पास एक कपड़े की दुकान के मालिक गजेंद्र प्रसाद ने बताया, "अब समय आ गया है कि हम बदलाव के लिए वोट दें। एक के बाद एक चुनाव में बीजेपी को वोट देने के कारण उन्होंने हमें हल्के में ले लिया है। एक नया चेहरा कुछ बदलाव लाएगा।"
महंगाई और लाठीचार्ज से नाराजगी
भट्टाचार्य रोड की रहने वाली गृहिणी संजना देवी भी बदलाव चाहती हैं। उन्होंने कहा, "बांकीपुर में बदलाव देखने को मिल सकता है। बीजेपी अब वैसी नहीं रही। महंगाई सबको प्रभावित कर रही है। पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया। क्या हमने इसीलिए बीजेपी को फिर से चुना था?"
छात्रों ने बनाया सबक सिखाने का मन
गांधी मैदान के पास रहने वाले कॉलेज छात्र और प्रदर्शनकारी रूपेश कुमार सिंह ने भी अपना दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "हमने बांकीपुर में बीजेपी को सबक सिखाने का मन बना लिया है, हम सब बदलाव के लिए वोट देंगे।"
मुकाबला कड़ा होने के तीन कारण
राजनीतिक विश्लेषक सुरूर अहमद ने कहा, "बांकीपुर में कड़े मुकाबले के तीन कारक हैं। पहला खुद उम्मीदवार प्रशांत किशोर हैं। दूसरा, राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़ी बातों ने समर्थकों को सोचने पर मजबूर किया है। तीसरा, छात्रों के आंदोलन का बड़ा असर पड़ा है, क्योंकि बांकीपुर इसका मुख्य केंद्र था।"
सम्राट चौधरी की पहली परीक्षा
अहमद ने कहा कि नीट पेपर लीक के खिलाफ युवाओं का विरोध और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग ने भी मुश्किलें खड़ी की हैं। बांकीपुर का चुनाव सामान्य नहीं है। यह मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहली चुनावी परीक्षा है। किशोर भी कह रहे हैं कि यह उपचुनाव बीजेपी सरकार पर जनमत संग्रह है।
बीजेपी नेताओं के बयान पर तंज
प्रशांत किशोर ने बीजेपी नेताओं के इस घमंड पर भी हमला बोला कि वे कुत्ते या बिल्ली को भी टिकट दे दें तो जीत जाएंगे। किशोर ने कहा, "लोग बीजेपी नेताओं को यह कहते सुनते हैं कि अगर किसी बिल्ली या कुत्ते को भी मैदान में उतारा जाए तो भी बांकीपुर जीत सकता है। लेकिन जन सुराज की जीत बीजेपी को सबक सिखाएगी।"
नतीजों का बेसब्री से इंतजार
पिछले साल 2025 के विधानसभा चुनावों में जन सुराज पार्टी ने 243 में से 238 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। पार्टी को केवल 3 प्रतिशत वोट शेयर मिला था। इसके बावजूद, किशोर और उनकी पार्टी इस बार परिणाम बदलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। वोटों की गिनती 3 अगस्त को होगी और सभी की निगाहें नतीजों पर हैं।
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