Kejriwal Protest Against E20 Petrol: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने E-20 (एथेनॉल-मिश्रित) पेट्रोल के मुद्दे को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस मुद्दे को देशव्यापी आंदोलन में बदलने के इरादे से अरविंद केजरीवाल मंगलवार को पार्टी दफ्तर से प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर पदयात्रा (मार्च) निकालने के लिए सड़क पर उतरे। हालांकि, दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें फ़िरोज़शाह रोड पर ही रोक दिया।
आगे बढ़ने की अनुमति न मिलने पर केजरीवाल अपने वरिष्ठ नेताओं और करीब 100 कार्यकर्ताओं के साथ सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। कुछ देर विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी के बाद वे वापस लौट गए, लेकिन उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि मोदी सरकार ने E-20 पेट्रोल देश की जनता पर जबरन थोपना बंद नहीं किया, तो आम आदमी पार्टी इसे नीट (NEET) विवाद से भी बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बनाकर देश भर में सड़कों पर उतरेगी।
दोपहर 12:05 बजे: पार्टी दफ्तर से PMO की ओर कदम 'द फ़ेडरल देश' की ग्राउंड टीम के अनुसार, मंगलवार दोपहर ठीक 12:05 बजे आम आदमी पार्टी के राउज़ एवेन्यू स्थित केंद्रीय दफ्तर से इस पैदल मार्च की शुरुआत हुई।
2.33 लाख याचिकाओं के प्रिंटआउट: अरविंद केजरीवाल और पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के नेतृत्व में निकले इस मार्च में करीब 100 चुनिंदा कार्यकर्ता शामिल थे। ये कार्यकर्ता ऑनलाइन याचिका अभियान के जरिए जुटाए गए 2,33,238 नागरिकों के हस्ताक्षर और याचिकाओं के प्रिंटआउट अपने हाथों में लिए हुए थे, जिन्हें वे प्रधानमंत्री को सौंपना चाहते थे।
फ़िरोज़शाह रोड पर घेराबंदी: जैसे ही मार्च आगे बढ़ा, पहले से सतर्क दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी नफ़री ने उन्हें फ़िरोज़शाह रोड गोलचक्कर के पास बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।
"ट्रम्प के दबाव में लिया फैसला, भारतीय नहीं अमेरिकी किसानों को फायदा"
सड़क पर धरने के दौरान अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की ऊर्जा नीति पर सीधे अमेरिकी प्रभाव का गंभीर आरोप लगाया।
अमरीकी हितों का दावा: केजरीवाल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दबाव में आकर देशवासियों पर E-20 पेट्रोल थोपा है। उन्होंने कहा, "सरकार का यह दावा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से भारतीय किसानों को फायदा होगा, पूरी तरह झूठा है। सच यह है कि मकई और एथेनॉल अमेरिका से आयात किया जा रहा है, जिससे भारतीय नहीं बल्कि अमेरिकी किसानों का पेट भरा जा रहा है।"
विदेशी मुद्रा की बचत पर सवाल: AAP संयोजक ने कहा कि जब एथेनॉल अमेरिका से ही खरीदा जाएगा, तो विदेशी मुद्रा भंडार कैसे बचेगा? यह सीधे तौर पर देश की जनता की जेब और राष्ट्रीय संसाधनों के साथ खिलवाड़ है।
राज्यों की विधानसभाओं से संसद तक सड़क संग्राम का खाका
अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे को सिर्फ दिल्ली तक सीमित न रखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की पूरी रूपरेखा पेश की:
पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पारित: केजरीवाल ने जानकारी दी कि पंजाब की AAP सरकार ने एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल के फैसले को वापस लेने की मांग को लेकर विधानसभा में आधिकारिक प्रस्ताव पारित कर दिया है।
अन्य राज्यों में भी उठेगी आवाज: गुजरात, जम्मू-कश्मीर और गोवा जैसे राज्यों में जहां AAP के विधायक मौजूद हैं, वहां की विधानसभाओं में भी E-20 नीति का पुरजोर विरोध किया जाएगा।
जनता से उतरने की अपील: केजरीवाल ने कहा कि देश में 22 करोड़ वाहन चालक हैं, जिनकी गाड़ियों के इंजन को E-20 पेट्रोल नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे अपनी गाड़ियों और जेब को बचाने के लिए सड़कों पर आएं।
"सरकार ने मानी माइलेज में कमी और रबर पार्ट में खराबी की बात" केजरीवाल ने कहा कि शुरुआत में सरकार E-20 के दुष्प्रभावों को मानने के लिए तैयार नहीं थी, लेकिन अब व्यापक जन-असंतोष के बाद सरकार को भी स्वीकार करना पड़ा है कि इससे वाहनों के माइलेज में गिरावट आ रही है और गाड़ियों के रबर पार्ट्स को नुकसान पहुंच रहा है।
उन्होंने दोहराया कि आने वाले दिनों में E-20 पेट्रोल के खिलाफ आंदोलन के अगले चरण और भावी योजनाओं का सार्वजनिक रूप से ऐलान किया जाएगा।
पुलिस की चाक-चौबंद सुरक्षा: केजी मार्ग से मंडी हाउस तक छावनी केजरीवाल ने 4 अगस्त को दोपहर 12 बजे 100 कार्यकर्ताओं के साथ PMO जाने और 2,33,238 याचिकाओं के प्रिंटआउट सौंपने का ऐलान पहले ही कर दिया था। इसके मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने लुटियंस दिल्ली में अभेद्य सुरक्षा घेरा तैयार किया था:
मंडी हाउस गोलचक्कर से फ़िरोज़शाह रोड की ओर जाने वाले रास्ते को केजी मार्ग रेड लाइट के आगे ही बैरिकेड्स लगाकर सील कर दिया गया था।
फ़िरोज़शाह रोड गोलचक्कर से पहले बहुस्तरीय बैरिकेडिंग की गई थी।
पहले से ही तय था कि पुलिस प्रदर्शनकारियों को फ़िरोज़शाह रोड से आगे नहीं बढ़ने देगी, जिसके चलते मार्च वहीं थम गया।
पंजाब और हरियाणा से भी पहुंचे लोग: "महंगे दाम पर बेचा जा रहा मिलावटी तेल"
इस मार्च की सबसे खास बात यह रही कि इसमें केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों हरियाणा और पंजाब से भी बड़ी संख्या में लोग अपनी आवाज बुलंद करने पहुंचे थे। 'द फ़ेडरल देश' की ग्राउंड टीम ने विरोध मार्च में शामिल ऐसे नागरिकों से बात की जिन्होंने ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं।
माइलेज में भारी गिरावट से बढ़ा वित्तीय बोझ: प्रदर्शनकारियों ने अपनी व्यावहारिक परेशानियां साझा करते हुए कहा कि E-20 पेट्रोल का इस्तेमाल शुरू करने के बाद से उनकी गाड़ियों के माइलेज में भारी कमी आई है। इससे उनका रोजाना का पेट्रोल खर्च काफी बढ़ गया है।
इंजन खराब होने का डर: वाहन मालिकों ने चिंता जताई कि एथेनॉल-मिश्रित ईंधन के कारण उनकी गाड़ियों के महंगे इंजन और रबर पार्ट्स समय से पहले खराब हो सकते हैं, जिससे उन्हें भविष्य में बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा।
"भारत से तेल खरीदने वाले देश बेच रहे सस्ता पेट्रोल": केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए हरियाणा और पंजाब से आए नागरिकों ने आक्रोश जताया, "जो पड़ोसी देश भारत से पेट्रोल आयात करते हैं, वे भी अपनी जनता को बेहद सस्ता और गुणवत्तापूर्ण ईंधन दे रहे हैं। लेकिन हमारी अपनी सरकार देशवासियों को महंगे दामों पर मिलावटी तेल (एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल) बेचने पर आमादा है।" उन्होंने साफ किया कि सरकार किसी भी सूरत में अपनी यह नीति जनता पर जबरन नहीं थोप सकती।