
BJP का झारखंड बंद, छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सियासी संग्राम
JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच पुलिस कार्रवाई के विरोध में BJP ने झारखंड बंद बुलाया है। जानें ताजा हालात।
Jharkhand Bandh: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब राजनीतिक टकराव में बदलता दिख रहा है। सोमवार (10 अगस्त) को रांची में विधानसभा घेराव के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुए टकराव के बाद भारतीय जनता पार्टी ने मंगलवार, 11 अगस्त को पूरे झारखंड में बंद का आह्वान किया। बंद का असर राजधानी रांची समेत राज्य के कई हिस्सों में देखने को मिला। कई जगह स्कूल और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे, जबकि सड़कों पर वाहनों की आवाजाही भी सामान्य से काफी कम रही।
दरअसल, भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पारदर्शिता की मांग को लेकर हजारों छात्र सोमवार को विधानसभा की ओर मार्च कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने रास्ते में लगाए गए कई बैरिकेड तोड़ दिए, जिसके बाद पुलिस के साथ टकराव की स्थिति बनी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पानी की बौछार, आंसू गैस और लाठी का इस्तेमाल किया। कई प्रदर्शनकारियों ने घायल होने का दावा किया है, जबकि रांची पुलिस के मुताबिक झड़प में 14 पुलिसकर्मी भी घायल हुए।
बीजेपी ने पुलिस कार्रवाई को बनाया मुद्दा
इसी पुलिस कार्रवाई को मुद्दा बनाकर बीजेपी ने राज्यव्यापी बंद का ऐलान किया। पार्टी ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने और उनकी मांगों का समाधान बातचीत से करने के बजाय बल प्रयोग करने का आरोप लगाया है। बीजेपी ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग का भी समर्थन किया है। पार्टी का कहना है कि JPSC और JSSC की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों का निष्पक्ष तरीके से समाधान होना चाहिए।
छात्रों की मांगें
उधर, छात्र पिछले 25 जुलाई से भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, JPSC-JSSC की कार्यप्रणाली में सुधार, कुछ परीक्षाओं को रद्द करने और स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी CBI जांच या झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों की समिति से जांच कराने की मांग भी कर रहे हैं।
फिलहाल झारखंड में मामला केवल भर्ती परीक्षाओं तक सीमित नहीं रह गया है। छात्र संगठनों की नाराजगी, पुलिस कार्रवाई और BJP के बंद ने सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारी अभ्यर्थियों के बीच बातचीत होती है या आंदोलन और तेज होता है, इस पर सभी की नजर है।

