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नेपाल में फ्लैश फ्लड से कोहराम, 19 की मौत; 105 भारतीयों समेत 384 लोग लापता

नेपाल के रसुवा में भोटे कोशी नदी में बाढ़ से 19 लोगों की मौत, 105 भारतीय समेत 384 लापता। पीएम मोदी ने की बात, भारत से भेजी जा रही है राहत सामग्री।


Nepal Flash Flood: नेपाल के उत्तरी रसुवा जिले में भोटे कोशी और त्रिशूली नदी में आई भीषण बाढ़ (Flash Flood) ने भारी तबाही मचा दी है। बुधवार सुबह आए इस भयानक जलप्रलय के कारण कम से कम 19 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 105 भारतीय पर्यटकों समेत 384 लोग लापता बताए जा रहे हैं। बाढ़ की चपेट में आने से कई गांव जलमग्न हो गए हैं और सड़कों, पुलों तथा जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है।



तबाही का मुख्य कारण: ग्लेशियर झील फटने (GLOF) की आशंका
बुधवार सुबह करीब 9 बजे (स्थानीय समय) भोटे कोशी नदी में अचानक पानी का बहाव बेहद खतरनाक स्तर तक बढ़ गया। आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों और प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार:


ग्लेशियर झील फटना (GLOF): आशंका जताई जा रही है कि तिब्बत (चीन) के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित किसी ग्लेशियर झील के फटने या ग्लेशियर टूटने (Avalanche Breach) के कारण लाखों क्यूबिक मीटर पानी अचानक भोटे कोशी नदी में आ बहा।

भूस्खलन से बना डैम टूटना: विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि तिब्बत की ओर भूस्खलन के कारण नदी का प्रवाह रुका होगा और फिर अचानक बांध टूटने से नीचे के इलाकों में यह जलप्रलय आया।

मौसम विभाग का बयान
: नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने स्पष्ट किया है कि रसुवा क्षेत्र में हुई स्थानीय बारिश के कारण यह बाढ़ नहीं आई है, बल्कि इसका स्रोत सीमा पार तिब्बत में था।


रसुवा जिले में भारी तबाही और बुनियादी ढांचा ध्वस्त
नेपाली सेना और स्थानीय प्रशासन द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार:

टिमुरे और स्याफ्रुबेसी तबाह: काठमांडू से लगभग 125 किमी दूर और तिब्बत सीमा के पास स्थित टिमुरे और स्याफ्रुबेसी इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। यहाँ बने कई पक्के मकान, सीमा शुल्क (Customs) कार्यालय परिसर में खड़े सैकड़ों वाहन और हाल ही में बना कंक्रीट का पुल बह गया।

बिजली संकट: नेपाल के ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और ट्रांसमिशन लाइनों के क्षतिग्रस्त होने से देश में लगभग 430 मेगावाट बिजली की आपूर्ति ठप हो गई है।

सुरक्षाकर्मी भी लापता: लापता लोगों में 105 भारतीय पर्यटकों के अलावा नेपाल पुलिस के 26 जवान और सशस्त्र पुलिस बल के 7 जवान भी शामिल हैं।

भारत की त्वरित प्रतिक्रिया: पीएम मोदी ने जताया दुख, भेजी मदद
प्राकृतिक आपदा की खबर मिलते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बात की और जान-माल के नुकसान पर गहरा दुख व्यक्त किया।

मानवीय सहायता (HADR): भारत सरकार ने तुरंत प्रभाव से नेपाल के लिए आपातकालीन सहायता की घोषणा की है। भारतीय वायु सेना (IAF) के विशेष विमानों के जरिए जरूरी दवाएं, मेडिकल किट, सूखा राशन और राहत सामग्री भेजी जा रही है।

NDRF की टीमें तैयार: भारत सरकार ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के बचाव दस्तों को नेपाल के प्रभावित क्षेत्रों में भेजने की तैयारी कर ली है।

यूपी और बिहार में हाई अलर्ट: नेपाल से पानी के भारी बहाव को देखते हुए उससे सटे भारतीय राज्यों—उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती तथा निचले इलाकों में प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

रेस्क्यू ऑपरेशन में चुनौतियाँ
नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को राहत कार्य में लगाया गया है।

नेपाली सेना के MI-17 हेलीकॉप्टरों को आपातकालीन चिकित्सा दल (EMRT) के साथ तैनात किया गया है।

हालांकि, स्याफ्रुबेसी और टिमुरे जैसे अत्यधिक प्रभावित इलाकों में जलस्तर काफी ज्यादा होने और मौसम खराब रहने के कारण हेलीकॉप्टरों को उतारने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRM) ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन और गोरखा जिलों में नदियों के किनारे बसे लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने और सतर्क रहने की अपील की है।

तीसरे देश पर असर: तिब्बत में भी भारी नुकसान
चीनी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तिब्बत के ग्योंग (Gyirong) काउंटी में भी इस फ्लैश फ्लड के कारण भारी तबाही हुई है। चीन-नेपाल सीमा क्रॉसिंग के पास सड़कें और बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है, जहाँ कई लोग लापता बताए जा रहे हैं।


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