
नेपाल बाढ़: चीन का अर्ली अलर्ट न देना और अंधाधुंध निर्माण पड़ा भारी
नेपाल जलप्रलय में 586 मौतें। रक्षा विशेषज्ञ PK सहगल का आरोप: चीन के अंधाधुंध निर्माण और समय पर चेतावनी न देने से आई इतनी भीषण तबाही।
Nepal Flash Floods: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से भारी तबाही मची है, जहां अब तक 586 शव बरामद किए जा चुके हैं और 2,500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव कार्य में जुटी नेपाल सेना और पुलिस मलबे से जिंदगी की तलाश कर रही है। लेकिन इस भीषण त्रासदी के बीच अब एक नया और गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। बाढ़ और तबाही के पीछे चीन की भूमिका पर उठते सवाल।
रक्षा विशेषज्ञ मेजर (रि.) पीके सहगल का दावा है कि चीन की अंधाधुंध परियोजनाओं और समय पर पारदर्शी पूर्व चेतावनी (Early Warning) न देने की वजह से नेपाल में यह मानवीय त्रासदी इतनी भयानक हुई है।
चीन की परियोजनाओं और अनदेखी ने बढ़ाई तबाही: PK सहगल के 4 बड़े दावे
समय पर चेतावनी नहीं दी:
मेजर (रि.) पीके सहगल का कहना है कि यदि चीन समय पर पारदर्शी शुरुआती चेतावनी जारी करता, तो नेपाल में जन-धन के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था। सोशल मीडिया पर नेपाल के नागरिक भी चीन के इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये को लेकर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।
नाजुक हिमालयी इकोलॉजी से खिलवाड़:
तिब्बत और सीमावर्ती क्षेत्रों में चीन के भारी-भरकम निर्माण, विशालकाय बांधों, नदियों के रुख को मोड़ने की परियोजनाओं (River Diversion), टनलिंग और पहाड़ काटकर नई सड़कें बनाने से हिमालय का पहले से ही नाजुक पर्यावरण बुरी तरह तबाह हुआ है।
खुद चीनी विशेषज्ञों की सलाह को ठुकराया:
सहगल ने खुलासा किया कि चीन के अपने ही इंजीनियरों और नीति-निर्माताओं ने इन अति-संवेदनशील इलाकों में बड़े पैमाने पर निर्माण के खिलाफ चेताया था। इसके बावजूद चीनी प्रतिष्ठान ने अपनी ही रिपोर्टों और चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया।
नेपाल की जनता में भारी आक्रोश:
बाढ़ के बाद नेपाल के स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर चीन के प्रति भारी गुस्सा देखा जा रहा है। लोगों का आरोप है कि सीमा पार तिब्बत में हुए चीनी निर्माणों ने नेपाल के तटीय इलाकों को मौत के मुहाने पर धकेल दिया।
कैसे आई थी बुधवार को यह भीषण बाढ़?
वैज्ञानिकों और WMO की सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार, यह हादसा हिमालय की लैंगटांग लिरुंग चोटी पर करीब 17,000 फीट की ऊंचाई से विशालकाय ग्लेशियर और भारी चट्टानों का हिस्सा टूटने से हुआ:
5.2 तीव्रता के झटके: 17,000 फीट की ऊंचाई से गिरे विशाल मलबे की टक्कर इतनी भयंकर थी कि क्षेत्र में 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसे झटके दर्ज किए गए।
बर्फ बनी पानी, ब्लॉक हुई नदी: इस टकराव से पैदा हुई प्रचंड ऊर्जा ने बर्फ को पल भर में पिघला दिया और मलबे ने 'ल्हेंदे नदी' के प्राकृतिक बहाव को रोककर एक अस्थायी, खतरनाक झील बना दी।
झील फटने से तबाही: जब यह मलबे की दीवार टूटी, तो पानी, कीचड़ और बड़े-बड़े पत्थरों का सैलाब निचले इलाकों में सब कुछ बहा ले गया।
नेपाल में पानी का स्तर धीरे-धीरे उतरने के बाद तबाही का भयावह मंजर सामने आ रहा है। जो लोग अपने बस्तियों में लौट रहे हैं, उन्हें अपने घरों की जगह सिर्फ मलबा और कीचड़ दिखाई दे रहा है।
नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल के हजारों जवान 2,500 से अधिक लापता लोगों की तलाश में दिन-रात एक किए हुए हैं, लेकिन मौसम और दूसरी बाढ़ के खतरे के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी दिक्कतें आ रही हैं।
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