डिप्रेशन, दबाव और खुदकुशी: आईआईटी दिल्ली के हॉस्टल में क्यों घुट रहा है भविष्य?
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डिप्रेशन, दबाव और खुदकुशी: आईआईटी दिल्ली के हॉस्टल में क्यों घुट रहा है भविष्य?

IIT दिल्ली में ऋषिकेश सुसाइड मामले में पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ दर्ज की FIR। 30 महीने में 8 मौतों पर भड़के छात्र, डीन और एचओडी का मांगा इस्तीफा।


IIT Delhi Student Suicide : देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में शुमार आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) के भीतर प्रशासनिक रवैये, मानसिक तनाव और सुरक्षा ढांचे को लेकर भारी बवाल मचा हुआ है। एमएससी फिजिक्स के 31 वर्षीय छात्र ऋषिकेश कुमार की दर्दनाक आत्महत्या के बाद परिसर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है।


इस बीच मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने (Abetment to Suicide) की धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है और जांच तेज कर दी है।

1. घटना का ब्योरा और पुलिसिया जांच का रुख
22 अगस्त की सुबह लगभग 8:30 बजे दिल्ली पुलिस को सुचना मिली कि ऋषिकेश ने आईआईटी दिल्ली परिसर की छठी मंजिल से छलांग लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।

इलाज और डिप्रेशन की हिस्ट्री: दिल्ली पुलिस से हुई बातचीत के आधार पर यह बात सामने आई है कि ऋषिकेश पिछले दो महीनों से दिल्ली के विमहंस (VIMHANS) अस्पताल से डिप्रेशन (अवसाद) का इलाज करा रहे थे। पुलिस का कहना है कि वे इससे पहले एनआईटी राउरकेला में पढ़ाई के दौरान भी डिप्रेशन से जूझ चुके थे। उस दौरान उनके पिता की मौत हो गयी थी।

मां के साथ किराए के कमरे में निवास: डिप्रेशन के चलते उन्हें अकेले न रहने की सलाह दी गई थी, जिसके बाद उनकी मां को बिहार से बुलाया गया था। वे कटवारिया सराय में किराए का कमरा लेकर ऋषिकेश के साथ रह रही थीं ताकि वे कोई गलत कदम न उठा लें।

अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज: दिल्ली पुलिस ने इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि अभी तक प्रशासनिक उत्पीड़न के सीधे और ठोस सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन हर एंगल से मामले की निष्पक्ष जांच जारी है।

2. छात्रों के आरोप: 'बीमारी की हालत में हॉस्टल खाली कराने का दबाव बना जानलेवा'
आईआईटी दिल्ली परिसर के अंदर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का दावा पुलिस की थ्योरी से बिल्कुल अलग है।

प्रशासनिक उत्पीड़न का आरोप: छात्रों का आरोप है कि ऋषिकेश जब गंभीर रूप से बीमार थे, तब उन पर हॉस्टल खाली करने का प्रशासनिक दबाव बनाया गया। बीमारी और लाचारी की स्थिति में हॉस्टल छोड़कर बाहर किराए पर रहने के दबाव ने उनके दिमागी तनाव को कई गुना बढ़ा दिया, जो अंततः इस दुर्घटना का कारण बना।

विक्टिमाइजेशन का डर और ऑन-कैमरा बोलने से परहेज: द फ़ेडरल के संवाददाता ने आईआईटी दिल्ली के बाहर पहुँच कर जब इस घटना पर छात्रों से कैमरे के सामने बात करने का प्रयास किया तो वे व्यक्तिगत रूप से बोलने से बचते दिखे। उनका कहना है कि यह किसी एक छात्र का व्यक्तिगत मुद्दा नहीं बल्कि पूरा सामूहिक (Collective) आंदोलन है। छात्रों को डर है कि अकेले सामने आने पर प्रशासन उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई (Victimization) न कर दे।

सोशल मीडिया से बाहरी दुनिया तक पहुंच: छात्र परिसर के अंदर लगातार धरने पर बैठे हैं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए अंदरूनी वीडियो व तस्वीरें साझा कर बाहरी दुनिया तक अपनी बात पहुंचा रहे हैं।

3. प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें
आईआईटी दिल्ली के छात्र अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं और लगातार कक्षाओं का बहिष्कार कर रहे हैं:

1 करोड़ रुपये का आर्थिक मुआवजा: मृतक ऋषिकेश कुमार के पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति दी जाए।

जिम्मेदार अधिकारियों का इस्तीफा: हॉस्टल खाली कराने और मानसिक दबाव बनाने के आरोपी एसोसिएट डीन तथा फिजिक्स विभागाध्यक्ष (HOD) तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।

कार्रवाई न करने का आश्वासन: आंदोलन में हिस्सा ले रहे किसी भी छात्र के खिलाफ प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई न करने का लिखित भरोसा दिया जाए।

4. 30 महीनों में 8 आत्महत्याएं: जांच समिति पर अविश्वास
आईआईटी दिल्ली परिसर में पिछले 30 महीनों (ढाई साल) के भीतर 8 अलग-अलग छात्रों द्वारा खुदकुशी किया जाना पूरे संस्थान के शैक्षणिक और मानसिक स्वास्थ्य तंत्र की नाकामी को उजागर करता है।

अशोक कुमार समिति का गठन: बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए आईआईटी प्रशासन ने उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी अशोक कुमार की अध्यक्षता में एक बाहरी जांच समिति गठित करने का ऐलान किया है।

छात्र प्रतिनिधित्व की मांग: आंदोलनकारी छात्रों ने इस समिति की संरचना को खारिज किया है। छात्रों की मांग है कि जब तक इस कमेटी में छात्रों के निष्पक्ष व विश्वसनीय प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक जांच में पारदर्शिता और जवाबदेही संभव नहीं है।

5. कक्षाओं का बहिष्कार और प्रशासनिक चुप्पी
आईआईटी दिल्ली प्रशासन औपचारिक तौर पर कैमरे के सामने आने से लगातार बच रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 24 अगस्त को संस्थान की सभी नियमित कक्षाएं स्थगित कर दी गई थीं। हालांकि, 25 अगस्त को त्योहार की छुट्टी के बावजूद परिसर के भीतर छात्रों का प्रदर्शन और नारेबाजी जारी रही।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दिल्ली पुलिस की एफआईआर और जांच समिति का गठन पीड़ित परिवार को न्याय दिला पाएगा? और क्या आईआईटी प्रशासन छात्रों की मांगें मानकर परिसर में ऐसा माहौल बना पाएगा जिससे भविष्य में किसी और छात्र को मानसिक तनाव के कारण अपनी जान न गंवानी पड़े?


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