
नेपाल में बाढ़ का कहर, पुल-घर बहे; कई लोग लापता
बुधवार सुबह करीब भोते कोशी नदी में बाढ़ का पानी तेज़ी से बढ़ा; बताया जा रहा है कि यह पानी तिब्बत की तरफ से आया था।
उत्तरी नेपाल में बुधवार सुबह भोटे कोशी नदी में अचानक आई ज़बरदस्त बाढ़ बाढ़ से सड़कों और बिजली के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और नदी के बहाव की दिशा में पड़ने वाले कई ज़िलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कम से कम 8 लोगों की मौत हुई है। हालांकि यह आंकड़ा बढ़ने की आशंका है।
GLOF की आशंका
सुबह करीब 9 बजे (स्थानीय समय) भोते कोशी नदी में बाढ़ का पानी तेज़ी से बढ़ा; बताया जा रहा है कि यह पानी तिब्बत की तरफ से आया था।
हालांकि बाढ़ की वजह अभी पक्के तौर पर पता नहीं चली है, लेकिन कहा जा रहा है कि तिब्बत में ग्लेशियर पिघलने से नदी में पानी का बहाव अचानक बढ़ गया। अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या यह अचानक आई बाढ़ (flash floods) ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की वजह से हुई है या फिर भूस्खलन (landslide) के कारण रास्ते में रुकावट आने से ऐसा हुआ है।
कोशी नदी, जो तिब्बत से निकलती है, नेपाल में त्रिशूली नदी से मिल जाती है। भारत में यह गंडक नदी के रूप में प्रवेश करती है।
पुल और घर बह गए
नेपाल सेना ने एक बयान में कहा कि पानी के अचानक बढ़ने से रसुवा ज़िले के तिमुरे और पास के स्याफ्रुबेसी इलाके में भारी तबाही हुई; बाढ़ के पानी में गाड़ियां, सामान और दूसरी संपत्तियाँ बह गईं।
काठमांडू के उत्तर-पूर्व में और तिब्बत सीमा से लगभग 125 किलोमीटर दूर स्थित रसुवा ज़िले की आबादी 50,000 है।
रसुवा के मुख्य कस्टम अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने बताया कि कस्टम परिसर में रखी कई गाड़ियाँ और सामान बह गए। हाल ही में बना एक पुल भी नष्ट हो गया।
8 लोगों की मौत, 100 भारतीय लापता
AFP ने पुलिस प्रवक्ता एबी नारायण काफ्ले के हवाले से बताया कि अब तक आठ शव मिल चुके हैं और बचाव अभियान जारी है।
खबरों के मुताबिक, रसुवा में नेपाल पुलिस के 26 जवान और आर्म्ड पुलिस फोर्स के सात जवान लापता हैं।
खबरों में यह भी कहा गया है कि बाढ़ के बाद 100 से ज़्यादा भारतीय लापता हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार के नेपाल से सटे इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है।
खबरों के मुताबिक, नेपाल सेना ने बुधवार दोपहर तक कम से कम 25 लोगों को बचाया है।
रॉयटर्स ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि बचाव कार्यों के लिए हेलीकॉप्टर तैनात किए गए थे, लेकिन स्याप्रु बेसी और तिमुरे में पानी का स्तर इतना ज़्यादा था कि वे वहाँ उतर नहीं पाए; ये इलाके बाढ़ से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं।
अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है।
राहत के उपाय जारी
नेपाल के नेशनल डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRM) ने एक बयान जारी कर रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन और गोरखा में नदियों के किनारे रहने वाले लोगों से कहा है कि वे हाई अलर्ट पर रहें और अगली सूचना तक सुरक्षा के उपाय अपनाएं।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है कि विनाशकारी बाढ़ को देखते हुए बचाव और राहत कार्यों में तेज़ी लाने के लिए रसुवा और आस-पास के इलाकों में नेपाल सेना, आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स और नेपाल पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, बाढ़ के बाद की स्थिति पर चर्चा करने और उससे निपटने के लिए ज़रूरी कदम उठाने के लिए एक हाई-लेवल मीटिंग बुलाई जा रही है।
नेपाल सेना ने खोज और बचाव कार्य के लिए त्रिशूली नदी के पास के इलाकों में पहले ही दो हेलीकॉप्टर भेज दिए हैं। सेना ने एक बयान में कहा कि इमरजेंसी मेडिकल रेस्क्यू टीम से लैस सेना का एक हेलीकॉप्टर (MI 17) त्रिशूली के ज़िला अस्पताल के लिए रवाना हो चुका है।
हालांकि, नेपाल सेना ने कहा कि विनाशकारी बाढ़ से हुए नुकसान की जानकारी अभी आनी बाकी है, क्योंकि नुकसान से जुड़ा डेटा इकट्ठा करने का काम चल रहा है।
तिब्बत की तरफ़ नुकसान
चीनी सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, तिब्बत की तरफ़ भी "बड़े पैमाने पर नुकसान" और लोगों के हताहत होने की खबर है। बाढ़ के बाद ग्यिरोंग पोर्ट पर कई लोगों के लापता होने की बात कही जा रही है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बाढ़ से ग्यिरोंग काउंटी में सड़कों, कम्युनिकेशन और बिजली सप्लाई को काफ़ी नुकसान पहुँचा है। यह इलाका चीन और नेपाल के बीच सीमा पार करने का एक अहम ज़रिया है।
हालात को देखते हुए, चीन के प्रधानमंत्री शी जिनपिंग ने लापता लोगों को खोजने के लिए बड़े पैमाने पर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने का आदेश दिया है। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए अर्ली-वॉर्निंग सिस्टम (समय से पहले चेतावनी देने वाले सिस्टम) को मज़बूत किया जाए।
पहले आई बाढ़
सिर्फ़ एक साल पहले, भोटेकोशी में दो बार भयानक बाढ़ आई थी, जिससे रसुवा में भारी तबाही मची थी और कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई थी।
यह बाढ़ एक ऐसी 'सुप्राग्लेशियल' झील (ग्लेशियर के ऊपर बनी झील) के अचानक खाली होने की वजह से आई थी, जिस पर पहले किसी का ध्यान नहीं गया था। हाइड्रोलॉजी और मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, बुधवार को आई बाढ़ रसुवा में बारिश की वजह से नहीं आई थी।

