उपचुनाव में BJP को झटका: क्या दरक रहा है कोर वोट बैंक? समझें हार के मायने
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उपचुनाव में BJP को झटका: क्या दरक रहा है कोर वोट बैंक? समझें हार के मायने

बांकीपुर और दतिया उपचुनाव में BJP की हार का विश्लेषणात्मक ब्योरा। जानिए कैसे प्रशांत किशोर का उदय, NEET विवाद और प्रत्याशी चयन की गलतियां हार का कारण बनीं।


Warning for BJP: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए राजनीतिक मोर्चे पर लगातार दूसरा हफ्ता बुरी खबरें लेकर आया है। जहां बीते हफ्ते NEET और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने के खिलाफ हुए राष्ट्रव्यापी छात्र विरोध प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था, वहीं इस हफ्ते की शुरुआत दो राज्यों के विधानसभा उपचुनावों में मिली करारी हार के साथ हुई है। भाजपा शासित दो राज्यों—बिहार और मध्य प्रदेश—में पार्टी को तगड़ा झटका लगा है।

बिहार में भाजपा अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की खाली की हुई पारंपरिक सीट बांकीपुर गंवा बैठी है, वहीं मध्य प्रदेश के दतिया में भी पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा है। हालांकि, गुजरात की मंजनपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा ने बड़े अंतर से जीत दर्ज कर अपनी सीट बरकरार रखी है। आमतौर पर सत्ताधारी दलों का उपचुनावों में दबदबा रहता है, ऐसे में गुजरात की जीत के बावजूद बांकीपुर और दतिया की हार भाजपा के लिए बेहद दर्दनाक साबित हो रही है।

बांकीपुर: 50 हजार की बढ़त गंवाई, प्रशांत किशोर ने विधानसभा में रचा इतिहास

बांकीपुर सीट पर मिली हार भाजपा के लिए सबसे अधिक पीड़ादायक मानी जा रही है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस सीट पर 50,000 से भी अधिक वोटों के विशाल अंतर से जीत दर्ज की थी।

जन सुराज की पहली एंट्री: चुनाव रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने बांकीपुर सीट जीतकर बिहार विधानसभा में अपना पहला कदम रख दिया है।

बूथ-वार समीक्षा: हार के बाद भाजपा नेताओं ने कहा है कि इस शिकस्त का बूथ-वार विश्लेषण किया जाएगा ताकि प्रशांत किशोर की जीत के अंतर और वोटों के ध्रुवीकरण की वास्तविक वजहों को समझा जा सके।

राजद और PK में साठगांठ का आरोप

भाजपा के शुरुआती आकलन के अनुसार, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने अपने वोटों का बड़ा हिस्सा सीधे प्रशांत किशोर को ट्रांसफर करवा दिया।

तेजस्वी का 1 घंटे का प्रचार: भाजपा नेताओं का कहना है कि RJD नेता तेजस्वी यादव ने बांकीपुर में केवल एक घंटे का चुनाव प्रचार किया, जो इस बात का संकेत है कि RJD और प्रशांत किशोर के बीच अंदरूनी साठगांठ थी।

सवर्ण वोट बैंक में सेंध: भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, RJD का कोर वोट बैंक बरकरार रहा, लेकिन सोची-समझी रणनीति के तहत प्रशांत किशोर को आगे बढ़ाया गया ताकि भाजपा के पारंपरिक उच्च-जाति (सवर्ण) वोट बैंक में सेंध लगाई जा सके।

आंकड़ों में RJD का बिखराव: पिछले विधानसभा चुनाव में RJD उम्मीदवार रेखा गुप्ता को 46,000 से अधिक वोट मिले थे, लेकिन इस बार वह 15,000 वोट भी हासिल नहीं कर सकीं।

कोर वोटर का मोहभंग और उम्मीदवारी का फैसला

बांकीपुर में भाजपा के कुल वोटों की संख्या में लगभग एक-तिहाई की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। पार्टी नेतृत्व ने स्वीकार किया है कि उनके पारंपरिक वोट बैंक का एक बड़ा हिस्सा उनसे छिटक गया है।

उम्मीदवार बदलना पड़ा भारी: सूत्रों के मुताबिक, बांकीपुर में उम्मीदवार बदलने के फैसले ने जनता के बीच यह संदेश दिया कि भाजपा अपने समर्थकों को "टेकन फॉर ग्रांटेड" (हल्के में) लेती है।

नितिन नवीन के दौरे भी रहे बेअसर: हालांकि बांकीपुर नितिन नवीन की पारंपरिक सीट रही है और उन्होंने खुद चार बार क्षेत्र का दौरा किया, लेकिन स्थानीय नेतृत्व के भरोसे चुनाव अभियान छोड़ना उल्टा पड़ गया।

जनता की नाराजगी के बड़े कारण: भाजपा नेताओं ने अनौपचारिक रूप से स्वीकार किया कि NEET पेपर लीक आंदोलन, UGC गाइडलाइंस को लेकर उपजा भ्रम, और हालिया भारत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर कोर वोटर बेहद नाराज था। इसी नाराजगी के कारण मतदान का प्रतिशत काफी कम रहा।

छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई: इसके अलावा, बिहार के विभिन्न हिस्सों में छात्रों के विरोध प्रदर्शन और उन पर हुई पुलिस कार्रवाई का भी भाजपा की चुनावी संभावनाओं पर सीधा असर पड़ा।

मुख्यमंत्री पर हमला 'दिशाहीन': भाजपा नेताओं ने यह भी टिप्पणी की कि प्रशांत किशोर द्वारा बिहार के मुख्यमंत्री को निशाना बनाए जाने की रणनीति हालांकि "दिशाहीन" है, फिर भी इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा है।

दतिया: CM मोहन यादव की बढ़ीं मुश्किलें, नरोत्तम मिश्रा पर गिरेगी गाज

मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर हुई हार से मुख्यमंत्री मोहन यादव के लिए अंदरूनी चुनौतियां बढ़ने की पूरी संभावना है, जो पहले से ही पार्टी के भीतर एक गुट के विरोध का सामना कर रहे हैं।

नरोत्तम मिश्रा के बूथ पर भी हार: दतिया में हार का मुख्य ठीकरा पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर फोड़े जाने की तैयारी है। इस सीट से तीन बार विधायक रहे नरोत्तम मिश्रा ने टिकट काटे जाने पर खुलेआम अपनी नाराजगी जताई थी। उनके समर्थकों ने क्षेत्र में जमकर उपद्रव किया था। हालांकि, बाद में पार्टी के कहने पर उन्होंने चुनाव प्रचार किया, लेकिन आज आलम यह रहा कि भाजपा उनके गृह पोलिंग बूथ पर भी चुनाव हार गई।

पहले से मुश्किल थी राह: भाजपा नेताओं का तर्क है कि दतिया में मुकाबला बेहद कठिन था। पिछले विधानसभा चुनाव में पूरे राज्य में भाजपा की प्रचंड लहर के बावजूद पार्टी दतिया सीट हार गई थी।

कांग्रेस ने बचाई सीट: कांग्रेस इस सीट पर केवल अपना कब्जा बनाए रखने में सफल रही है। हालांकि, भाजपा नेताओं ने स्वीकार किया कि चाहे बांकीपुर हो या दतिया, उम्मीदवारों के चयन में हुई गलतियों ने इस हार में अहम भूमिका निभाई।

संगठन और सरकार में बड़े बदलाव के संकेत

यद्यपि भाजपा आधिकारिक तौर पर इन उपचुनावों की हार को युवाओं के असंतोष और छात्र आंदोलनों से जोड़ने से बच रही है, लेकिन इन परिणामों के बाद पार्टी के भीतर गहरा आत्ममंथन शुरू हो गया है।

पार्टी के शीर्ष सूत्रों का कहना है कि भाजपा को अब जमीनी और बुनियादी मुद्दों का समाधान करने के लिए कमर कसनी होगी। इसके मद्देनजर आने वाले दिनों में केंद्र और राज्य स्तर पर सरकार तथा पार्टी संगठन - दोनों में व्यापक और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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