
शिकायतकर्ता बोली: पीएम को गाली देने वाली 'आंदोलनकारी नहीं रीलबाज़'
Jantar Mantar PM Remarks Row: पीएम पर टिप्पणी मामले में दिल्ली पुलिस एक्शन में। शिकायतकर्ता स्मृति सिंह का बड़ा दावा- रुचिका सिंह आंदोलनकारी नहीं, रीलबाज़ हैं।
FIR Against Ruchika Singh: जंतर-मंतर पर NEET विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, एक महिला नेत्री और पीएम की दिवंगत माताजी के खिलाफ अभद्र भाषा और अपशब्दों का इस्तेमाल कर विवादों में आई युवती रुचिका सिंह के खिलाफ अब दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक जांच शुरू कर दी है। नोएडा में ज़ीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज कराने वाली शिकायतकर्ता और सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता स्मृति सिंह चंदेल ने 'द फ़ेडरल देश' से एक्सक्लूसिव बातचीत में इसका खुलासा किया है। स्मृति सिंह के मुताबिक, 30 जुलाई (गुरुवार) को दिल्ली पुलिस ने उनसे फोन पर संपर्क कर मामले से जुड़ी अतिरिक्त जानकारियां मांगी हैं।
राजा भैया की पार्टी से जुड़ी हैं शिकायतकर्ता, बताया क्यों दर्ज कराई FIR
'द फ़ेडरल देश' से खास बातचीत में एडवोकेट स्मृति सिंह ने अपनी पृष्ठभूमि और एफआईआर दर्ज कराने की मुख्य वजहों पर खुलकर बात की।
कौन हैं स्मृति सिंह: पेशे से सुप्रीम कोर्ट की प्रैक्टिसिंग लॉयर स्मृति सिंह उत्तर प्रदेश के चर्चित विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ 'राजा भैया' की पार्टी 'जनसत्ता दल लोकतांत्रिक' से जुड़ी हैं और गाजियाबाद जिले की महिला विंग की अध्यक्ष हैं।
सोशल मीडिया रील से हुआ खुलासा: स्मृति सिंह ने बताया कि वे रुचिका सिंह को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानती थीं। इंस्टाग्राम पर रील देखते समय उन्होंने पाया कि युवती ने एक से अधिक वीडियो में प्रधानमंत्री, एक महिला नेत्री और पीएम की माँ के खिलाफ बेहद गंदी और आपत्तिजनक शब्दावली का इस्तेमाल किया है।
देश और संस्थाओं की छवि का सवाल: उन्होंने कहा, "फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए इस तरह की घटिया और अभद्र भाषा का इस्तेमाल हमारे देश और आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरनाक है। अगर देश के प्रधानमंत्री की छवि खराब होती है, तो यह पूरे देश की छवि का नुकसान है। इसी के चलते मैंने कानूनी कदम उठाया।"
'वह आंदोलनकारी नहीं, सिर्फ रीलबाज़': CJP प्रवक्ता को करारा जवाब
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास द्वारा इस एफआईआर को 'आंदोलनकारियों पर पुलिसिया अत्याचार' बताए जाने के दावे को स्मृति सिंह ने सिरे से खारिज कर दिया।
एक्टिविस्ट का मुखौटा नहीं चलेगा: सौरव दास के बयानों पर पलटवार करते हुए स्मृति सिंह ने कहा, "सौरव दास जी को समझना चाहिए कि वह कोई छात्र, एक्टिविस्ट या आंदोलनकारी नहीं थीं, वह केवल एक 'रीलबाज़' थीं। उनका एकमात्र मकसद विवादित बयानों के जरिए अपने फॉलोअर्स बढ़ाना था।"
संसदीय मर्यादा से तुलना गलत: जब उनसे पूछा गया कि कई सांसदों पर भी आपराधिक मामले दर्ज हैं, तो एक आम नागरिक के खिलाफ क्रिमिनल प्रोसीडिंग क्यों? इस पर स्मृति सिंह ने कहा कि भारत के इतिहास में किसी भी नेता या नागरिक ने सार्वजनिक मंच पर इस तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं किया है, जैसा उस युवती ने किया।
दिल्ली पुलिस की एंट्री
मामले की कानूनी स्थिति और आगे की पुलिसिया प्रक्रिया पर बात करते हुए शिकायतकर्ता ने कई अहम प्रशासनिक जानकारियां साझा कीं।
नोएडा में क्यों दर्ज हुई Zero FIR: स्मृति सिंह ने बताया कि चूंकि आरोपी युवती पहले नोएडा के एक सैलून में काम करती थी और उसका एड्रेस वहां का था, इसलिए नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में ज़ीरो एफआईआर दर्ज कराई गई ताकि लोकल पुलिस तुरंत एक्शन ले सके।
दिल्ली पुलिस से आया फोन: 30 जुलाई (गुरुवार) को दिल्ली पुलिस ने स्मृति सिंह से संपर्क कर जांच में सहयोग और अतिरिक्त इनपुट मांगे हैं। फिलहाल आरोपी युवती अपने नॉएडा स्थित पते पर नहीं मिल रही है। जैसे ही उसका कुछ पता चलेगा उससे पूछताछ की जाएगी।
दिल्ली पुलिस और नॉएडा पुलिस ने नहीं दी कोई प्रतिक्रिया
इस बीच दिल्ली पुलिस और नॉएडा पुलिस की तरफ से किसी प्रकार की कोई प्रक्रिया नहीं मिली है। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने ये निर्देश दिया है कि जंतर मंतर पर प्रदर्शन में शामिल हुए छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाए। ऐसे में ये FIR दर्ज होना कहीं न कहीं सवाल भी खड़ा करती है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का बावजूद ये FIR दर्ज क्यों की गयी है? क्या दिल्ली पुलिस इस मामले में कार्रवाई करेगी, जबकि दिल्ली सरकार ने भी ये दावा किया है कि आन्दोलनकारी छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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