नेपाल बाढ़ : मरने वालों की संख्या बढ़ी, अब तक क्या-क्या पता है?
x

नेपाल बाढ़ : मरने वालों की संख्या बढ़ी, अब तक क्या-क्या पता है?

माना जाता है कि यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमालयी इलाके में बर्फ और चट्टानों के गिरने या हिमस्खलन की वजह से आई थी। बुधवार (26 अगस्त) को पानी, कीचड़ और मलबे का एक विशाल सैलाब मध्य नेपाल से होते हुए नीचे की ओर बह निकला, जिसने भारी तबाही मचाई।


नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या रविवार (30 अगस्त) को बढ़कर 700 से अधिक हो गई है। बचाव दल अभी भी लापता 2,500 से ज़्यादा लोगों की तलाश कर रहे हैं और इस दौरान और शव बरामद किए गए हैं।

बाढ़ से प्रभावित आठ ज़िलों से शव बरामद किए गए हैं। आपदा के पांचवें दिन बचावकर्मी लापता लोगों का पता लगाने और बाढ़ प्रभावित इलाकों में फँसे लोगों तक पहुँचने के लिए तेज़ी से काम कर रहे हैं।

मरने वालों की संख्या बढ़ी
नेशनल डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने बताया कि मरने वालों की संख्या बढ़कर 768 हो गई है, जबकि 2,502 लोग अभी भी लापता हैं। अब तक प्रभावित इलाकों से 8,730 लोगों को बचाया गया है।

अधिकारियों के मुताबिक, चितवन में सबसे ज़्यादा मौतें हुई हैं, जहां अब तक 264 शव बरामद किए गए हैं। इसके अलावा, नवलपरासी ईस्ट से 194, नवलपरासी वेस्ट से 100, गोरखा से 58, नुवाकोट से 52, धाडिंग से 50, तनाहु से 37 और रसुवा से 13 शव बरामद किए गए।

275 भारतीय लापता
लापता लोगों में 275 भारतीय नागरिक हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) ने शनिवार (29 अगस्त) को बताया कि भारतीय मूल के 128 लोगों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। मंत्रालय ने कहा कि कम से कम 108 भारतीयों को बचा लिया गया है।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि पिछले दो दिनों में 598 भारतीय नागरिक चीन से नेपाल सुरक्षित पहुंच गए हैं, जबकि लगभग 900 भारतीय अभी भी चीन की तरफ हैं, लेकिन वे "सुरक्षित हैं और उनसे संपर्क हो पा रहा है"।

बचाए गए लोगों में कम से कम 261 विदेशी पर्यटक शामिल हैं, जिनसे संपर्क टूट गया था। इनमें से 167 भारतीय, 40 चीनी, आठ यूक्रेनी, जर्मनी और माल्टा से चार-चार, अमेरिका से तीन और बाकी तुर्की, पुर्तगाल, रूस, स्पेन, स्विट्जरलैंड, इटली, ओमान, बेल्जियम और बुल्गारिया से थे।

तिब्बत में और भी लोग लापता
सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, तिब्बत की तरफ लापता लोगों में नेपाल के 104, लातविया के 33, अमेरिका के 18 और ब्रिटेन के 15 लोग शामिल हैं। इनके अलावा कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया, जर्मनी, रूस और आयरलैंड के लोग भी लापता हैं, साथ ही 49 भारतीय भी लापता हैं।

खोज और बचाव अभियान के लिए 15,000 से ज़्यादा सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया गया है, जबकि फँसे हुए लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुँचाने के लिए हेलीकॉप्टर लगातार उड़ानें भर रहे हैं।

फिर बढ़ रहा है पानी का स्तर
माना जाता है कि यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमालयी इलाके में बर्फ और चट्टानों के गिरने या हिमस्खलन की वजह से आई थी। बुधवार (26 अगस्त) को पानी, कीचड़ और मलबे का एक विशाल सैलाब मध्य नेपाल से होते हुए नीचे की ओर बह निकला, जिससे कई ज़िलों के कस्बों और गांवों में भारी तबाही मची; घर, गाड़ियां, सड़कें और पुल बह गए और पनबिजली परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा।

हिमालयी सीमावर्ती इलाके से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी, बाढ़ के पानी को मध्य नेपाल के निचले इलाकों तक पहुंचाने का मुख्य ज़रिया बनी, जिससे यह तबाही हुई। रविवार को भोटेकोशी नदी में पानी का स्तर फिर से बढ़ गया, जिसके बाद अधिकारियों ने चेतावनी जारी करते हुए बाढ़ प्रभावित ज़िलों के निवासियों और बचाव कर्मियों से सतर्क रहने को कहा।

नई झील
रविवार को बचाव कार्यों में बाधा तब आई जब तिब्बत सीमा के पास एक नई झील बन गई। यह झील उस जगह से 2.8 किलोमीटर (1.74 मील) दूर बनी जहाँ पहले एक झील थी जिसका पानी खाली कर दिया गया था, लेकिन जिसने पिछले दिनों बचाव कार्य के लिए खतरा पैदा कर दिया।

चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर CCTV ने बताया कि शनिवार शाम को हुए भूस्खलन के बाद "अब एक नई बैरियर झील बन रही है"।

CCTV ने कहा कि ग्यिरोंग सीमा चौकी के पास मौजूद बचाव कर्मियों को सुरक्षित इलाकों में भेज दिया गया है, जबकि आपातकालीन प्रबंधन मंत्रालय ने स्थिति का आकलन और विश्लेषण करने के लिए विशेषज्ञों को बुलाया है।

पुनर्निर्माण में 'अरबों' का खर्च आ सकता है

विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि नेपाल में पुनर्निर्माण का खर्च "अरबों डॉलर" तक पहुँच सकता है। उन्होंने कहा, "हम नुकसान और क्षति का आकलन करेंगे और फिर योजना बनाएंगे, लेकिन मैं मदद के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संपर्क कर रहा हूँ।"

Read More
Next Story