आज से संसद का मॉनसून सत्र , बड़े विधेयकों और सियासी टकराव का मंच तैयार
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आज से संसद का मॉनसून सत्र , बड़े विधेयकों और सियासी टकराव का मंच तैयार

संसद का मॉनसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। FCRA, वंदे मातरम् समेत कई अहम विधेयक पेश होंगे। बदले राजनीतिक समीकरणों के बीच सरकार और विपक्ष दोनों की रणनीति पर नजर रहेगी।


सोमवार से संसद का मॉनसून सत्र शुरू हो रहा है। अप्रैल में समाप्त हुए बजट सत्र के बाद देश की राजनीतिक तस्वीर में बड़े बदलाव आए हैं। विपक्ष चुनावी हार, दल-बदल और इंडिया ब्लॉक में टूट के कारण कमजोर हुआ है, जबकि एनडीए का संख्याबल बढ़ा है। ऐसे में यह सत्र सरकार और विपक्ष दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार के पास कई अहम विधेयकों को आगे बढ़ाने का अवसर है, वहीं विपक्ष जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

सरकार के एजेंडे में प्रमुख विधेयक

सरकार ने मॉनसून सत्र के लिए कई महत्वपूर्ण विधेयकों को सूचीबद्ध किया है, जिनमें शामिल हैं विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA Amendment Bill), आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026, उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विकास (संशोधन) विधेयक, 2026

FCRA संशोधन विधेयक पर सबसे बड़ा टकराव

इस सत्र में सबसे अधिक राजनीतिक विवाद विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक को लेकर होने की संभावना है।

सरकार का पक्ष

सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य विदेशी फंडिंग के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

विपक्ष का आरोप

विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस कानून के जरिए विदेशी सहायता प्राप्त करने वाले एनजीओ और अन्य संगठनों पर नियंत्रण बढ़ाना चाहती है।

'वंदे मातरम् बिल' भी होगा पेश

सरकार राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पेश करेगी, जिसे आम तौर पर 'वंदे मातरम् बिल' कहा जा रहा है।

यदि यह विधेयक पारित हो जाता है तो:'वंदे मातरम्' को राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान की तरह कानूनी संरक्षण मिलेगा।इसके अपमान, गायन या वादन में बाधा डालने अथवा व्यवधान पैदा करने पर तीन वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान हो सकता है।

बदले राजनीतिक समीकरण

इंडिया ब्लॉक को कई झटके

बजट सत्र के बाद विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक को कई राजनीतिक नुकसान उठाने पड़े।

पश्चिम बंगाल

विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) भाजपा से हार गई। इसके बाद पार्टी में अंदरूनी बगावत शुरू हुई। 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह कर दिया। इन सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का ऐलान किया।साथ ही लोकसभा में एनडीए को समर्थन देने की घोषणा की। इसके बाद एनसीपीआई एनडीए का दूसरा सबसे बड़ा सहयोगी दल बन गया।

तमिलनाडु

कांग्रेस और डीएमके का गठबंधन टूट गया।कांग्रेस ने टीवीके (TVK) को समर्थन दे दिया। डीएमके ने कांग्रेस पर विश्वासघात का आरोप लगाते हुए इंडिया ब्लॉक छोड़ दिया। इसके बाद भाजपा ने डीएमके को अपने करीब लाने की कोशिश तेज कर दी।

शिवसेना (यूबीटी)

पार्टी के 9 में से 6 सांसद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए। इससे एनडीए की संख्या और मजबूत हुई।

क्या सरकार फिर लाएगी परिसीमन विधेयक?

सरकार ने फिलहाल परिसीमन से जुड़ा नया संविधान संशोधन विधेयक सूचीबद्ध नहीं किया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बदले हुए समीकरणों के बीच इसे फिर लाया जा सकता है।

लोकसभा का गणित

प्रभावी सदस्य संख्या: 540

संविधान संशोधन के लिए आवश्यक समर्थन: 360 सांसद (दो-तिहाई बहुमत)

पिछली स्थिति

पक्ष में वोट: 298

विरोध में वोट: 230

वर्तमान स्थिति

एनडीए: 293 सांसद

टीएमसी के 20 बागी सांसदों के समर्थन के बाद: 313

शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसद जुड़ने पर: 319

वाईएसआर कांग्रेस के 4 सांसदों के संभावित समर्थन के साथ: 323

अभी भी सरकार को आवश्यक बहुमत तक पहुंचने के लिए लगभग 37 सांसदों के अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी।

किन दलों का समर्थन मिल सकता है?

कुछ विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि उनकी चिंताओं का समाधान होने पर वे विधेयक का समर्थन कर सकते हैं।

एनसीपी (शरद पवार)

सुप्रिया सुले ने कहा कि यदि सभी राज्यों में समान अनुपात में सीटें बढ़ाई जाती हैं तो विरोध का कोई कारण नहीं होगा।

शिवसेना (यूबीटी)

संजय राउत ने कहा कि विपक्ष के सुझावों के अनुसार संशोधन होने पर पार्टी अपने रुख पर पुनर्विचार करेगी।

डीएमके

पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन परिसीमन पर सरकार से और स्पष्टता चाहती है। उसका कहना है कि दक्षिण भारत के राज्यों के हित प्रभावित नहीं होने चाहिए।यदि इन तीनों दलों का समर्थन मिल जाता है तो सरकार का आंकड़ा लगभग 356 सांसदों तक पहुंच सकता है, जो फिर भी आवश्यक दो-तिहाई बहुमत से चार वोट कम होगा।

परिसीमन विधेयक पहले क्यों अटक गया था?

बजट सत्र में सरकार महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन पारित नहीं करा सकी थी। प्रस्ताव में संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 550 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव

विपक्ष की आपत्ति

2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन होने पर दक्षिण भारत की सीटों का अनुपात घटने की आशंका।संघीय ढांचे पर असर पड़ने का आरोप।

सरकार का जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी। महिलाओं के लिए अतिरिक्त सीटें जोड़ने से राज्यों के बीच वर्तमान अनुपात प्रभावित नहीं होगा। सभी राज्यों के साथ समान व्यवहार किया जाएगा।

विपक्ष की रणनीति

विपक्ष इस सत्र में सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की तैयारी कर चुका है।

मुख्य मुद्दे

राम मंदिर चढ़ावा चोरी, नीट पेपर लीक, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग, सोनम वांगचुक का आंदोलन

लोकतांत्रिक संस्थाओं के कामकाज से जुड़े सवाल

सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने टीएमसी के बागी सांसदों को बुलाए जाने का विरोध करते हुए प्रतीकात्मक वॉकआउट भी किया।

लोकसभा में बदली सीटिंग व्यवस्था

मॉनसून सत्र से पहले लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन की सीटिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है।

मुख्य बदलाव

टीएमसी के 20 बागी सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था।

कुल 39 सांसदों के सीट नंबर बदले गए। अभिषेक बनर्जी, पी. वी. मिधुन रेड्डी और हरसिमरत कौर बादल सहित कई सांसदों की सीट बदली गई।

सांसद अब नए डिवीजन नंबर के आधार पर मतदान और अन्य संसदीय कार्य करेंगे।

स्पीकर पहले ही शिवसेना (यूबीटी) के छह बागी सांसदों के शिंदे गुट में विलय को मंजूरी दे चुके हैं। वहीं टीएमसी के बागी सांसदों के एनसीपीआई में विलय पर औपचारिक फैसला भी मॉनसून सत्र के पहले दिन आने की संभावना है।

मॉनसून सत्र ऐसे समय शुरू हो रहा है जब संसद के भीतर राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल चुके हैं। सरकार के सामने महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने का अवसर है, जबकि विपक्ष जनहित और राजनीतिक मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। खासकर FCRA संशोधन, 'वंदे मातरम्' विधेयक और भविष्य में संभावित परिसीमन विधेयक इस सत्र के सबसे चर्चित और विवादित विषय बन सकते हैं।

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