
जंतर-मंतर बवाल के बाद एक्शन में पुलिस, प्रदर्शनों पर लागू हुए 10 नियम
जंतर-मंतर पर हालिया बवाल के बाद दिल्ली पुलिस आयुक्त ने खुफिया तंत्र को मजबूत करने और 10 प्रमुख बिंदुओं पर पहले से जानकारी जुटाने के निर्देश दिए हैं।
Delhi Police's Direction to tackle Protests: दिल्ली में होने वाले बड़े प्रदर्शनों और जनसभाओं से पहले खुफिया जानकारी जुटाने के तंत्र में बड़ा बदलाव किया गया है। दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने बल को निर्देश दिया है कि किसी भी बड़े विरोध-प्रदर्शन से पहले उसकी विस्तृत खुफिया तस्वीर तैयार की जाए।
जंतर-मंतर की हिंसा के बाद लिया गया फैसला
यह नया निर्देश 20 जुलाई को राजधानी के जंतर-मंतर और कनोट प्लेस में नागरिक अधिकारों से जुड़े संगठनों (सीजेपी) के प्रदर्शन और उस दौरान हुए बवाल के बाद जारी किया गया है। पुलिस की तैयारियों को लेकर उठे सवालों के बाद यह कदम उठाया गया है।
खुफिया विंग को योजना के केंद्र में रखा गया
नए निर्देशों के तहत खुफिया विंग को प्रदर्शन से पहले की जाने वाली योजना के केंद्र में रखा गया है। वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर ग्राउंड पर तैनात रहने वाली फील्ड यूनिट्स तक, सभी को अब भीड़ जुटने से पहले सटीक और ठोस जानकारी हासिल करनी होगी।
सिर्फ भीड़ के अनुमान से आगे बढ़ेगी पुलिस
अब पुलिस सिर्फ प्रदर्शनकारियों की संख्या का अनुमान लगाने या उनके इकट्ठा होने की जगह की पहचान करने तक सीमित नहीं रहेगी। इस नई खुफिया कवायद का मकसद प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों, आयोजकों, उनकी मांगों, भीड़ जुटाने के नेटवर्क, उनके ठहरने की जगह, स्थानीय संपर्कों, फंडिंग और रसद व्यवस्था की गहराई से जांच करना है।
दिल्ली पुलिस आयुक्त के 10 प्रमुख निर्देश
दिल्ली पुलिस आयुक्त की ओर से जारी 10 प्रमुख निर्देशों में शामिल हैं:
प्रदर्शनकारियों की पहचान: प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों की पहचान और अनुमानित संख्या तय करना।
आयोजकों की प्रोफाइलिंग: भीड़ जुटाने से जुड़े आयोजकों, प्रमुख नेताओं और मुख्य पदाधिकारियों की जानकारी जुटाना।
मांगों की ट्रैकिंग: प्रस्तावित प्रदर्शन के पीछे के मुद्दों, मांगों और कारणों का अग्रिम रूप से पता लगाना।
लामबंदी का आकलन: यह पता लगाना कि प्रतिभागियों को कैसे इकट्ठा किया जा रहा है और वे किन राज्यों या क्षेत्रों से आ रहे हैं।
आवाजाही और ठहरने पर नजर: प्रतिभागी दिल्ली में कहां ठहरेंगे, शहर के भीतर उनकी आवाजाही और उनके वापस लौटने की योजना की जानकारी एकत्र करना।
स्थानीय नेटवर्क का मैपिंग: प्रदर्शन में शामिल संगठनों और उनके स्थानीय संपर्कों व समर्थन नेटवर्क के बीच संबंधों की जांच करना।
संगठनात्मक जुड़ाव की जांच: लामबंदी से जुड़े समूहों और संगठनों की पहचान करना।
फंडिंग की ट्रैकिंग: प्रदर्शन और उससे जुड़ी गतिविधियों को वित्तपोषित करने वाले स्रोतों की जानकारी जुटाना।
रसद का मूल्यांकन: सभा के लिए किए जा रहे परिवहन, आवास और अन्य रसद व्यवस्था का विवरण प्राप्त करना।
कानून-व्यवस्था के जोखिम का आकलन: प्रदर्शन शुरू होने से पहले संभावित भीड़ और सार्वजनिक व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन तैयार करना।
जंतर-मंतर के प्रदर्शन से सीखा गया सबक
यह कदम जंतर-मंतर और कनोट प्लेस में छात्रों तथा सीजेपी से जुड़े बड़े प्रदर्शनों के बाद उठाया गया है, जिसके बाद पुलिस को अपने खुफिया तंत्र और तैयारियों का नए सिरे से मूल्यांकन करना पड़ा। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जोर इस बात पर है कि ग्राउंड टीमों तक पहुंचने वाली जानकारी इतनी विस्तृत हो कि वे किसी भी स्थिति का पहले से अंदाजा लगा सकें।
वायरलेस संचार नेटवर्क को किया जाएगा मजबूत
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस आयुक्त ने बल को अपने वायरलेस संचार नेटवर्क को मजबूत करने का भी निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य नियमित पुलिसिंग और बड़े अभियानों के दौरान धरातल पर मौजूद कर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच सूचना के प्रवाह को बेहतर बनाना है।
सभी विंग्स के बीच बेहतर समन्वय की योजना
संचार प्रणाली का उपयोग बीट अधिकारियों, ट्रैफिक, सुरक्षा, पीसीआर और जिला इकाइयों सहित विभिन्न विंगों में अधिक प्रभावी ढंग से किया जाएगा। वरिष्ठ अधिकारियों से कहा गया है कि वे हर समय वायरलेस संचार पर सुलभ रहें ताकि ग्राउंड अपडेट्स और निर्देशों का आदान-प्रदान बिना किसी देरी के हो सके।
20 जुलाई को आखिर क्या हुआ था
20 जुलाई को शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर करीब 30,000 युवा जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में एकत्र हुए थे। जब प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की तो तनाव बढ़ गया और पुलिस के साथ झड़प हो गई। इसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया गया था, जिसकी काफी आलोचना हुई थी।
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