
Ground Report: सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से जबरन उठाया, पुलिसिया कार्रवाई के बाद भड़के छात्र संगठन
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने धरना स्थल से हटा दिया। पुलिसकर्मियों ने मंच के चारों तरफ सफेद चादर तान दी, ताकि कोई मोबाइल या कैमरे से रिकॉर्डिंग न कर सके।
18 जुलाई की सुबह दिल्ली का जंतर-मंतर सामान्य दिनों जैसा नहीं था। रातभर हलचल बनी हुई थी, लेकिन सुबह होते-होते अचानक पुलिस की गतिविधियां तेज हो गईं। कुछ ही मिनटों में वहां मौजूद लोगों को एहसास हो गया कि कुछ बड़ा होने वाला है। देखते ही देखते सिविल ड्रेस में मौजूद कुछ पुलिसकर्मी उस मंच की ओर बढ़े, जहां पिछले 21 दिनों से मशहूर शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक आमरण अनशन पर बैठे थे।
मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, मंच के चारों ओर सफेद चादर लगा दी गई, ताकि कैमरों और मोबाइल फोन की नजर वहां तक न पहुंच सके। कुछ ही देर बाद पुलिसकर्मी सोनम वांगचुक को मंच से नीचे लाते दिखाई दिए। उन्होंने हाथ उठाकर वहां मौजूद लोगों की ओर इशारा किया और फिर उन्हें एंबुलेंस में बैठाकर सीधे सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। पूरी कार्रवाई कुछ ही मिनटों में पूरी हो गई।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह कदम दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी और डॉक्टरों की सलाह के आधार पर उठाया गया। पुलिस के मुताबिक, वांगचुक की लगातार बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाना जरूरी था। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह आंदोलन को कमजोर करने की सोची-समझी कोशिश थी।
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने और सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के अनशन पर बैठने के ऐलान के बीच द फेडरल देश की टीम ने जंतर-मंतर का दौरा किया।
आंदोलन में शामिल समीर ने द फेडरल देश से कहा, "जिस समय दिल्ली पुलिस सोनम वांगचुक को मंच से उठा रही थी, मैं वहीं मौजूद था। पुलिस ने लोगों के साथ बदसलूकी की। आप ही बताइए, सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना क्या गुनाह है? क्या शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा नहीं देना चाहिए? सवाल सिर्फ एक मंत्री के इस्तीफे का नहीं है। सवाल यह है कि खुद को 'प्रधान सेवक' कहने वाले प्रधानमंत्री इस पूरे मामले पर चुप क्यों हैं?" जब उनसे पूछा गया कि अभिजीत दीपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की भी मांग कर रहे हैं, क्या वे भी इससे सहमत हैं? इस पर समीर ने कहा, "हां, उन्हें भी इस्तीफा देना चाहिए।"
समीर की बात को आगे बढ़ाते हुए आंदोलनकारी आकाश ने कहा, "पिछले 12 वर्षों में सरकार लगातार कहती रही कि नीट परीक्षा पूरी तरह पारदर्शी होगी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 2024 में भी कहा था कि परीक्षा बेदाग तरीके से कराई जाएगी। लेकिन 2026 में क्या हुआ? 20 से ज्यादा प्रतियोगी छात्रों ने आत्महत्या कर ली। उनकी जिंदगी कौन लौटाएगा? उनके परिवारों का दुख कौन दूर करेगा? शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। और अगर इतना बड़ा मामला सामने आया है तो प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।"
इसी दौरान द फेडरल देश की टीम ने देखा कि एसएफआई और एआईएसएफ के कार्यकर्ता भी सीजेपी के आंदोलन के समर्थन में मौजूद थे। जंतर-मंतर पर "इंकलाब जिंदाबाद" और "तानाशाही नहीं चलेगी" के नारे लगातार गूंज रहे थे। प्रदर्शनकारी संसद तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे।
एम.एससी. की छात्रा सारिका ने कहा,"सवाल यह नहीं है कि विरोध कौन कर रहा है या किसके खिलाफ हो रहा है। असली मुद्दा देश के युवाओं का भविष्य है। अगर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा तो लोग विरोध जरूर करेंगे। सामान्य वर्ग हो, पिछड़ा वर्ग हो या अनुसूचित जाति का परिवार—हर माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए सालों मेहनत करते हैं। अगर पेपर लीक की वजह से उनकी एक साल की मेहनत बर्बाद हो जाए, तो उन पर क्या गुजरती होगी? सरकार कहती है कि व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित है, फिर बार-बार पेपर लीक कैसे हो जाता है? इसलिए हमारी मांग है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें।"
20 दिन का अनशन और बढ़ता दबाव
सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में भी एक याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जाए और उन्हें जरूरी चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई जाए।इसी बीच, शुक्रवार को दिल्ली पुलिस में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ। पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा की जगह अनुराग कुमार ने नए पुलिस आयुक्त का कार्यभार संभाला। इसके अगले ही दिन सुबह यह कार्रवाई हुई। यही वजह है कि इसकी टाइमिंग को लेकर भी राजनीतिक चर्चा तेज हो गई।
पुलिस की कार्रवाई पर आंदोलनकारी मोहन ने द फेडरल देश से कहा,"अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के साथ पुलिस ऐसा व्यवहार करेगी तो लोकतंत्र का क्या होगा? 60 साल के सोनम वांगचुक सरकार और पुलिस को खतरा लगने लगे। सच यह है कि सरकार अपनी नाकामी छिपाने की कोशिश कर रही है। लेकिन इससे सीजेपी या दूसरे संगठनों का हौसला कमजोर नहीं होगा। हम नीट के छात्रों के समर्थन में और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेंगे।"
सफदरजंग अस्पताल में निगरानी
पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाए जाने के बाद सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक शुरुआती जांच में उनकी हालत स्थिर पाई गई और उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया। वांगचुक की गीतांजलि आंग्मो ने आरोप लगाया कि उन्हें तुरंत अपने पति से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने प्रशासन से पारदर्शिता बरतने और परिवार को पूरी जानकारी देने की मांग की।उधर, सोनम वांगचुक को हटाए जाने के कुछ ही समय बाद आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया कि आंदोलन खत्म नहीं होगा। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि पुलिस ने धोखे से कार्रवाई की और आंदोलन को कुचलने की कोशिश

