
JSSC-CGL विवाद: SC के फैसले के बाद भी नौकरी छीनी, रो पड़े चयनित अभ्यर्थी
झारखंड सरकार द्वारा JSSC-CGL 2024 परीक्षा रद्द करने के बाद चयनित 2,000 कर्मचारियों पर संकट। रांची में सचिवालय के बाहर रो पड़े अभ्यर्थी, कानूनी लड़ाई की तैयारी।
Jharkhand Protest: झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा सोमवार को JSSC-CGL (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग संयुक्त स्नातक स्तरीय) परीक्षा 2024 सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले ने राज्य में नया और गंभीर प्रशासनिक संकट खड़ा कर दिया है। एक तरफ जहां महीने भर से धांधली के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों में खुशी की लहर है, वहीं दूसरी तरफ JSSC-CGL 2024 के जरिए चयनित होकर विभागों में तैनात हो चुके लगभग 2,000 कर्मचारियों के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
"हाथ में नियुक्ति पत्र दिया और अब नौकरी छीन ली"
चयनित अभ्यर्थियों ने भारी बारिश के बीच रांची में झारखंड सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। अपनी पुरानी सरकारी नौकरियां छोड़कर यहां जॉइन करने वाले अभ्यर्थियों का दर्द छलक पड़ा है:
रघुवेंद्र (चतरा/सचिवालय कर्मी): पहले गया में सोशल साइंस के शिक्षक थे। सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी 2026 के फैसले के बाद 8 जनवरी को पुरानी नौकरी से इस्तीफा दिया। अब वे ओवरएज (आयु सीमा पार) हो चुके हैं और उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा।
संदीप यादव (कोडरमा/सतर्कता विभाग): प्रोजेक्ट भवन स्थित अपने कार्यालय पहुंचे तो गार्ड ने कार्ड देखकर अंदर जाने से रोक दिया। महज दो महीने पहले शादी हुई थी और अब नौकरी जाने से वैवाहिक जीवन पर संकट गहरा गया है।
ललन पांडेय (देवघर/सहायक अनुभाग अधिकारी): जमशेदपुर में तैनात थे। घर के अकेले कमाने वाले हैं, दो छोटे बच्चे हैं और उम्र बीत जाने के कारण अब नई परीक्षा नहीं दे सकते।
गुंजन सिंह (पूर्व रेलवे कर्मचारी): घर वापसी के लिए आसनसोल डिवीजन की रेलवे नौकरी छोड़ी थी। उनका कहना है कि वे किसी भी जांच और नार्को टेस्ट के लिए तैयार हैं।
विवादों में रही JSSC-CGL 2024 परीक्षा और कानूनी मोड़
JSSC-CGL 2024 की पूरी भर्ती प्रक्रिया शुरुआत से ही विवादों के साए में रही है:
जनवरी 2024: पहली बार परीक्षा आयोजित हुई, लेकिन पेपर लीक होने के कारण इसे तुरंत रद्द करना पड़ा।
सितंबर 2024: दोबारा परीक्षा हुई, लेकिन फिर से धांधली के गंभीर आरोप लगे।
CID जांच की रिपोर्ट: जांच में खुलासा हुआ कि अभ्यर्थियों को हजारीबाग, बोकारो, आसनसोल और नेपाल ले जाकर 150 में से 120 प्रश्नों के उत्तर रटवाए गए थे।
अदालती आदेश: दिसंबर 2025 में झारखंड हाईकोर्ट ने संदिग्धों को छोड़कर बाकी अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने का आदेश दिया। इसके बाद जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने भी भर्ती रद्द करने की याचिका खारिज कर दी थी, जिसके आधार पर 1,975 अभ्यर्थियों को जॉइनिंग दी गई थी।
TSR डाटा प्रोसेसिंग एजेंसी (TDPL) पर कार्रवाई की मांग
विपक्षी और आंदोलनरत छात्रों का आरोप है कि बाहरी एजेंसी 'TSR डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड' (TDPL) की गड़बड़ियों के कारण यह संकट पैदा हुआ है। चयनित कर्मचारियों का कहना है कि वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही सेवा में आए थे। अब जब सरकार ने दबाव में आकर पूरी भर्ती रद्द कर दी है, तो वे इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
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