
होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमला, भारत ने ईरानी राजनयिक को किया तलब
हमले का शिकार हुए जहाजों पर सवार थे 30 भारतीय नाविक, एक की मौत और 10 घायल, विदेश मंत्रालय ने कहा- अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर असुरक्षा तुरंत रुके।
Strait Of Hormuz: पश्चिम एशिया में जारी भीषण अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच होर्मुज स्ट्रेट में दो व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों को लेकर भारत ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के उप प्रमुख (डिप्टी चीफ ऑफ मिशन) को मुख्यालय तलब कर भारत का कड़ा विरोध और निंदा दर्ज कराई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर इस तरह के हमले तुरंत बंद होने चाहिए। भारत ने साफ किया है कि दुनियाभर के लोगों की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के जहाजों की आवाजाही हर हाल में बहाल रहनी चाहिए।
हमले में 1 भारतीय नाविक की मौत, 10 घायल विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, ईरान के इस हालिया हमले का शिकार यूएई (UAE) के दो तेल टैंकर—'एमटी अल बहियाह' और 'एमटी मोंबासा' बने हैं। इन दोनों व्यावसायिक जहाजों के कुल 46 चालक दल के सदस्यों में से 30 भारतीय नाविक शामिल थे। इस बर्बर हमले में एमटी अल बहियाह पर सवार 12 भारतीयों में से एक नाविक की मौत हो गई, जबकि एक अन्य घायल हुआ है। वहीं, एमटी मोंबासा पर मौजूद 18 भारतीयों में से 9 नाविक गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें से 2 की हालत नाजुक बताई जा रही है। भारत ने मृतक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।
फारस की खाड़ी में फंसे 148 भारतीय नाविक होर्मुज स्ट्रेट में जारी इस युद्ध और तनाव के बीच भारत से जुड़े 11 बड़े जहाज और 148 भारतीय नाविक फिलहाल फारस की खाड़ी में ही फंसे हुए हैं। ये सभी जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित गुजरने का इंतजार कर रहे हैं। सरकार ने निकासी के लिए जिन 11 जहाजों की पहचान की है, उनमें 7 भारतीय ध्वज वाले जहाज (कंटेनर, क्रूड ऑयल टैंकर, केमिकल टैंकर, बल्क कैरियर और ड्रेजर) शामिल हैं, जबकि 4 भारत के लिए जरूरी उर्वरक (फर्टिलाइजर) लेकर आने वाले विदेशी जहाज हैं। सरकार ने भारतीय नौसेना के साथ मिलकर 24x7 एक्टिव कंट्रोल रूम स्थापित किया है, जो पल-पल की स्थिति पर नजर रख रहा है।
डोनाल्ड ट्रम्प के 'सुरक्षा टोल टैक्स' पर मचा बवाल इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक ताजा ऐलान ने वैश्विक शिपिंग इंडस्ट्री में खलबली मचा दी है। ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा होर्मुज स्ट्रेट का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में लेने के बाद, वहां से गुजरने वाले हर व्यावसायिक कार्गो के मूल्य पर 20% का 'सुरक्षा शुल्क' वसूला जाएगा। ट्रम्प की इस योजना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने इसे सरेआम 'समुद्री डकैती' करार दिया है। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तंज कसते हुए कहा कि सुरक्षा के बदले शुल्क वसूलना तो जायज है, लेकिन 20 प्रतिशत बहुत ज्यादा है, ईरान हमेशा से उचित शुल्क पर सुरक्षा देता आया है।
200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है कच्चा तेल अमेरिका द्वारा ईरान के बुशहर, चाबहार, जास्क और बंदर अब्बास जैसे तटीय सैन्य ठिकानों पर की गई 5 घंटे की भारी बमबारी के बाद होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही घटकर अपने सबसे निचले स्तर (महज 10 जहाज प्रतिदिन) पर आ गई है। इससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 86 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। एक्सपर्ट्स और हूती विद्रोहियों के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने होर्मुज के साथ-साथ रेड सी के एंट्री पॉइंट 'बाब अल-मंदेब स्ट्रेट' की भी नाकेबंदी कर दी, तो दुनिया भर में ऊर्जा का अभूतपूर्व संकट खड़ा हो जाएगा और कच्चे तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक उछल सकती हैं।

