
छात्र आंदोलन का खौफ या नैरेटिव में नाकामी? क्यों हटाए गए मालवीय-सूर्या?
BJP IT सेल प्रमुख पद से अमित मालवीय की छुट्टी, दीपक म्हास्के बने नए प्रमुख। तेजस्वी सूर्या भी युवा मोर्चा से बाहर। जानिए क्या है छात्र आंदोलन का कनेक्शन।
Reshuffle In BJP: भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम सामने आते ही सियासी गलियारों में एक ही सवाल गूंज रहा है कि आखिर एक दशक से पार्टी का डिजिटल किला संभालने वाले अमित मालवीय और फायरब्रांड युवा चेहरा तेजस्वी सूर्या एक साथ किनारे क्यों लगा दिए गए? पार्टी ने अमित मालवीय की जगह दीपक म्हास्के को आईटी सेल की कमान सौंपी है, जबकि तेजस्वी सूर्या को युवा मोर्चा (BJYM) अध्यक्ष पद से हटाने के बाद नई टीम में कोई दूसरी जिम्मेदारी भी नहीं दी गई।
राजनीतिक पंडितों और भाजपा के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो इस बड़े फैसले के तार सीधे जंतर-मंतर पर हुए 'जेन-ज़ी' छात्र आंदोलन, पेपर लीक विवाद और युवाओं के बीच अचानक कमजोर पड़े पार्टी के नैरेटिव से जुड़े हैं।
1. अमित मालवीय पर क्यों गिरी गाज? क्या ढह गया नैरेटिव का किला?
बीते 12 सालों में यह पहला ऐसा मौका था जब सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भाजपा बैकफुट पर नजर आई।
जवाब देने में बेबसी: जंतर-मंतर पर छात्रों के उग्र प्रदर्शन, पेपर लीक और नौकरियों की कमी को लेकर जब इंटरनेट पर सरकार के खिलाफ माहौल बना, तब मालवीय की अगुवाई वाला आईटी सेल उसकी कोई मजबूत काट नहीं पेश कर पाया।
कंटेंट का अकाल: डिजिटल स्पेस में ऐसे असरदार कंटेंट की भारी कमी दिखी जो भड़के हुए छात्रों को शांत कर सके या सरकार का पक्ष मजबूती से जनता के सामने रख पाए।
बदलाव की मजबूरी: सोशल मीडिया पर पार्टी की लगातार होती किरकिरी को देखते हुए ही मालवीय की छुट्टी तय मानी जा रही थी। अब छत्तीसगढ़ के संगठनात्मक अनुभव वाले दीपक म्हास्के के कंधे पर इस बिगड़े नैरेटिव को सुधारने का जिम्मा है।
2. तेजस्वी सूर्या की छुट्टी क्यों? युवा मोर्चा ढाल क्यों नहीं बन पाया?
तेजस्वी सूर्या को जब युवा मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था, तब इसे उनकी बड़ी राजनीतिक तरक्की माना गया था। लेकिन जब परीक्षा धांधली और घटते रोजगार को लेकर युवा पीढ़ी सड़कों पर उतरी, तो तेजस्वी सूर्या और उनका युवा संगठन कहीं फ्रंटफुट पर नजर ही नहीं आया।
युवाओं से टूटता संपर्क: भाजपा में युवा मोर्चा का काम ही नई पीढ़ी को विचारधारा से जोड़ना है। लेकिन जब जेन-ज़ी का एक बड़ा वर्ग सरकार के खिलाफ खड़ा हुआ और युवा मोर्चा उनका गुस्सा शांत करने या ढाल बनने में नाकाम रहा, तो शीर्ष नेतृत्व की चिंता बढ़ गई।
पूरी तरह संगठन से बाहर: तेजस्वी को सिर्फ युवा मोर्चा से ही नहीं हटाया गया, बल्कि पूरी राष्ट्रीय टीम से बाहर रखकर पार्टी ने यह साफ कर दिया है कि काम न दिखने पर कोई रियायत नहीं मिलेगी।
PM मोदी से मोहन भागवत तक: शीर्ष नेतृत्व की बढ़ी बेचैनी
जंतर-मंतर आंदोलन के बाद से भाजपा और संघ दोनों में इस बात को लेकर हलचल तेज हो गई थी कि युवा पीढ़ी के बीच पार्टी का आधार न खिसकने पाए।
लाल किले से PM का इशारा: स्वाधीनता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'दिमागी नक्सल' जैसे कड़े शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि कुछ लोग युवाओं को भटका रहे हैं, जिन्हें पहचानकर युवाओं को विकसित भारत की मुख्यधारा से जोड़ना होगा।
संघ प्रमुख की सक्रियता: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी हाल के दिनों में जेन-ज़ी से जुड़े आयोजनों में खुद शामिल होते दिखे हैं।

