Delhi Lakshmi Yojna: दिल्ली की भाजपा सरकार ने एक बार फिर से महिलाओं को ढाई हजार रूपये प्रति माह की आर्थिक सहायता देने के अपने वादे को दोहराते हुए एक नया कदम उठाया है। दिल्ली सरकार ने 'महिला समृद्धि योजना' का नाम बदलकर 'दिल्ली लक्ष्मी योजना' करने के फैसला लिया है। इसके साथ ही दिल्ली सरकार ने इसमें कुछ शर्तें भी लागू की हैं, जिसे लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों ने दिल्ली सरकार के इस कदम को दिल्ली की महिलाओं के साथ एक बहुत बड़ा धोखा करार दिया है। गौरतलब है कि साल 2025 में दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनी थी। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने वादा किया था कि सरकार बनते ही 100 दिनों के भीतर इस योजना को लागू कर दिया जाएगा। लेकिन अब सरकार के कार्यकाल को डेढ़ साल होने को है, और यह योजना धरातल पर पूरी तरह शुरू नहीं हो पाई है। इस बीच, सरकार ने न सिर्फ योजना का नाम बदला है, बल्कि इसमें कई सख्त और पेचीदा शर्तें भी जोड़ दी हैं, जिनका जिक्र चुनाव के समय नहीं किया गया था।
रक्षा बंधन पर लागू करने की उम्मीद
दिल्ली सरकार ने जो शर्तें राखी हैं उसके तहत राजधानी दिल्ली में 21 से 60 साल की पात्र महिलाओं को हर महीने ₹2,500 मिलेंगे। इस योजना के 28 अगस्त को रक्षाबंधन के मौके पर शुरू होने की संभावना है।
इस योजना का लाभ उठाने के लिए 3 ज़रूरी शर्तें:
लाभार्थी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए।
लाभार्थी कम से कम 10 साल से दिल्ली का निवासी होना ज़रूरी है।
लाभार्थी के परिवार की सालाना आय ₹2.5 लाख से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए।
चुनाव में बिना शर्त वादे का दावा, अब नियमों का जाल; विपक्ष हमलावर
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव के वक्त वोट बटोरने के लिए किसी भी नियम या शर्त का खुलासा नहीं किया गया था।
डेढ़ साल का लंबा इंतजार: 100 दिन में शुरू होने वाली योजना को लटकाकर अब आगामी 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर लॉन्च करने की नई तारीख दी जा रही है।
चुनावी वादों से यू-टर्न: चुनाव के समय हर महिला को बिना शर्त मदद का भरोसा दिया गया था, लेकिन अब शर्तों का जाल बुन दिया गया है।
नाम बदलने की सियासत: विपक्ष के मुताबिक, योजना को लागू करने में हुई भारी देरी को छिपाने के लिए ही गुपचुप तरीके से नाम बदला गया है।
इन 3 पेचीदा शर्तों को लेकर दिल्ली सरकार पर उठे गंभीर सवाल
सरकार द्वारा अचानक लागू की गई इन तीन शर्तों के कारण दिल्ली की लाखों मध्यमवर्गीय और गरीब महिलाएं इस योजना के दायरे से बाहर हो सकती हैं।
₹2.5 लाख की सालाना आय सीमा: सरकार ने नियम तय किया है कि जिस महिला के परिवार की सालाना आय ढाई लाख से अधिक होगी, उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा। विपक्ष का कहना है कि दिल्ली जैसे महंगे शहर में इस मामूली आय सीमा के कारण 70 फीसदी से ज्यादा जरूरतमंद महिलाएं इस योजना से वंचित हो जाएंगी।
10 साल का स्थायी निवास प्रमाण: आवेदन करने वाली महिला का पिछले कम से कम 10 वर्षों से दिल्ली का निवासी होना अनिवार्य कर दिया गया है। इस सख्त शर्त के कारण हाल के वर्षों में दिल्ली आकर बसीं लाखों प्रवासी महिलाएं सीधे तौर पर इस मासिक सहायता की रेस से बाहर हो जाएंगी।
आपराधिक रिकॉर्ड की शर्त: योजना का लाभ लेने के लिए महिला का किसी भी प्रकार का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि पुलिस वेरिफिकेशन और एनओसी के नाम पर नौकरशाही महिलाओं को परेशान करेगी।
100 दिन के चुनावी वादे को डेढ़ साल तक खींचने और फिर बिना बताए कड़े नियम थोपने के इस सरकारी रवैये ने दिल्ली की राजनीति को पूरी तरह गरमा दिया है।