
भारत में Starlink को कौन रोक रहा? एलन मस्क के आरोपों से मचा घमासान
स्टारलिंक को 2025 में शुरुआती लाइसेंस और अंतरिक्ष नियामक की अनुमति मिल चुकी थी। लेकिन अंतिम सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन बाकी है।
दुनिया के सबसे चर्चित अरबपति एलन मस्क ने भारत के टेलीकॉम बाजार को लेकर बड़ा आरोप लगाया है। मस्क का दावा है कि कुछ ताकतवर उद्योगपति अपना एकाधिकार बनाए रखने के लिए उनकी सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक को भारत में सेवाएं शुरू करने से रोक रहे हैं। केंद्र सरकार ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है।
मस्क ने क्या आरोप लगाए?
7 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मस्क ने दावा किया कि कुछ प्रभावशाली उद्योगपति भारतीय बाजार पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए स्टारलिंक की राह रोक रहे हैं। मस्क ने इसे भारत की जनता के खिलाफ अपराध बताया। हालांकि, उन्होंने किसी उद्योगपति या कंपनी का नाम नहीं लिया। उनकी टिप्पणी ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी से जुड़ी एक पोस्ट के जवाब में आई थी।
सरकार ने क्या जवाब दिया?
8 अक्टूबर को केंद्रीय संचार मंत्रालय ने कहा कि भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के लिए नियम सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू होते हैं। सरकार के मुताबिक, स्टारलिंक, रिलायंस समर्थित जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस और भारती समर्थित यूटेलसैट वनवेब की सुरक्षा जांच जारी है। तीनों कंपनियां लगभग एक ही नियामकीय चरण में हैं। सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद ही कंपनियां स्पेक्ट्रम आवंटन की अगली प्रक्रिया में जा सकेंगी।
स्टारलिंक की तैयारी कितनी पूरी?
स्टारलिंक को 2025 में शुरुआती लाइसेंस और अंतरिक्ष नियामक की अनुमति मिल चुकी थी। लेकिन अंतिम सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन बाकी है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में स्टारलिंक की उपाध्यक्ष लॉरेन ड्रेयर ने बताया कि कंपनी भारत में 20 गेटवे साइट और सैकड़ों एंटीना तैयार कर चुकी है। भारतीय उपयोगकर्ताओं का डेटा देश में रखने के इंतजाम भी किए गए हैं।
जियो और एयरटेल से क्या है संबंध?
भारत के टेलीकॉम बाजार में रिलायंस जियो और भारती एयरटेल का दबदबा है। पहले सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर इन कंपनियों और मस्क के बीच मतभेद रहे हैं। हालांकि, 2025 में जियो और एयरटेल ने स्टारलिंक उपकरणों के वितरण के लिए अलग-अलग समझौते भी किए थे।
आम लोगों पर क्या असर?
सैटेलाइट इंटरनेट से उन ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों को फायदा हो सकता है, जहां मोबाइल टावर या फाइबर नेटवर्क पहुंचाना मुश्किल है। फिलहाल स्टारलिंक की व्यावसायिक लॉन्च तारीख तय नहीं है। ऐसे में सवाल यही है कि कंपनी को अंतिम मंजूरी कब मिलेगी और भारतीय ग्राहकों को उसकी सेवाएं किस कीमत पर उपलब्ध होंगी।

