
NDA 'मंगल मिलन' में दरार? TMC से अलग हुए NCPI के 3 मुस्लिम सांसद बैठक से गायब!
संसदीय दल की बैठक में सांगठनिक और राजनीतिक दृश्य भी देखने लायक थे। हाल ही में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नितिन नवीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ठीक बगल में बैठे नजर आए।
संसद भवन परिसर में मंगलवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों की साप्ताहिक 'मंगल मिलन' बैठक आयोजित की गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और विदेश मंत्री एस जयशंकर समेत सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रमुख घटक दलों के शीर्ष नेताओं ने इसमें हिस्सा लिया। लेकिन इस हाई-प्रोफाइल राजनीतिक जमावड़े के बीच सबसे ज्यादा चर्चा तृणमूल कांग्रेस (TMC) से टूटकर बने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के तीन प्रमुख मुस्लिम सांसदों की गैरहाजिरी को लेकर रही।
पश्चिम बंगाल के जंगीपुर से सांसद खलीलुर रहमान, मुर्शिदाबाद से अबू ताहेर खान और बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं हुए। गौर करने वाली बात यह है कि यह दूसरा मौका है जब इन तीन सांसदों ने राजग की बैठक से दूरी बनाई है; इससे पहले 21 जुलाई को आयोजित पहली 'मंगल मिलन' बैठक से भी वे नदारद रहे थे।
"हम NDA के साथ नहीं हैं"- सांसदों की साफ चेतावनी
बैठक में शामिल न होने की वजह बताते हुए सांसद अबू ताहेर खान ने संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए दो टूक शब्दों में अपना रुख साफ किया। खान ने कहा, "हम राजग के साथ नहीं हैं और न ही भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो रहे हैं। आज भी राजग की बैठक थी, लेकिन हम तीनों उसमें शामिल नहीं हुए। हालांकि, हम मुख्यमंत्री की ओर से बुलाई जाने वाली बैठकों में अपने क्षेत्र के विकास कार्यों के सिलसिले में शामिल होते रहेंगे। लेकिन हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि अल्पसंख्यकों और मुसलमानों के खिलाफ जाने वाले किसी भी कदम का हम कड़ा विरोध करेंगे और उसका समर्थन नहीं करेंगे।"
सूत्रों के मुताबिक, मुस्लिम बहुल निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले इन तीनों सांसदों को अपने-अपने क्षेत्रों में अपने मतदाताओं की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा था। बीजेपी के साथ कथित निकटता को लेकर उठ रहे सवालों के बाद ही इन तीनों नेताओं ने एनडीए की बैठकों से दूर रहने का राजनीतिक फैसला लिया है।
दल-बदल कानून की तलवार और लोकसभा स्पीकर का फैसला
यह अनुपस्थिति ऐसे संवेदनशील समय में सामने आई है जब 20 सदस्यीय एनसीपीआई समूह को एक अलग दल के रूप में मान्यता देने का मामला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष लंबित है।
संविधान के दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत किसी भी बागी समूह को कार्रवाई से बचने के लिए मूल दल (TMC के कुल 28 सांसद) के कम से कम दो-तिहाई (यानी 19 सांसदों) का समर्थन अनिवार्य होता है। ऐसे में 20 में से यदि 3 सांसद अलग राह पकड़ते हैं, तो पूरे समूह पर दल-बदल कानून की गाज गिरने का खतरा मंडराने लगता है।
हालांकि, एनसीपीआई के सदन के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय पहली बार राजग संसदीय दल की बैठक में पहुंचे। उन्होंने असंतोष की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, "एनसीपीआई में सभी सांसद पूरी तरह एकजुट हैं। मैं देश के सबसे वरिष्ठ सांसदों में से एक हूं और एनडीए की बैठक का अनुभव काफी सकारात्मक रहा।"
पीएम मोदी के बगल में दिखे नितिन नवीन, बांकीपुर हार के बाद पहली बैठक
संसदीय दल की बैठक में सांगठनिक और राजनीतिक दृश्य भी देखने लायक थे। हाल ही में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नितिन नवीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ठीक बगल में बैठे नजर आए। यह बैठक इसलिए भी खास थी क्योंकि एक दिन पहले ही बिहार के पटना स्थित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजे आए थे, जहां बीजेपी उम्मीदवार को चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के हाथों हार का सामना करना पड़ा। बांकीपुर सीट नितिन नवीन के राज्यसभा जाने और अध्यक्ष बनने के बाद खाली हुई थी।
17.1 करोड़ नौकरियों का दावा और खेल नीति पर प्रस्तुतिकरण
बैठक के भीतर हुए विचार-विमर्श की जानकारी देते हुए बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने बताया कि केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने देश की खेल नीतियों पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया। मांडविया ने बताया कि 2014 के बाद अपनाई गई दूरदर्शी खेल नीतियों का ही नतीजा है कि भारतीय एथलीट आज ओलंपिक, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में रिकॉर्ड पदक जीत रहे हैं।
इसके अलावा, देश में युवाओं के लिए रोजगार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर भी आंकड़े पेश किए गए। मनोज तिवारी के अनुसार, "बैठक में प्रस्तुत किए गए आंकड़ों से साफ है कि 2004 से 2014 के बीच यूपीए सरकार के शासनकाल में केवल 2.89 करोड़ युवाओं को रोजगार मिला था, जबकि 2014 से 2026 के बीच एनडीए सरकार के कार्यकाल में कुल 17.1 करोड़ युवाओं को रोजगार और आजीविका के अवसर प्राप्त हुए हैं।"
बैठक के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री पीपी चौधरी ने चुटकी लेते हुए कहा कि "मंगल मिलन में सब मंगल ही होता है।" बैठक में जदयू, शिवसेना, एनसीपी और जद (एस) समेत अन्य सहयोगी दलों के प्रतिनिधियों ने सरकार की प्राथमिकताओं पर अपनी सहमति जताई। लेकिन सवाल यही बना हुआ है कि क्या एनसीपीआई के तीन बागी सांसद एनडीए के इस 'मंगल' में आने वाले दिनों में कोई बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा करेंगे?

