
महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में बृजभूषण शरण सिंह बरी
बीजेपी नेता और कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बरी कर दिया है। बता दें महिला पहलवानों ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।
महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह तथा सह-आरोपी विनोद तोमर को बड़ी राहत मिली है।दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) अध्यक्ष और बरी कर दिया है। अदालत ने 2 जुलाई को दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
2023 में शुरू हुआ था विवाद
यह मामला जनवरी 2023 में उस समय चर्चा में आया, जब ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया और विनेश फोगाट समेत कई पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न और पद के दुरुपयोग के आरोप लगाते हुए दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना शुरू किया। सरकार के आश्वासन के बाद आंदोलन कुछ समय के लिए स्थगित हुआ, लेकिन कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए अप्रैल 2023 में पहलवान दोबारा धरने पर बैठ गए।
सात महिला पहलवानों ने दर्ज कराई थी शिकायत
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद दिल्ली पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज की थीं। इनमें सात महिला पहलवानों की शिकायतें शामिल थीं, जिनमें एक नाबालिग भी थी। हालांकि, नाबालिग से जुड़ा पॉक्सो (POCSO) मामला बाद में वापस ले लिया गया और वह केस बंद कर दिया गया।
किन धाराओं में तय हुए हैं आरोप?
बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354, 354A, 354D, 506 और 34 के तहत आरोप तय किए गए हैं। इन धाराओं में महिला की मर्यादा भंग करना, यौन उत्पीड़न, पीछा करना और आपराधिक धमकी जैसे आरोप शामिल हैं। वहीं, सह-आरोपी विनोद तोमर पर एक शिकायतकर्ता को कथित रूप से धमकाने का आरोप है। दोष सिद्ध होने पर बृजभूषण को अधिकतम पांच वर्ष और विनोद तोमर को दो वर्ष तक की सजा हो सकती है।
दोनों पक्षों ने क्या दलील दी?
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता महिला पहलवानों ने आरोप लगाया कि बृजभूषण शरण सिंह ने कई मौकों पर उनके साथ अनुचित व्यवहार किया, जिससे उनके खेल और मानसिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।वहीं, बचाव पक्ष ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि शिकायतकर्ताओं के बयानों में कई विरोधाभास हैं। बचाव पक्ष का यह भी दावा है कि जिन घटनाओं का उल्लेख किया गया है, उनमें से कुछ के समय बृजभूषण संबंधित स्थानों पर मौजूद ही नहीं थे और शिकायतें भी कथित घटनाओं के कई साल बाद दर्ज कराई गईं।
अब इस बहुचर्चित मामले में सभी की नजरें राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर के खिलाफ लगे आरोपों पर अदालत क्या निर्णय सुनाती है।

