
PM मोदी के सामने ‘सिर झुकाओ’! IIT दिल्ली के कथित निर्देश पर ओवैसी का तीखा हमला
असदुद्दीन ओवैसी ने इन कथित निर्देशों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिक्षा संस्थानों में वैज्ञानिक सोच, स्वतंत्र विचार और धर्मनिरपेक्षता के संवैधानिक सिद्धांतों पर सवाल उठाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में शनिवार को आयोजित IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। समारोह से पहले छात्रों को कथित तौर पर प्रधानमंत्री से मेडल लेते समय सिर झुकाने के तरीके के बारे में निर्देश दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट पर एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल उठाते हुए इसे संवैधानिक मूल्यों से जोड़ दिया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, समारोह में छात्रों के लिए सुरक्षा और प्रोटोकॉल से जुड़े कई निर्देश जारी किए गए थे। इनमें प्रधानमंत्री से सम्मान प्राप्त करते समय छात्रों के अभिवादन के तरीके को लेकर कथित निर्देश भी शामिल थे। इसके अलावा, समारोह के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के समय छात्रों को खड़े रहने के लिए कहे जाने की बात भी सामने आई है।
ओवैसी ने संविधान का हवाला देकर साधा निशाना
असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया, "मुझे अफ़सोस के साथ कहना पड़ रहा है कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ आईआईटी दिल्ली के स्टूडेंट्स से कहा गया कि जब वो पीएम से मिलेंगे तो उन्हें अपनी गर्दन कितनी झुकाकर रखनी है। मीडिया ने यह भी बताया है कि 'कहा गया कि जब वैदिक मंत्र पढ़े जाएंगे तो सबको खड़े होना पड़ेगा।"
असदुद्दीन ओवैसी ने इन कथित निर्देशों पर प्रतिक्रिया देते हुए शिक्षा संस्थानों में वैज्ञानिक सोच, स्वतंत्र विचार और धर्मनिरपेक्षता के संवैधानिक सिद्धांतों पर सवाल उठाया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 51A(h) का उल्लेख किया, जो नागरिकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद तथा सवाल करने और सुधार की भावना विकसित करने की बात करता है।
ओवैसी ने अनुच्छेद 28 का भी हवाला दिया। उनका कहना है कि राज्य के पूर्ण वित्तपोषण वाले शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा से जुड़े प्रावधानों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने छात्रों से ऐसे मामलों में सवाल उठाने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में राष्ट्रीय हित का अर्थ सरकार से सवाल करना भी है।
सुरक्षा व्यवस्था भी चर्चा में
प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए IIT दिल्ली परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार,परिसर में मेटल डिटेक्टर, बैरिकेडिंग और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। कुछ छात्रों ने सुरक्षा जांच और आवाजाही से जुड़े प्रतिबंधों को लेकर असुविधा की शिकायत भी की थी।
फिलहाल विवाद का केंद्र छात्रों को कथित तौर पर दिए गए ‘सिर झुकाने’ और वैदिक मंत्रोच्चार के दौरान खड़े होने संबंधी निर्देश हैं।
समारोह में 3 हजार से अधिक छात्रों ने ली डिग्री
IIT दिल्ली का 57वां दीक्षांत समारोह 8 अगस्त को आयोजित हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसमें मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, समारोह में 3,000 से अधिक विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई, जिनमें 587 PhD स्कॉलर भी शामिल थे। प्रधानमंत्री ने संस्थान के मेधावी छात्रों को राष्ट्रपति स्वर्ण पदक, निदेशक स्वर्ण पदक और अन्य प्रमुख सम्मान प्रदान किए।
समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों से लगातार सीखते रहने, जटिल समस्याओं का समाधान खोजने और देश के विकास में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने तेजी से बदलती तकनीक और वैश्विक परिस्थितियों के बीच विद्यार्थियों को नई चुनौतियों के लिए तैयार रहने की सलाह दी।

