
अभिजीत दीपके: "मुझे हीरो मत बनाओ, एक व्यक्ति से देश बर्बाद होता है"
जंतर-मंतर पर 36 दिनों के ऐतिहासिक छात्र आंदोलन और CJP के दबाव के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पीएम मोदी को भेजा त्यागपत्र; अभिजीत दीपके बोले—"क्रांति हो गई, लेकिन अभी दो मांगें बाकी।"
CJP Protest: देशभर में हिला देने वाले NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा घोटालों के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच मोदी सरकार को एक बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र भेज दिया है, जिसमें उन्होंने देश के युवाओं की भावनाओं और जंतर-मंतर पर बने हालातों का हवाला दिया है।
जंतर-मंतर पर जश्न और अभिजीत दीपके का बड़ा बयान
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर सामने आते ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर डेरा डाले बैठे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थकों और छात्रों के बीच जश्न की लहर दौड़ गई। CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, "झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।" उन्होंने स्पष्ट किया कि यह इस बात का प्रमाण है कि अगर देश की जनता और युवा डरे बिना अपने हक के लिए खड़े हों, तो वे किसी भी ताकतवर सरकार से इस्तीफा ले सकते हैं।
दीपके ने चेतावनी भरे लहजे में यह भी साफ कर दिया कि अभी आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि CJP की दो मुख्य मांगें अभी भी सरकार के सामने हैं:
एक करोड़ का मुआवजा: मई में NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले सभी छात्रों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
पुलिस कार्रवाई पर एक्शन: 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान शांतिपूर्ण छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो और छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मुख्य वजहें
अपने त्यागपत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्ट किया कि पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम से उनका मन व्यथित है:
राष्ट्र-विरोधी ताकतों का हवाला: उन्होंने पत्र में लिखा कि जंतर-मंतर और पूरे देश में जो स्थिति बन चुकी है, उसका फायदा राष्ट्र-विरोधी ताकतें न उठाएं और देश की एकता तथा छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे, इसलिए उन्होंने पद छोड़ना उचित समझा।
जिम्मेदारी और परीक्षा संचालन: उन्होंने कहा कि 3 मई को NEET-UG में अनियमितता सामने आने के बाद सरकार ने सीबीआई जांच बिठाई और 21 जून को दोबारा परीक्षा संपन्न कराई। 16 जुलाई को परिणाम भी आए, लेकिन इसके बाद राजनीतिक और अन्य कारणों से छात्रों को भ्रमित करने की कोशिश की गई।
यह पहला मौका है जब मोदी सरकार के कार्यकाल में किसी प्रमुख मंत्री को इस तरह के जन-आंदोलन के दबाव में आकर इस्तीफा देना पड़ा है। राजनीतिक हलकों में इस घटना को युवा शक्ति की ऐतिहासिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
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