
द्रौपदी मुर्मू से मिले 10 विपक्षी नेता, राहुल गांधी का दावा, 'राष्ट्रपति ने नहीं नकारी वोट चोरी, मांगे सबूत!'
INDIA गठबंधन के 10 प्रमुख विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर (SIR) और कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ अब विपक्षी दलों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। इसी सिलसिले में INDIA गठबंधन के 10 दिग्गज नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल सीधे देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने पहुंचा। आइए जानते हैं कि इस मुलाकात में क्या-क्या हुआ और विपक्ष ने सरकार तथा चुनाव आयोग पर कौन-से गंभीर आरोप लगाए हैं।
राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा विपक्ष का गुस्सा
राष्ट्रपति से मुलाकात करने वाले इस प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी से राजीव राय, आरजेडी से मनोज झा, लेफ्ट के नेताओं में डी राजा, एमए बेबी, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला और वीസികु प्रमुख थोल तिरुमावलवन समेत कई बड़े विपक्षी चेहरे शामिल रहे।
राष्ट्रपति से मिलने से ठीक पहले इन सभी नेताओं ने पुरानी संसद भवन के सेंट्रल हॉल में एक अहम बैठक की। इस बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा की गई कि राष्ट्रपति के सामने अपनी बात को कितनी मजबूती से रखना है। इसके बाद सभी नेता राष्ट्रपति भवन पहुंचे और वहां एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
राहुल गांधी का बड़ा दावा: “वोट चोरी से इनकार नहीं किया”
मुकात के बाद कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मीडिया के सामने बेहद चौंकाने वाले और गंभीर दावे किए। राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि शायद भारत की राष्ट्रपति इस बात से इनकार करेंगी कि देश में ‘वोट चोरी’ जैसी कोई चीज हो रही है। उन्हें लगा था कि राष्ट्रपति यह कहेंगी कि देश में पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रणाली काम कर रही है।
लेकिन राहुल गांधी ने कहा, “मैं हैरान और दंग रह गया कि भारत की राष्ट्रपति ने हमारी बातें सुनीं और वोट चोरी की बात को नकारा नहीं।” राहुल गांधी का दावा है कि राष्ट्रपति ने विपक्ष से वोट चोरी से जुड़े सबूत मांगे हैं। उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस कथित वोट चोरी का सूत्रधार बताया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इसे जमीन पर लागू करने वाला करार दिया। राहुल गांधी ने यह भी घोषणा की कि विपक्ष इस मामले को यहीं नहीं छोड़ेगा, बल्कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को भी एक ज्ञापन सौंपा जाएगा।
मल्लिकार्जुन खरगे बोले- बैलेट पेपर से हों चुनाव
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी राष्ट्रपति के साथ हुई बैठक के बारे में मीडिया को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने देश में हो रही कथित वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
खरगे ने कहा कि आज देश के लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है, इसलिए विपक्ष ने मांग की है कि ईवीएम (EVM) को पूरी तरह अलग रखकर एक बार फिर से बैलेट पेपर यानी मतपत्रों के जरिए चुनाव कराए जाने चाहिए। मल्लिकार्जुन खरगे के अनुसार, राष्ट्रपति ने विपक्ष की बातें बहुत ध्यान से सुनीं, उन्हें आश्वासन दिया कि इस पूरे मामले की जांच की जाएगी, संबंधित पक्षों से सलाह ली जाएगी और उचित कदम उठाने पर विचार किया जाएगा।
ममता बनर्जी ने दिखाई एकजुटता
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस मुलाकात के बाद अपनी बात रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि INDIA गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और विपक्ष की आवाज देश के आम आदमी की आवाज है। ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंप दिया है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस पर एक सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो विपक्ष की तरफ से इस मामले से जुड़े और भी पुख्ता सबूत और तथ्य राष्ट्रपति के सामने पेश किए जाएंगे ताकि लोकतंत्र की रक्षा की जा सके।
प्रियंका गांधी का सरकार पर तीखा हमला
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मी काफी तेज थी। प्रदर्शनों और सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर दिल्ली में कई मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया था। इस पर कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने के फैसले की आलोचना करते हुए सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा। प्रियंका गांधी ने कहा, "इसको डर कहते हैं, इसको कायरता कहते हैं, इसको भय कहते हैं।" उनका कहना था कि सरकार जनता की आवाज और विरोध प्रदर्शनों से डर गई है, इसलिए ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं।
फिलहाल, चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और वोट चोरी जैसे गंभीर आरोपों को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। एक तरफ जहां विपक्ष लामबंद होकर लगातार सरकार और चुनाव आयोग को घेर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में जाने के फैसले ने इस विवाद को और बड़ा बना दिया है। देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में चुनाव आयोग या सरकार की तरफ से इन गंभीर आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और इस राजनीतिक घमासान का क्या असर देश की राजनीति पर पड़ता है।

