CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई में हल्ला बोल, विशाल ददलानी-शबाना आजमी भी प्रदर्शन में उतरे
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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई में हल्ला बोल, विशाल ददलानी-शबाना आजमी भी प्रदर्शन में उतरे

SIR और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर जारी विवाद के बीच मुंबई में CJP ने प्रदर्शन किया। इससे पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में पुलिस ने 700 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया था।


मुंबई: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर जारी विवाद के बीच शुक्रवार, 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में Cockroach Janta Party (CJP) का बड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। शाम करीब 4 बजे शुरू हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। संगीतकार और गायक विशाल ददलानी, अभिनेत्री शबाना आजमी और अभिनेता नसीरुद्दीन शाह भी प्रदर्शन में शामिल हुए। अभिनेता प्रकाश राज ने भी आंदोलन का समर्थन किया है।

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके की अगुवाई में प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। मुंबई पुलिस ने पहले शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी, लेकिन CJP ने इसके बावजूद आंदोलन जारी रखने और इसे ‘जेल भरो आंदोलन’ में बदलने का ऐलान किया था।

प्रदर्शन में पहुंचीं शबाना आजमी ने वोट के अधिकार का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सवाल पूछना नागरिकों का अधिकार है। प्रदर्शन से पहले भी उन्होंने लोगों से शिवाजी पार्क पहुंचने की अपील की थी।

दिल्ली में 700 से ज्यादा हिरासत में
इससे पहले पहले शुक्रवार को ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी ज्ञानेश कुमार और SIR के मुद्दे पर प्रदर्शन हुआ। AISA, SFI, NSUI समेत विभिन्न छात्र और राजनीतिक संगठनों से जुड़े प्रदर्शनकारी वहां पहुंचे। दिल्ली पुलिस ने अनुमति नहीं होने का हवाला देते हुए 700 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए लोगों में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा और AAP नेता आतिशी, सौरभ भारद्वाज तथा संजय सिंह भी शामिल थे।

इस तरह एक ही दिन दिल्ली और मुंबई में हुए प्रदर्शनों ने SIR और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर चल रहे विवाद को सड़क तक पहुंचा दिया है। CJP ने कहा है कि उसका आंदोलन दूसरे शहरों में भी आगे बढ़ाया जाएगा।

क्या है पूरा विवाद?
SIR के तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची की व्यापक जांच और पुनरीक्षण कर रहा है। इसी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं। विवाद खास तौर पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होने, दस्तावेजों की मांग और नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया को लेकर है। विपक्ष का आरोप है कि वास्तविक और लंबे समय से पंजीकृत मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए जा रहे हैं और इससे नागरिकों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है।

चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करता रहा है। आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करना है, ताकि मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या अन्य अपात्र प्रविष्टियों की पहचान की जा सके और सभी पात्र नागरिकों का नाम सूची में सुनिश्चित हो। आयोग ने यह भी कहा है कि जिन मतदाताओं के नाम को लेकर सवाल हैं, उनके लिए दावा, आपत्ति और सुनवाई की प्रक्रिया उपलब्ध है।

विवाद उस समय और बढ़ गया जब The Indian Express की रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में SIR, मतदाता सूची, Form-6 और चुनावी डेटाबेस से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। चुनाव आयोग ने इसके जवाब में कहा कि आयोग के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि अलग-अलग विचार और टिप्पणियां संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं और पिछले एक साल के अंतिम फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग ने अपने कामकाज और SIR प्रक्रिया को कानून के अनुरूप बताया है।

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