
पेपर लीक पर नए कानून की तैयारी, हो सकती है 10 साल की जेल और भारी जुर्माना
केंद्र सरकार पेपर लीक रोकने के लिए नया संशोधन विधेयक ला सकती है। दोषियों को 10 साल तक की जेल, 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना, दो महीने में जांच और फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान होगा।
प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा घोटालों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार सोमवार को संसद में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 पेश कर सकती है। प्रस्तावित कानून में पेपर लीक करने वालों, संगठित गिरोहों और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं के लिए पहले से कहीं अधिक कठोर सजा और भारी आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार को सांसदों को वितरित विधेयक की प्रति के मुताबिक, सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और धांधली मुक्त बनाना है।
पेपर लीक पर 10 साल तक की जेल, 50 लाख रुपये तक जुर्माना
प्रस्तावित संशोधन के तहत यदि कोई व्यक्ति पेपर लीक या परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल का दोषी पाया जाता है, तो उसे कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल की जेल हो सकती है। इसके साथ ही 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।
संगठित गिरोहों पर होगी सबसे सख्त कार्रवाई
यदि पेपर लीक किसी संगठित गिरोह या माफिया द्वारा किया जाता है, तो कार्रवाई और भी कठोर होगी। ऐसे मामलों में न्यूनतम 7 साल की सजा का प्रस्ताव है, जबकि संबंधित गिरोह या संस्था पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य पेपर लीक माफियाओं के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना है।
दो महीने में जांच, तीन महीने में फैसला
सरकार जांच और न्यायिक प्रक्रिया को भी समयबद्ध बनाने की तैयारी में है।पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच अधिकतम दो महीने में पूरी करनी होगी।जांच की जिम्मेदारी स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को सौंपी जाएगी। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे।आरोपपत्र दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करने का लक्ष्य रखा गया है।लंबित मामलों को भी विशेष अदालतों में स्थानांतरित कर त्वरित सुनवाई कराई जाएगी।
NEET-UG 2027 में होंगे बड़े बदलाव
सरकार NEET-UG 2027 को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में भी बड़े बदलाव करने जा रही है।परीक्षा कंप्यूटर आधारित (CBT) होगी। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के ढांचे में व्यापक सुधार किए जाएंगे।छात्रों के फीडबैक के आधार पर परीक्षा प्रणाली में बदलाव होंगे। दो चरणों में NEET आयोजित करने के प्रस्ताव पर भी विचार चल रहा है।सरकार का मानना है कि इन बदलावों से परीक्षा प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, तकनीक आधारित और पारदर्शी बनेगी।
प्रस्तावित कानून की प्रमुख बातें
पेपर लीक के दोषी को 5 से 10 साल तक की जेल। 50 लाख रुपये तक जुर्माना
परीक्षा आयोजित करने वाली सेवा प्रदाता संस्था
5 करोड़ रुपये तक जुर्माना, 8 साल तक ब्लैकलिस्ट
सेवा प्रदाता संस्था का प्रबंधन
5 से 10 साल तक की जेल, 5 करोड़ रुपये तक जुर्माना
संगठित अपराध या पेपर लीक माफिया
न्यूनतम 7 साल की जेल, 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना
जांच व्यवस्था
STF दो महीने में जांच पूरी करेगी।
स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट
सभी राज्यों में विशेष अदालतें गठित होंगी। रोजाना सुनवाई होगी। तीन महीने में फैसला देने का लक्ष्य।
लंबित मामलों का निपटारा
सभी लंबित जांच STF को सौंपी जाएंगी। लंबित मुकदमों की सुनवाई भी विशेष अदालतों में होगी।
स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर
परीक्षा संबंधी मामलों की पैरवी के लिए विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का प्रावधान किया जाएगा।सरकार का मानना है कि इस संशोधन के लागू होने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, संगठित नकल और अन्य धांधलियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा तथा छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा और मजबूत होगा।

