
यूरोप की सड़कों पर युवा विद्रोह! क्या चाहती है नई पीढ़ी?
महंगाई, बेरोजगारी, महंगे किराये और कमजोर होती भविष्य की उम्मीदों के बीच यूरोप की नई पीढ़ी व्यवस्था से जवाब और अपने बेहतर कल की मांग कर रही है।
यूरोप, जिसे बेहतर जीवन, मजबूत अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा के मॉडल के रूप में देखा जाता है, आज एक गंभीर सामाजिक असंतोष का सामना कर रहा है। फ्रांस से लेकर स्पेन, इटली, पुर्तगाल और अल्बानिया तक युवा सड़कों पर उतर रहे हैं। कहीं शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं, तो कहीं महंगे किराये, बढ़ती महंगाई और रोजगार की अनिश्चितता के खिलाफ आवाज उठ रही है।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल, फ्रांस में प्रदर्शन तेज
फ्रांस में स्कूली छात्र तीन सप्ताह से अधिक समय तक विरोध प्रदर्शन और स्कूलों की नाकेबंदी कर चुके हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर की जाए और जर्जर बुनियादी ढांचे में सुधार हो। खासकर कम आय वाले इलाकों के स्कूलों में संसाधनों की कमी को लेकर नाराजगी है।
धीरे-धीरे यह विरोध शिक्षा तक सीमित नहीं रहा। मजदूर संगठनों और दूसरे प्रदर्शनकारियों के शामिल होने से इसमें बढ़ती महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति जैसे मुद्दे भी जुड़ गए।
हालांकि, कई प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ जगहों पर हिंसा, आगजनी और लूटपाट भी हुई। फ्रांस में सप्ताहांत की अशांति के दौरान करीब 2,400 गिरफ्तारियां दर्ज की गईं। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा की निंदा की और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही।
घर का किराया युवाओं की कमाई पर भारी
यूरोप के युवाओं के सामने दूसरी बड़ी चुनौती है किफायती आवास की कमी। स्पेन की राजधानी मैड्रिड में बढ़ते किरायों के खिलाफ कई सप्ताह से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। बार्सिलोना समेत दूसरे शहरों में भी आवास संकट को लेकर नाराजगी सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, स्पेन में न्यूनतम मासिक वेतन 1,221 यूरो है, जबकि 80 वर्ग मीटर के फ्लैट का औसत मासिक किराया करीब 1,130 यूरो बताया गया है।
यानी न्यूनतम वेतन पाने वाले व्यक्ति की लगभग पूरी कमाई किराये में खर्च हो सकती है। ऐसे में भोजन, परिवहन और अन्य जरूरी खर्चों के लिए पैसे बचाना मुश्किल हो जाता है।
पुर्तगाल के लिस्बन और पोर्टो में भी आवास की बढ़ती लागत के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं।
इटली में महंगाई और रोजगार का दबाव
इटली में ‘इटालिया इन पियाज़ा’ यानी ‘इटली सड़कों पर’ नाम से हजारों प्रदर्शनकारियों ने बेहतर रोजगार, ऊंचे वेतन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आवास की मांग उठाई।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में इटली की महंगाई दर 4.2 प्रतिशत पहुंच गई, जबकि यूरोजोन की दर 3.8 प्रतिशत थी। ट्यूरिन, बोलोन्या और मिलान में कुछ प्रदर्शन हिंसक हो गए। मिलान में दो दिनों की अशांति के दौरान पुलिस के मुताबिक 271 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
यह स्थिति बताती है कि आर्थिक दबाव और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर असंतोष कई देशों में एक साथ उभर रहा है।
राजनीति से आगे बढ़ता संकट
अल्बानिया में भ्रष्टाचार और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं। स्पेन में शिक्षकों ने वेतन और कामकाजी परिस्थितियों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की।
इन घटनाओं के कारण अलग-अलग हैं, लेकिन इनमें युवाओं की आर्थिक असुरक्षा और संस्थाओं से निराशा जैसी समान चिंताएं दिखाई देती हैं। इन प्रदर्शनों को केवल राजनीतिक विरोध कहकर समझना अधूरा होगा। इनके पीछे शिक्षा, रोजगार, आवास और जीवनयापन की लागत जैसे ठोस सवाल हैं।

