
जंतर-मंतर पर धरना बंद! SIR विवाद के बीच दिल्ली में बदला आंदोलन का ठिकाना
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाकर तीन नए स्थान तय किए हैं, जिससे शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और प्रशासनिक पाबंदियों पर सवाल उठ रहे हैं।
नई दिल्ली: देश की राजधानी में विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा जंतर-मंतर अब आधिकारिक धरना स्थल नहीं होगा। दिल्ली पुलिस ने इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों का आंदोलन तेज है।
प्रदर्शन के लिए तीन नए स्थान तय
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर को जारी आदेश में तीन नए प्रदर्शन स्थलों को मंजूरी दी है। इनमें मध्य दिल्ली का रामलीला मैदान, उत्तरी दिल्ली का बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड शामिल हैं।
यह फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय की गठित समिति की सिफारिशों पर लिया गया है। आदेश के मुताबिक, इन स्थानों पर धरना-प्रदर्शन आयोजित करने के लिए संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अलग से जारी की जाएगी। इससे अप्रैल 2022 के पुराने आदेश में आंशिक बदलाव हुआ है।
SIR विवाद के बीच फैसला
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का फैसला राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले कई दिनों से दिल्ली में SIR के खिलाफ लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर पात्र नागरिकों के नाम हटाए गए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग और भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हैं।
कांग्रेस और INDIA गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में युवा प्रदर्शनकारी भी आंदोलन कर रहे हैं। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था।
विरोध की आवाज पर क्या होगा असर?
जंतर-मंतर दशकों से किसानों, छात्रों, कर्मचारियों और राजनीतिक संगठनों के आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। संसद और केंद्रीय सत्ता प्रतिष्ठानों के नजदीक होने के कारण यहां होने वाले प्रदर्शनों का विशेष राजनीतिक महत्व रहा है।
अब प्रदर्शनकारियों को नए निर्धारित स्थलों और अनुमति संबंधी नियमों का पालन करना होगा। इस बदलाव ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और सुरक्षा व्यवस्था के बीच संतुलन का सवाल फिर सामने ला दिया है।

