
डीटीसी बसों में बदला नियम: पिंक टिकट बंद, मुफ़्त सफ़र के लिए स्मार्ट कार्ड ज़रूरी
दिल्ली DTC और क्लस्टर बसों में 16 अगस्त 2026 से महिलाओं के लिए कागज़ी पिंक टिकट बंद। मुफ़्त यात्रा के लिए अब 'पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड' हुआ अनिवार्य।
Pink Card For DTC: यदि आप दिल्ली की डीटीसी (DTC) या क्लस्टर (DIMTS) बसों में नियमित सफ़र करती हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दिल्ली सरकार ने बसों में महिलाओं के लिए जारी मुफ़्त यात्रा योजना के नियमों में बड़ा बदलाव कर दिया है। 16 अगस्त 2026 से बसों में मुफ़्त सफ़र के लिए इस्तेमाल होने वाला कागज़ी 'पिंक टिकट' (Pink Ticket) पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
अब मुफ़्त बस यात्रा की सुविधा प्राप्त करने के लिए महिला यात्रियों के पास 'पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड' (Pink Saheli Smart Card) होना अनिवार्य होगा।
कैसे काम करेगा पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड?
नए नियमों के लागू होने के साथ ही अब बसों में यात्रा की प्रक्रिया डिजिटल हो जाएगी।
कार्ड टैप करना अनिवार्य: 16 अगस्त से बस में चढ़ने के बाद महिला यात्री को अपना 'पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड' बस में लगी इलेक्ट्रॉनिक मशीन या ऑटोमैटिक कार्ड रीडर पर टैप (Tap) करना होगा।
सफ़र के दौरान साथ रखना ज़रूरी: कार्ड रीडर पर सफलता पूर्वक कार्ड टैप होने के बाद ही शून्य-किराया (Zero Fare) मान्य होगा। केवल कार्ड बनवा लेना ही काफ़ी नहीं है, सफ़र के दौरान कार्ड को भौतिक रूप से अपने पास रखना और हर यात्रा में टैप करना अनिवार्य होगा।
अगर स्मार्ट कार्ड नहीं हुआ तो क्या किराया देना होगा?
परिवहन विभाग के नए दिशानिर्देशों के अनुसार, बिना वैलिड स्मार्ट कार्ड के मुफ़्त यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सामान्य किराया लागू: यदि किसी महिला यात्री के पास 'पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड' नहीं है, तो उसे मुफ़्त यात्रा का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसी स्थिति में यात्री को निर्धारित किराया देकर सामान्य बस टिकट लेना होगा।
कार्ड भूलने पर भी लगेगा किराया: यदि आपने अपना स्मार्ट कार्ड बनवा लिया है, लेकिन सफ़र के दौरान उसे घर भूल गईं या साथ लाना भूल गईं, तब भी आपको मुफ़्त सफ़र की छूट नहीं मिलेगी और कंडक्टर को सामान्य किराया देना पड़ेगा।
क्यों किया गया यह बदलाव?
दिल्ली सरकार और परिवहन निगम द्वारा कागज़ी पिंक टिकट की जगह 'पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड' अनिवार्य करने के पीछे मुख्य उद्देश्य बसों में महिला यात्रियों की सटीक संख्या का डिजिटल डेटा तैयार करना, टिकट जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और कागज़ी टिकटों की छपाई में होने वाले ख़र्च व लीकेज को रोकना है।
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