रणक्षेत्र बनी लुटियंस दिल्ली; पुलिस की लाठी से खाली हुआ जंतर-मंतर
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रणक्षेत्र बनी लुटियंस दिल्ली; पुलिस की लाठी से खाली हुआ जंतर-मंतर

NEET धांधली को लेकर CJP के 'चलो संसद' मार्च में पुलिस और छात्रों के बीच झड़प; आंसू गैस के गोले छोड़े गए, जंतर-मंतर से खदेड़े गए युवा।


Ground Report: दिल्ली के जंतर मन्तर पर कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा संसद मार्च के आवाहन पर सिर्फ दिल्ली एनसीआर से ही नहीं बल्कि देश के अलग अलग हिस्सों से लोग शामिल होने पहुंचे. अधिकतर युवा रहे जो अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के मकसद से यहाँ पहुंचे लेकिन अधिकतर प्रदर्शनकारी बिना किसी नेतृत्व के दिखाई दिए, शायद यही वजह रही कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कहीं न कहीं हिंसा से बाख नहीं पाया और आलम ये रहा कि न केवल पुलिस ने लाठी चार्ज या आंसू गैस के गोले छोड़े बल्कि कुछ कुछ जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच पत्थरबाज़ी भी देखने को मिली. सोमवार शाम को भी जंतर मंतर के नजदीक बड़ी संख्या में युवा पुलिस के सामने खड़े नज़र आये. पुलिस उन्हें धीरे धीरे पीछे खदेड़ती दिखी लेकिन युवा अपनी मांग रखने से नहीं चूंके.

रविवार देर रात से ही जुटने लगे थे समर्थक

सोमवार यानी 20 जुलाई को संसद मार्च का आवाहन पहले से ही किया जा रहा था. शनिवार को जिस तरह से सोनम वांगचुक को हटाया गया, उससे ये लगा कि कहीं पुलिस CJP के प्रदर्शन को जंतर मंतर से ही न हटा दे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. इस बीच रविवार शाम के बाद छात्रों के अलग अलग संगठनों ने ज्यादा से ज्यादा संख्या में सोमवार को जंतर मंतर पर पहुँचने का आवाहन किया. वहीँ जेएनयू के कुछ संगठनों के नाम पर ये अपील की गयी कि पुलिस सोमवार को सुबह जंतर मंतर के रास्ते बंद किये जा सकते हैं इसलिए रविवार तड़के 4 बजे जंतर मंतर के लिए कूंच किया जाएगा. ये तो रही दिल्ली एनसीआर की बात लेकिन ग्राउंड पर जो देखने को मिला, वो ये कि दूर दराज से भी बड़ी संख्या में युवा रेल के माध्यम से रविवार देर रात और सोमवार सुबह दिल्ली के अलग अलग रेलवे स्टेशन पहुंचे और संसद मार्च में शरीक होने के लिएजंतर मंतर पहुँच गए.

CJP की शांतिपूर्ण अपील

हालाँकि कि CJP की बात करें तो जंतर मंतर पर पहले ही दिन से अभिजित दिपके और उनकी टीम लगातार ये अपील करती रही है कि कोई भी कानून अपने हाथ में न लें और न ही किसी प्रकार की हिंसा करे. रविवार को CJP ने प्रदर्शनकारियों के लिए क्या करें और क्या न करें की सूची भी तैयार की और सभी से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की कोई हिंसा या अराजकता ना करें ताकि पुलिस को कोई मौका न मिले किसी भी प्रकार की कोई कार्रवाई करने की, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया और जिस तरह दिन आगे बढ़ा, ये प्रदर्शन/मार्च शांति पूर्ण नहीं रह सका.

पुलिस और प्रदर्शनकारियों का एक दूसरे पर आरोप

सुबह लगभग 10 बजे के करीब कुछ नेता जंतर मंतर पहुंचे और उन्होंने लेफ्ट की छात्र इकाई AISA के 3 छात्रों का अनशन ख़त्म करवाया. इसके बाद अभिजित दिपके का अनशन भी ख़त्म कराया गया. अभिजित दिपके ने मंच से ये भी कहा कि सिर्फ अनशन खत्म हुआ है लेकिन हमारा आन्दोलन जारी रहेगा. संसद मार्च भी जारी रहेगा. इसके बाद जंतर मंतर और आसपास के मार्ग जैसे टॉलस्टॉय मार्ग, फ़िरोज़शाह रोड, जनपथ, रायसीना मार्ग आदि पर बड़ी संख्या में युवा पहुँच चुके थे तो संसद भवन कूंच के लिए तैयार थे. सभी संसद की तरफ आगे बढ़ें लेकिन तभी दिल्ली पुलिस और अर्ध सैनिक बलों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका और इसी क्रम में दोनों पक्षों में हल्का संघर्ष भी हुआ, जिसके तहत दिल्ली पुलिस ने न केवल लाठी चार्ज किय बल्कि आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए.


प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां भी शामिल रहीं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ बल प्रयोग किया. उन्हें जबरन धकेला. कई प्रदर्श्नाकरी चोटिल भी हुए हैं. जानकारी के अनुसार आज दिल्ली के RML अस्पताल में कुल 60 घायल लोगों को लाया गया है। इनमें से 25 लोगों को भर्ती किया गया है। 11 मरीज़ रेड ज़ोन में हैं, जबकि एक की हालत गंभीर बनी हुई है।

वहीँ दिल्ली पुलिस का दावा है कि सभी प्रदर्शनकारियों को पहले से ही अवगत करवाया गया था कि न तो मार्च की और न ही जंतर मंतर पर प्रदर्शन की कोई मंजूरी है. सभी से शांति बनाए रखे जाने की अपील भी की गयी. लेकिन जब भारी भीड़ संसद की तरफ बढ़ी तो उन्हें रोका गया और इसी क्रम में जब पुलिस पर पथराव आदि किया गया तो पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा. पुलिस ने ये भी कहा कि बड़ी संख्या में पुलिस कर्मियों को चोट आई है.

क्या इंटेलिजेंस फेलियर या फिर ना ना करते भी करने दिया गया प्रदर्शन

सोमवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान जिस तरह से केंद्र सरकार के खिलाफ न केवल प्रदर्शन हुआ बल्कि संसद की तरफ कूंच भी किया गया, जिसकी वजह से माहौल कुछ ऐसा बन गया कि जैसे दिल्ली के सबसे सुरक्षित जगह पर अराजकता फ़ैल गयी हो. ये आलम तब रहा जब दिल्ली के जंतर मंतर पर ये प्रदर्शन 20 से भी ज्यादा दिनों से जारी था. दिल्ली पुलिस को ये पता था कि सोमवार को संसद मार्च का आवाहन किया गया है, जिसमें दूर दूर से लोग आ सकते हैं. रविवार रात से ही भीड़ का आना भी शुरू हो चुका था.

सवाल ये उठ रहा है कि जब शनिवार सुबह सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया और CJP को ये कहा गया कि उनके पास धरने की कोई इजाजत नहीं है, उन्हें ये जगह खाली करनी होगी तो फिर दिल्ली पुलिस ने सोमवार का इंतज़ार क्यों किया?

सवाल ये उठ रहे हैं कि क्या केंद्र सरकार ने ही दिल्ली पुलिस को इस धरने को ख़त्म नहीं करने दिया ताकि देश भर में जिस तरह से जो अन्य मुद्दे उछल रहे हैं, उनसे ध्यान भटकाया जा सकेगा.

दूर रही कांग्रेस, लेकिन छात्र इकाई अंत में हुई शामिल!

CJP के धरने प्रदर्शन से दूरी बनाए रखने वाली कांग्रेस पार्टी सोमवार को भी परोक्ष रूप से दूर ही दिखी लेकिन सूत्रों का दावा है कि NSUI के सदस्य जरुर इसमें शामिल हुए. हालाँकि उन्होंने अपने बैनर का कोई इस्तेमाल नहीं किया. लेकिन सोमवार शाम को NSUI के मुख्यालय में दिल्ली पुलिस की तरफ से आंसू गैस के गोले भी दागे गए. खुद NSUI ने अपने X हैंडल पर विडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि लोकतंत्र में छात्रों की आवाज़ को सुनने के बजाय उसे दबाने की कोशिश की जा रही है।

यह वीडियो IYC/NSUI मुख्यालय का है, जहां पुलिस की लाठीचार्ज और आंसू गैस से बचने के लिए छात्र पनाह लेने पहुंचे थे। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जनरल शाह के आदेश पर IYC मुख्यालय के अंदर तक आंसू गैस के गोले दागे गए और निहत्थे छात्रों को निशाना बनाया गया।

यह दृश्य लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

CJP और सरकार के बीच बात

कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद दावा किया कि "हमने जेपी नड्डा से दो बार मुलाकात की. बैठक के दौरान हमने अपनी तीन मांगें रखीं. पहली, सोनम वांगचुक को तुरंत रिहा किया जाए. दूसरी, हमारी मांग है कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, उन्हें या तो कैबिनेट से बर्खास्त किया जाए या वे खुद इस्तीफा दें. जब तक उनका इस्तीफा नहीं हो जाता, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा, तीसरी, हमारी मांग है कि NEET की तैयारी करने वाले उन छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए, जिनमें से 20 से ज्यादा छात्रों की मौत हो चुकी है. हम इन्हीं मांगों को लेकर जेपी नड्डा से मिले,"

जंतर मंतर प्रदर्शन साईट कराई गयी खाली

दिल्ली पुलिस ने शाम लगभग 6 बजे तक जंतर मंतर की प्रदर्शन साईट को खाली करा लिया. सुबह से ही तमाम प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर से बाहर कर आसपास की सड़कों की तरफ खदेड़ दिया गया था. इसके बाद पुलिस ने इतनी बड़ी संख्या में आये लोगों को अलग अलग जगह बंटने पर मजबूर किया, इसके लिए बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने तय नीति के साथ काम करना शुरू किया. भीड़ जिसमें अधिकतर युवा शामिल रहे, उन्हें फ़िरोज़शाह रोड, टॉलस्टॉय मार्ग, जनपथ, रायसीना मार्ग, केजी मार्ग, अशोका रोड आदि जो भी मार्ग जंतर मंतर और संसद भवन के बीच हैं, वहां की तरफ भेजना शुरू किया. इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की तरफ पथराव भी किया, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे और लाठी चार्ज भी किया.

मेट्रो स्टेशनों में लगी रही भीड़

सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दिल्ली मेट्रो ने कई मेट्रो स्टेशन जैसे जनपथ, उद्योग भवन, पटेल चौक, शाष्त्री भवन आदि को यात्रियों के अन्दर/बाहर निकलने के लिए बंद कर दिया था, इसलिए राजीव चौक, बाराखम्बा रोड आदि मेट्रो स्टेशन पर दोपहर से ही भीड़ देखने को मिली. बड़ी संख्या में लोग टिकट खरीदने की लाइन में खड़े दिखे. लेकिन शाम को सबसे ज्यादा समस्या उन लोगों के लिए बन गयी, जो दफ्तर से घर जाने के लिए मेट्रो स्टेशन पर पहुंचे.

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