एलन मस्क और मुकेश अंबानी में सीधी टक्कर! स्टारलिंक पर रिलायंस का बड़ा पलटवार
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एलन मस्क और मुकेश अंबानी में सीधी टक्कर! स्टारलिंक पर रिलायंस का बड़ा पलटवार

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की मंजूरी को लेकर मस्क ने लगाए गंभीर आरोप, रिलायंस ने प्रतिस्पर्धा का स्वागत करते हुए सभी कंपनियों के लिए समान नियमों की वकालत की।


भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने को लेकर एलन मस्क और मुकेश अंबानी के बीच विवाद बढ़ गया है। मस्क के आरोपों पर अब रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जवाब दिया है। कंपनी ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को कहा कि वह प्रतिस्पर्धा से नहीं डरती और भारत में स्टारलिंक का स्वागत करती है। हालांकि, सभी कंपनियों को भारतीय कानूनों और सरकारी नियमों का पालन करना होगा।

एलन मस्क ने क्या आरोप लगाए?
टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क ने आरोप लगाया था कि भारत के कुछ प्रभावशाली उद्योगपति अपने कारोबारी हित बचाने के लिए स्टारलिंक की एंट्री रोक रहे हैं।

मस्क ने मुकेश अंबानी पर निशाना साधते हुए सवाल किया था कि क्या अंबानी ही भारत के असली बॉस हैं?

उनका दावा है कि स्टारलिंक पिछले पांच वर्षों से भारतीय नियमों का पालन करने की कोशिश कर रही है, लेकिन उसे अब तक सेवा शुरू करने की अंतिम मंजूरी नहीं मिली है।

रिलायंस ने क्या सफाई दी?
रिलायंस ने कहा कि भारत में घरेलू और विदेशी कंपनियों के लिए मंजूरी की प्रक्रिया एक जैसी है। कंपनी के मुताबिक, जियो की अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा भी सरकारी मंजूरी का इंतजार कर रही है।

रिलायंस ने याद दिलाया कि जियो ने 2016 में भारतीय टेलीकॉम बाजार में कदम रखा था। दस वर्षों में उसके ग्राहकों की संख्या 53 करोड़ से अधिक हो गई है।

कंपनी का कहना है कि प्रतिस्पर्धा से ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिलती हैं और वह स्टारलिंक सहित सभी कंपनियों के साथ मुकाबले के लिए तैयार है।

सरकार का क्या कहना है?
केंद्र सरकार पहले ही मस्क के आरोपों को खारिज कर चुकी है।

संचार मंत्रालय के मुताबिक, स्टारलिंक, जियो सैटेलाइट और यूटेलसैट वनवेब की सुरक्षा संबंधी जांच जारी है। तीनों कंपनियां मंजूरी की प्रक्रिया में लगभग एक ही स्तर पर हैं।

सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद कंपनियां स्पेक्ट्रम आवंटन की अगली प्रक्रिया में आगे बढ़ सकेंगी।

विवाद का आम लोगों पर क्या असर?

स्टारलिंक सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट उपलब्ध कराती है। यह तकनीक खासकर उन ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां मोबाइल नेटवर्क या फाइबर इंटरनेट की सुविधा सीमित है।

फिलहाल सवाल यही है कि भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को अंतिम मंजूरी कब मिलेगी और स्टारलिंक तथा जियो के बीच प्रतिस्पर्धा से ग्राहकों को कितना फायदा होगा।

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