
वांगचुक को नहीं मिली राहत, अब हाईकोर्ट की डबल बेंच में चुनौती
भूख हड़ताल के 21वें दिन सफदरजंग ले जाए गए वांगचुक; पत्नी गीतांजलि हाईकोर्ट के फैसले को डबल बेंच में देंगी चुनौती, सिब्बल ने पूछा- क्या अपनी पसंद के इलाज का हक नहीं?
Delhi High Court On Sonam Wangchuk: दिल्ली हाईकोर्ट ने रविवार को एक विशेष सुनवाई के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित (शिफ्ट) करने की याचिका पर कोई भी अंतरिम आदेश जारी करने से साफ इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की एकल पीठ ने कहा कि इस चरण में वांगचुक को निजी अस्पताल भेजने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकारी अस्पताल के डॉक्टर उनकी लगातार निगरानी और बेहतर देखभाल कर रहे हैं। हालांकि, अदालत के इस फैसले के तुरंत बाद सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो और उनके वकीलों ने इसे हाईकोर्ट की डबल जज (डिवीजन) बेंच के सामने चुनौती देने का फैसला किया है।
डबल बेंच में आज ही तत्काल सुनवाई की मांग करेंगे विवेक तन्खा
सीनियर वकील विवेक तन्खा ने 'द फेडरल देश' को बताया कि वे एकल पीठ (सिंगल जज) के इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने याचिका दायर कर रहे हैं और सोमवार को इस मामले में तुरंत/तत्काल सुनवाई (Urgent Hearing) की मांग करेंगे। बता दें कि नीट (NEET) परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों की आत्महत्या के विरोध में वांगचुक बीते 28 जून से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। शनिवार को उनकी भूख हड़ताल के 21वें दिन दिल्ली पुलिस उन्हें जबरन उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई थी।
कपिल सिब्बल का सवाल: क्या वांगचुक हिरासत में हैं?
रविवार को हुई इस स्पेशल हियरिंग के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से देश के दिग्गज वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में पैरवी की। सिब्बल ने जोरदार बहस करते हुए मांग की कि वांगचुक को तुरंत गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने अदालत के सामने तीखा सवाल उठाया कि सोनम वांगचुक किसी आपराधिक हिरासत में नहीं हैं, तो क्या देश में किसी नागरिक को अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने के मौलिक अधिकार से भी वंचित किया जा सकता है?
कोर्ट ने कहा- डॉक्टरों का सहयोग करें वांगचुक, केंद्र को नोटिस
दूसरी तरफ, सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) चेतन शर्मा ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि सफदरजंग अस्पताल के सीनियर डॉक्टर्स वांगचुक की पूरी देखभाल कर रहे हैं, लेकिन इसके लिए खुद वांगचुक को भी मेडिकल स्टाफ का सहयोग करना होगा। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि यदि आवश्यक हो तो सोनम वांगचुक चिकित्सकीय हस्तक्षेप के लिए डॉक्टरों का सहयोग करेंगे।
न्यायमूर्ति पुष्करणा ने अपने आदेश में कहा कि सरकार द्वारा जंतर-मंतर से वांगचुक को हटाकर अस्पताल ले जाने की कार्रवाई को 'मनमाना' नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वांगचुक की पत्नी, भाई और रिश्तेदारों को उनसे 24 घंटे मिलने की छूट है। इसके साथ ही अदालत ने वांगचुक को प्राइवेट अस्पताल शिफ्ट करने की मुख्य याचिका पर केंद्र सरकार, सफदरजंग अस्पताल और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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