गुटखा-पान मसाले पर कर्नाटक का बड़ा वार, 1 साल तक नहीं बिकेंगे ये उत्पाद
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गुटखा-पान मसाले पर कर्नाटक का बड़ा वार, 1 साल तक नहीं बिकेंगे ये उत्पाद

कर्नाटक में गुटखा और तंबाकू या निकोटीन वाले पान मसाले पर एक साल की रोक लगाई गई है। जानिए प्रतिबंध कब से लागू हुआ और इसके दायरे में क्या-क्या है।


कर्नाटक सरकार ने गुटखा और तंबाकू या निकोटीन वाले पान मसाले के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। राज्य में ऐसे उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। यह प्रतिबंध पूरे कर्नाटक में लागू है और 10 अगस्त 2026 से प्रभावी हुआ है।

हालांकि, इस फैसले को लेकर एक तारीख खास तौर पर ध्यान देने वाली है। प्रतिबंध की अधिसूचना कर्नाटक के खाद्य सुरक्षा आयुक्त के कार्यालय की ओर से 15 जून 2026 को जारी की गई थी। यानी जून में आदेश जारी हुआ, लेकिन इसका मौजूदा एक साल का प्रतिबंध 10 अगस्त से प्रभावी हुआ।

सरकार के आदेश के तहत गुटखा और ऐसे पान मसाले प्रतिबंधित हैं, जिनमें तंबाकू या निकोटीन मौजूद है। रोक केवल दुकानों पर बिक्री तक सीमित नहीं है। इन उत्पादों के निर्माण से लेकर उनके भंडारण, परिवहन और वितरण तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला को प्रतिबंध के दायरे में रखा गया है।

इस फैसले का एक अहम पहलू यह भी है कि नियमों से बचने के लिए तंबाकू और पान मसाले को अलग-अलग पैकेट में बेचने की व्यवस्था पर भी सरकार ने नजर रखी है। यानी अगर अलग-अलग उत्पादों को इस तरह बेचा जाता है कि उन्हें मिलाकर तंबाकू या निकोटीन वाला प्रतिबंधित उत्पाद तैयार किया जा सके, तो ऐसे मामलों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है।

सरकार ने यह फैसला खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया है। कर्नाटक में पहले भी तंबाकू और निकोटीन वाले चबाने योग्य उत्पादों को लेकर प्रतिबंध लागू रहे हैं। नए आदेश के जरिए राज्य सरकार ने इन उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई को और व्यापक बनाया है।

अब सवाल इस प्रतिबंध के प्रभावी अमल का है। सरकार और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के सामने चुनौती यह सुनिश्चित करने की होगी कि प्रतिबंधित उत्पाद बाजार में चोरी-छिपे न बिकें और अलग-अलग उत्पादों की बिक्री के जरिए नियमों को दरकिनार न किया जा सके।

यानी साफ शब्दों में कहें तो कर्नाटक में गुटखा और तंबाकू या निकोटीन वाले पान मसाले पर एक साल की रोक का आदेश जून में जारी हुआ था, लेकिन प्रतिबंध 10 अगस्त 2026 से लागू हुआ है।

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