हंगामे की भेंट चढ़ा संसद का मॉनसून सत्र, लोकसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, महज 16% हुआ काम!
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हंगामे की भेंट चढ़ा संसद का मॉनसून सत्र, लोकसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, महज 16% हुआ काम!

संसद का मॉनसून सत्र लगातार हंगामे और विपक्ष-सरकार के बीच तीखे टकराव की भेंट चढ़ गया। लोकसभा को निर्धारित समय के अनुसार अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।


संसद के मॉनसून सत्र का आखिरी दिन हंगामेदार रहा और लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। 20 जुलाई से शुरू हुए इस सत्र में शुरुआत से ही सरकार और विपक्षी दलों के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। गतिरोध इस कदर बढ़ा कि लगभग पूरा सत्र ही हंगामे की बलि चढ़ गया। सत्र के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी सदन में मौजूद रहे, जबकि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की औपचारिक घोषणा की।

किन प्रमुख मुद्दों पर भिड़ा रहा विपक्ष?

मॉनसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने मुख्य रूप से दो बड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरा और सदन में लगातार नारेबाजी की:

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई, लाठीचार्ज और कथित पेलेट गन के इस्तेमाल को लेकर विपक्ष बेहद आक्रामक दिखा। विपक्षी सांसदों ने गृह मंत्री अमित शाह से इस मुद्दे पर सदन में बयान देने और इस्तीफे की मांग की।

अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी: अयोध्या राम मंदिर परिसर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर भी विपक्ष ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा और इस पर तुरंत चर्चा की मांग दोहराई।

उत्पादकता पर पड़ा भारी असर

सत्र के दौरान बार-बार होने वाले हंगामे और स्थगन के कारण विधायी कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ।

प्रश्नकाल और शून्यकाल बाधित: अधिकांश दिनों में प्रश्नकाल और शून्यकाल की कार्यवाही नहीं चल सकी, जिससे जनहित के मुद्दे उठाने का अवसर कम हो गया।

कमजोर उत्पादकता: आंकड़ों के मुताबिक, इस सत्र में लोकसभा में निर्धारित कामकाज का महज करीब 16 प्रतिशत और राज्यसभा में लगभग 31 प्रतिशत ही पूरा हो पाया। संसदीय बहस और सरकार से जवाबदेही तय करने का माहौल लगभग न के बराबर रहा।

हंगामे के बीच पारित हुए कई महत्वपूर्ण विधेयक

विपक्ष के लगातार विरोध और नारेबाजी के बावजूद सरकार ने अपने बहुमत के बल पर कई प्रमुख विधेयकों को सदन से पारित करवा लिया। इनमें से अधिकांश बिल बिना किसी विस्तृत चर्चा के ध्वनिमत से पास हुए। पारित होने वाले प्रमुख विधेयकों में शामिल हैं:

एंटी-पेपर लीक बिल: प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक रोकने के लिए सख्त प्रावधानों वाला विधेयक।

टैक्सेशन संशोधन बिल और ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल।

सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या बढ़ाने वाला बिल तथा एमएसएमई संशोधन बिल।

हालांकि, एफसीआरए (FCRA) संशोधन बिल और परिसीमन से जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण विधेयक गतिरोध के कारण पेंडिंग रह गए।

सरकार और विपक्ष का एक-दूसरे पर आरोप

सत्र के दौरान सरकार का पक्ष था कि वह हर विषय पर नियम के तहत चर्चा कराने के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष जानबूझकर नारेबाजी करके सदन को नहीं चलने दे रहा। गृह मंत्री अमित शाह ने गतिरोध खत्म करने के लिए चर्चा की पेशकश भी की थी, लेकिन विपक्ष अपनी मांगों पर अड़ा रहा।

दूसरी ओर, विपक्ष का आरोप था कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाबदेही से भाग रही है और बिना बहस के विधेयकों को पास करा रही है। आखिरकार, बिना किसी सुचारू चर्चा के लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया, जिससे यह सत्र हाल के वर्षों के सबसे कम उत्पादकता वाले सत्रों में दर्ज हो गया।

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