
SC आदेश पर CJP की आपत्ति: केस वापस ले सरकार, वरना फिर होगा आंदोलन
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर CJP की सख्त चेतावनी। Saurav Das ने कहा- केस वापस न हुए तो दोबारा शुरू होगा आंदोलन।
Supreme Court CJP Protest: नीट-UG पेपर लीक को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए अंतरिम आदेश के बाद मामला एक बार फिर गरमा गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश (विशेषकर निर्देश संख्या 4) पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। सीजेपी का आरोप है कि केंद्र सरकार और भाजपा शासित राज्य सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की आड़ लेकर प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज एफआईआर (FIR) की जांच जारी रखने और उन्हें परेशान करने की कोशिश कर सकते हैं। सौरव दास ने साफ किया कि अगर केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को छात्रों से किए गए लिखित आश्वासनों को पूरा नहीं किया और एफआईआर वापस नहीं लीं, तो सीजेपी देशव्यापी आंदोलन दोबारा शुरू करने के लिए मजबूर होगी।
"अदालत के आदेश की आड़ में न मुकरे सरकार" – सौरव दास का आरोप
सीजेपी ने कहा कि 25 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार ने युवाओं को यह स्पष्ट और लिखित भरोसा दिया था कि आंदोलनकारियों पर दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी और किसी पर भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।
विश्वासघात की आशंका: सौरव दास ने कहा कि इसी भरोसे के आधार पर सीजेपी ने अपना आंदोलन स्थगित किया था, लेकिन कोर्ट में सरकारी वकीलों ने एफआईआर जारी रखने की दिशा का विरोध नहीं किया।
कार्यपालिका के पास केस वापसी का अधिकार: उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बावजूद केंद्र या राज्य सरकारों के पास केस वापस लेने का पूरा अधिकार है। सरकार कोर्ट के आदेश का बहाना बनाकर अपनी जवाबदेही से नहीं भाग सकती।
पारदर्शिता की मांग: सीजेपी ने मांग की है कि केंद्र और एनडीए शासित राज्य सरकारें 25 जुलाई के समझौते की शर्तों को तुरंत सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखें ताकि अदालत के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके।
"मांगें पूरी नहीं हुईं तो फिर से गरमाएगा आंदोलन" – केंद्र को डेडलाइन
सौरव दास ने सोशल मीडिया और प्रेस बयान के जरिए केंद्र सरकार को अपनी गारंटियों को पूरा करने की अंतिम समय सीमा (डेडलाइन) की याद दिलाई।
आज खत्म हो रही है डेडलाइन: सीजेपी ने कहा कि सरकार के पास वादों को पूरा करने के लिए दिया गया समय आज समाप्त हो रहा है।
बिहार-असम का दिया उदाहरण: उन्होंने कहा कि जिस तरह बिहार और असम सरकारों ने केस वापस लेने का नोटिफिकेशन जारी किया है, उसी तरह केंद्र और बाकी राज्य भी तुरंत औपचारिक आदेश जारी करें।
फिर सड़कों पर उतरने की चेतावनी: सीजेपी प्रवक्ता ने चेतावनी देते हुए कहा, "अगर युवाओं से किया वादा तोड़ा गया तो हमारे पास छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए फिर से राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।"
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और छात्रों की चिंताएं
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्य कांत की पीठ ने बिना क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले छात्रों की रिहाई का आदेश दिया है, लेकिन जांच जारी रखने की अनुमति भी दी है।
दिशा निर्देश 4 पर आपत्ति: सीजेपी का मानना है कि राज्यों की पुलिस इस बिंदु का इस्तेमाल छात्रों को परेशान करने और झूठे मुकदमों में फंसाने के लिए कर सकती है।
जनता के भरोसे का उल्लंघन: सीजेपी ने कहा कि हजारों छात्रों और युवाओं से किया गया सार्वजनिक वादा कानून के पेच फंसाकर कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
Next Story

