
अदालत से ACB ने सत्येन्द्र जैन को न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की
दिल्ली जल बोर्ड STP मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा। ACB के हवाला आरोपों पर सत्येंद्र जैन के वकीलों ने गैर-कानूनी गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया।
Satyendra Jain Arrests: दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) अपग्रेडेशन में हुए कथित टेंडर घोटाले को लेकर राउज एवेन्यू कोर्ट में तीखी बहस देखने को मिली। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने पूर्व जल मंत्री सत्येंद्र जैन समेत पांच आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की है, जबकि छठे आरोपी अंकित श्रीवास्तव की दो दिन की पुलिस कस्टडी मांगी गई है। दूसरी तरफ, बचाव पक्ष ने इस गिरफ्तारी को पूरी तरह गैर-कानूनी बताते हुए जमानत की अर्जी दाखिल की है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने इस पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
ACB का दावा: टेंडर में धांधली और करोड़ों का लेन-देन
अदालत में ACB ने आरोप लगाया कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के अपग्रेडेशन टेंडर में भारी गड़बड़ी की गई। जाँच एजेंसी के अनुसार, टेंडर की शर्तों में बदलाव करके प्रतिस्पर्धा को कम किया गया ताकि एक खास निजी कंपनी को फायदा पहुंचाया जा सके।
ACB का कहना है कि इस मामले में करीब 5 करोड़ रुपये का बैंकिंग और हवाला के जरिए लेन-देन हुआ है। जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि एक कंपनी के जरिए दिल्ली जल बोर्ड के तत्कालीन अधिकारी उदित प्रकाश राय और उनके रिश्तेदारों को लाखों रुपये ट्रांसफर किए गए, जिसका इस्तेमाल संपत्ति खरीदने में हुआ।
सत्येंद्र जैन का पक्ष: 'मैं तो उस समय जेल में था'
सत्येंद्र जैन ने खुद कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यमुना को साफ करना सरकार का चुनावी वादा था और इसी वजह से मौजूदा STP की क्षमता बढ़ाने का फैसला लिया गया था। उन्होंने कहा कि वे तकनीकी विशेषज्ञ नहीं हैं और उन्हें अधिकारियों की दी गई जानकारी पर ही भरोसा करना पड़ता था।
जैन ने कहा कि जिस समय टेंडर की प्रक्रिया पूरी हुई, उस समय वे बिना किसी विभाग के जेल में बंद थे और उनके पास कोई फाइल नहीं आई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें इस मामले में जबरन मुख्य आरोपी बनाया जा रहा है।
वकीलों की दलील: गिरफ्तारी का तरीका गलत
सत्येंद्र जैन के वकील हरिहरन ने तर्क दिया कि FIR दर्ज होने के 27 महीने बाद यह गिरफ्तारी की गई है। उन्होंने कहा कि ED पहले ही इस मामले में बिना किसी गिरफ्तारी के चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। जांच में पूरा सहयोग करने के बावजूद बिना किसी ठोस वजह के गिरफ्तार कर लिया गया।
वहीं अंकित श्रीवास्तव के वकील राजत भारद्वाज ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब उनके मुवक्किल 3 और 5 अगस्त को जांच में लगातार शामिल हो रहे थे, तो अचानक ऐसा क्या बदल गया कि उन्हें गिरफ्तार करना पड़ा।
आगे क्या होगा?
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद राउज एवेन्यू कोर्ट ने ACB की अर्जी और सभी आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट के फैसले के बाद ही तय होगा कि आरोपियों को कस्टडी में भेजा जाएगा या उन्हें राहत मिलेगी।
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