ईरान ने तोड़ा अमेरिका से समझौता, मुजतबा बोले- ट्रंप के दस्तखत रद्दी
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ईरान ने तोड़ा अमेरिका से समझौता, मुजतबा बोले- ट्रंप के दस्तखत रद्दी

खाड़ी में भीषण युद्ध की आहट; 7 दिन से जारी अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने डील की सस्पेंड, जलते जलमार्ग से दुनिया में तेल संकट गहराया।


Iran Vs USA: मध्य पूर्व (Middle East) से आ रही बेहद सनसनीखेज खबर के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच पिछले महीने हुआ बहुप्रतीक्षित अंतरिम समझौता पूरी तरह से टूट गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुजताबा खामेनेई ने शनिवार को एक बेहद आक्रामक बयान जारी करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा समझौते पर किए गए हस्ताक्षरों को "बेकार और अमान्य" करार दिया है। ईरान का यह सख्त फैसला अमेरिका द्वारा समझौते के लगातार किए जा रहे उल्लंघनों और खाड़ी क्षेत्र में जारी भीषण बमबारी के बाद आया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे संवेदनशील रूट 'स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज़' (Strait of Hormuz) में युद्ध की लपटें और तेज हो गई हैं।


50 मौतें और लगातार 7 रातों से अमेरिकी बमबारी
ईरान के उप-विदेश मंत्री काज़ेम गारीबाबादी ने सरकारी टेलीविजन पर आधिकारिक एलान करते हुए कहा कि अमेरिका द्वारा समझौते को तार-तार किए जाने के बाद अब ईरान इस अंतरिम डील के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरी तरह सस्पेंड कर रहा है। दरअसल, यह फैसला तब लिया गया जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने लगातार सातवीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर विनाशकारी हवाई हमले किए। इस महीने अमेरिकी हमलों में अब तक 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 500 से अधिक लोग घायल हैं। अमेरिकी सेना का दावा है कि उसके हमलों ने ईरान के निगरानी केंद्रों, अंडरग्राउंड हथियार डिपो और समुद्री युद्धक क्षमताओं को निशाना बनाया है।

खामेनेई की खुली धमकी: 'शैतान' अमेरिका को सिखाएंगे कभी न भूलने वाला सबक
समझौता टूटने के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता मुजताबा खामेनेई ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर सीधे तौर पर अमेरिका को 'शैतान' संबोधित करते हुए तबाही मचाने की खुली चेतावनी दी है। खामेनेई ने कहा, "अब जब अमेरिकी दुश्मन युद्ध भड़काने और संघर्ष को बढ़ाने पर आमादा है, तो उसे इसके बेहद गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। अमेरिकी हुक्मरान जान लें कि गौरवान्वित ईरानी राष्ट्र और उसका 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' उन्हें ऐसा सबक सिखाने के लिए तैयार है जिसे वे कभी भूल नहीं पाएंगे।" उन्होंने अमेरिका को क्रूर, धोखेबाज और पूरी तरह अविश्वसनीय करार दिया।

भारत समेत दुनिया पर मंडराया कच्चे तेल का महा-संकट
स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज़ में भड़की इस जंग ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक बार फिर रेड अलर्ट पर डाल दिया है। यह वही समुद्री जलमार्ग है जहां से दुनिया के कुल कच्चे तेल का पांचवां (1/5th) हिस्सा गुजरता है। इस इलाके में जारी भीषण जंग से न सिर्फ आम नागरिक और पेयजल के लिए बने डिसेलिनेशन प्लांट खतरे में हैं, बल्कि कच्चे तेल की कीमतें भी आसमान छूने लगी हैं। यदि यह सप्लाई रूट पूरी तरह ठप हुआ, तो ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भारत के लिए स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए इसी रूट पर काफी हद तक निर्भर है। अमेरिकी पाबंदियों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर भारतीय बाजारों पर दिखना तय माना जा रहा है।


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