
E20 Petrol: माइलेज 2-6% कम, पर इंजन सुरक्षित, संसद में बोले नितिन गडकरी
E20 Petrol Nitin Gadkari: E20 पेट्रोल से 2 से 6 फीसदी घट सकता है माइलेज। नितिन गडकरी ने लोकसभा में कहा- इंजन सुरक्षित, 30% कम होगा कार्बन उत्सर्जन।
Gadkari On Ethanol: देश भर में 20 फीसदी एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल (E20) के इस्तेमाल को लेकर उठ रहे सवालों और विपक्ष के हमलों के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में स्थिति साफ की है। गुरुवार को लोकसभा में एक लिखित जवाब के दौरान गडकरी ने स्वीकार किया कि वाहनों की श्रेणी और मॉडल (विंटेज) के हिसाब से E20 ईंधन से माइलेज में 2 से 6 प्रतिशत की कमी आ सकती है। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि डायनामोमीटर और ऑन-रोड टेस्ट में E20 ईंधन के कारण किसी भी वाहन के इंजन में विफलता या खराबी का कोई मामला सामने नहीं आया है।
'बेहतर पिकअप और 30% कम कार्बन उत्सर्जन': सरकार के तर्क
केंद्रीय मंत्री ने E20 ईंधन के फायदों को रेखांकित करते हुए बताया कि ARAI, SIAM और इंडियन ऑयल (IOCL) द्वारा BS-III, BS-IV और BS-VI वाहनों पर संयुक्त अध्ययन किया गया था।
इंजन पर असर नहीं: गडकरी ने कहा कि व्यापक टेस्टिंग के बाद सर्विस डेटा से साफ हुआ है कि E20 पेट्रोल से वाहनों में न तो कोई असामान्य जंग लग रही है और ना ही इंजन की उम्र कम हो रही है।
वारंटी पर कोई संकट नहीं: ऑटोमोबाइल कंपनियां E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने वाले वाहनों पर वारंटी दावों को बिना किसी रुकावट के मान रही हैं। E10 की तुलना में E20 ईंधन बेहतर एक्सीलरेशन (पिकअप), बेहतर राइड क्वालिटी और लगभग 30% कम कार्बन उत्सर्जन प्रदान करता है।
करोड़ों वाहनों में हो रहा इस्तेमाल: देश में पिछले ढाई सालों से E19-E20 ईंधन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। फिलहाल 20 करोड़ से अधिक दोपहिया और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें बिना किसी शिकायत के इस पर चल रही हैं।
विपक्ष और कंज्यूमर ग्रुप्स के सवाल: पुराने वाहनों का क्या?
E20 पेट्रोल की रोलआउट प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और उपभोक्ता समूहों ने लगातार चिंता जताई है।
पुराने वाहनों की अनुकूलता पर संशय: आलोचकों का सवाल है कि क्या 2023 से पहले के पुराने वाहन, जिन्हें केवल 10% एथेनॉल (E10) के हिसाब से डिजाइन किया गया था, E20 के साथ पूरी तरह से सुरक्षित हैं?
मेंटेनेंस खर्च और जवाबदेही: विपक्ष ने मुद्दा उठाया है कि E20 से माइलेज में कमी और संभावित मेंटेनेंस खर्च में बढ़ोतरी की भरपाई कौन करेगा? अगर भविष्य में ईंधन प्रणाली में खराबी आती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
2001 से शुरू हुआ सफर, चरणबद्ध तरीके से लागू हुई नीति
गडकरी ने स्पष्ट किया कि एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि इसे नीति आयोग, ARAI, SIAM, IIP और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के साथ लंबे विचार-विमर्श और वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद लागू किया गया है।
पायलट प्रोजेक्ट से E20 तक: भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग का पायलट प्रोजेक्ट 2001 में शुरू हुआ था। साल 2006 में E5 पेट्रोल आया। 2013-14 तक ब्लेंडिंग केवल 1.53% थी, जिसे ढांचागत क्षमता और उत्पादन बढ़ाकर धीरे-धीरे बढ़ाया गया है।
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