
परिसीमन बिल पर मल्लिकार्जुन खड़गे का पीएम मोदी को पत्र, सर्वदलीय बैठक की मांग
मानसून सत्र में दोबारा विधेयक लाने की खबरों पर जताया विरोध, विपक्ष के नेता ने कहा- संसद में पेश करने से पहले अध्ययन के लिए मिले पर्याप्त समय।
Mallikarjun Kharge Letter: आगामी संसद के मानसून सत्र से पहले देश की सियासत में एक बार फिर गर्माहट बढ़ गई है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता (LoP) और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बेहद महत्वपूर्ण पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने आगामी मानसून सत्र में परिसीमन (Delimitation) से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को दोबारा पेश किए जाने की मीडिया रिपोर्टों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। खड़गे ने प्रधानमंत्री से इस अति-संवेदनशील और देश के राजनीतिक ढांचे को प्रभावित करने वाले विषय पर बिना किसी देरी के तुरंत एक सर्वदलीय बैठक (All-Party Meeting) बुलाने की पुरजोर मांग की है।
लोकसभा में पहले गिर चुका है 131वां संविधान संशोधन विधेयक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित अपने पत्र में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने पुराने घटनाक्रमों का हवाला दिया है। उन्होंने उल्लेख किया कि इससे पहले मार्च और अप्रैल 2026 में भी उन्होंने तत्कालीन संसदीय कार्य मंत्री को कई बार पत्र लिखे थे। उन पत्रों में लगातार यह मांग की गई थी कि केंद्र सरकार परिसीमन आदि के बड़े प्रस्तावों पर आम सहमति बनाने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाए। हालांकि, सरकार द्वारा विपक्ष के उन अनुरोधों को स्वीकार नहीं किया गया था। इसका परिणाम यह हुआ कि 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई (2/3) बहुमत न मिल पाने के कारण संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 स्पष्ट अंतर से गिर गया था।
मीडिया रिपोर्टों के बाद विपक्ष ने फिर जताई चिंता
खड़गे ने पत्र में लिखा है कि उन्हें विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के जरिए यह इनपुट मिला है कि सरकार आगामी मानसून सत्र के दौरान एक बार फिर से संशोधित रूप में (131वां संशोधन) विधेयक संसद पटल पर दोबारा पेश करने की बड़ी योजना बना रही है। इसी पृष्ठभूमि में कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक बार फिर गंभीर आग्रह किया है कि सरकार परिसीमन पर अपने नए और संशोधित प्रस्तावों को सदन में लाने से पहले सभी दलों के साथ टेबल पर बैठकर चर्चा करे।
प्रस्तावों के अध्ययन के लिए पर्याप्त समय की मांग
सर्वदलीय बैठक बुलाने के साथ-साथ मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्ष की तरफ से एक और बड़ी मांग रखी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि इन संशोधनों और प्रस्तावों को संसद में औपचारिक रूप से पेश करने से पहले विपक्ष के तमाम दलों को इसका विस्तार से और तकनीकी रूप से अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। खड़गे का यह पत्र साफ संकेत देता है कि आगामी मानसून सत्र में परिसीमन के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच एक बार फिर जोरदार विधायी और राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।

