बढ़ते विपक्षी दबाव के बीच अगले हफ्ते संसद में आ सकते हैं गृह मंत्री, मानसून सत्र में बढ़ेगी सरगर्मी
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बढ़ते विपक्षी दबाव के बीच अगले हफ्ते संसद में आ सकते हैं गृह मंत्री, मानसून सत्र में बढ़ेगी सरगर्मी

संसद के मानसून सत्र में पिछले तीन हफ्तों से जारी गतिरोध के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दोनों सदनों में आने की संभावना जताई जा रही है।


संसद का मानसून सत्र अब अपने अंतिम पड़ाव में पहुंच चुका है, लेकिन जिस मुद्दे पर सत्र की शुरुआत हुई थी, वह गतिरोध आज तीन हफ्ते बाद भी जस का तस बना हुआ है। 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर हुई पुलिस कार्रवाई ने देश की राजनीति में एक बड़ा भूचाल ला दिया था। तब से लेकर अब तक, विपक्ष लगातार एक ही मांग पर अड़ा हुआ है— देश के गृह मंत्री अमित शाह खुद संसद के दोनों सदनों में आएं, इस पुलिस कार्रवाई पर जवाब दें और देश के युवाओं से माफी मांगें।

इस मांग के कारण संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही लगभग पूरी तरह से ठप रही है। तीन हफ्तों की इस लगातार अनुपस्थिति और तीखी बयानबाजी के बाद अब सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि गृह मंत्री अमित शाह आगामी सप्ताह संसद के दोनों सदनों में उपस्थित हो सकते हैं। हालांकि, बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि क्या वे विपक्ष की मांग के अनुसार 20 जुलाई की घटना पर कोई औपचारिक बयान देंगे या फिर अपनी शर्तों पर सरकार का पक्ष रखेंगे।

जंतर-मंतर का वो खूनी दिन जिसने संसद को हिला दिया

20 जुलाई का दिन भारतीय छात्र आंदोलन के इतिहास में एक काले पन्ने की तरह दर्ज हो गया। प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार हो रहे पेपर लीक और धांधली के विरोध में देश भर से आए छात्र और युवा जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों की मांग बेहद सीधी थी— सरकार पेपर लीक की जवाबदेही तय करे और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली लागू करे।

लेकिन उसी दिन दिल्ली पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की त्वरित कार्यबल (RAF) ने प्रदर्शनकारियों पर अचानक कड़ी कार्रवाई कर दी। चश्मदीदों और विपक्ष का आरोप है कि पुलिस और सुरक्षा बलों ने बेकसूर छात्रों पर वॉटर कैनन, आंसू गैस के गोले, लाठियां और पेलेट गन का बेरहमी से इस्तेमाल किया। कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए।

क्योंकि दिल्ली पुलिस सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आती है, इसलिए इस कार्रवाई की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी सीधे गृह मंत्री अमित शाह पर आ टिकी। इसी घटना को लेकर कांग्रेस नीत विपक्ष ने संसद के पहले ही दिन से गृह मंत्री के इस्तीफे और उनके बयान की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया।

राहुल गांधी का सीधा हमला और 'प्लीज-ऑल' कानूनों का दौर

मानसून सत्र की शुरुआत से लेकर अब तक अगर संसद में किसी एक कानून पर व्यापक चर्चा हो सकी है, तो वह है 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक'। सरकार ने छात्रों और जनता के गुस्से को शांत करने के लिए इस बिल को जल्दबाजी में संसद में पेश किया था।

लेकिन जब इस बिल पर चर्चा शुरू हुई, तो लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सीधे गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर ले लिया। राहुल गांधी ने अपने भाषण में कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि देश के गृह मंत्री अपने ही देश के छात्रों पर गोलियां और लाठियां चलवा रहे हैं।

राहुल गांधी के इस आक्रामक हमले के बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने भारी हंगामा किया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी प्रक्रियात्मक आपत्तियां जताईं, जिसके कारण राहुल गांधी अपना भाषण पूरा नहीं कर सके। हालांकि, अपने तीखे हमलों के लिए जाने जाने वाले गृह मंत्री अमित शाह उस समय सदन में मौजूद नहीं थे और उन्होंने विपक्षी हमलों का कोई सीधा जवाब नहीं दिया।

इसके बाद जब गृह मंत्रालय से जुड़े दो अन्य महत्वपूर्ण विधेयक—'राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक' और 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक'—संसद में पेश किए गए, तब भी अमित शाह सदन में नहीं आए। गृह मंत्री की जगह इन विधेयकों को पेश करने की जिम्मेदारी उनके जूनियर मंत्री यानी गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय को सौंप दी गई। इससे विपक्ष का गुस्सा और भड़क गया।

राज्यसभा चेयरमैन की 'सलाह' और किरेन रिजिजू का अजीबोगरीब बचाव

गृह मंत्री की संसद से लगातार दूरी को लेकर गुरुवार (6 अगस्त) को राज्यसभा में भी जमकर हंगामा हुआ। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे विपक्ष की भावनाओं से गृह मंत्री अमित शाह को अवगत कराएं और उन्हें सदन में आने का अनुरोध करें।

हालांकि, सभापति की इस सलाह का भी शुक्रवार को कोई खास असर देखने को नहीं मिला। शुक्रवार को भी दोनों सदनों में विपक्ष का भारी हंगामा जारी रहा, जिसके चलते दोपहर 12 बजे के तुरंत बाद लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और सरकार ने गृह मंत्री का बचाव करने के लिए एक ऐसा तर्क दिया, जिसने विपक्ष को और अधिक उद्वेलित कर दिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में तर्क दिया कि "गृह मंत्री अमित शाह रोज सुबह संसद भवन आते हैं और देर शाम तक अपने कार्यालय में बैठकर काम करते हैं। विपक्ष उन्हें जबरन लोकसभा या राज्यसभा में आने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।"

किरेन रिजिजू के इस बयान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा:

"क्या अहंकार का इससे बड़ा प्रदर्शन देश ने कभी देखा है? संसदीय कार्य मंत्री देश को यह संदेश दे रहे हैं कि गृह मंत्री संसद और जनता के प्रति जवाबदेह नहीं हैं। वे हर दिन संसद भवन आते हैं, अपने दफ्तर में बैठते हैं, लेकिन 500 कदम चलकर लोकसभा या राज्यसभा में आकर यह बताने की जहमत नहीं उठाते कि उनकी पुलिस ने देश के बेकसूर छात्रों और युवाओं पर अत्याचार क्यों किया।"

सोमवार को FCRA बिल पर महासंग्राम की तैयारी

अब सभी की निगाहें सोमवार (10 अगस्त) पर टिकी हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को संसद में उपस्थित हो सकते हैं और लोकसभा में विवादित 'विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक' (FCRA Amendment Bill) को चर्चा और पास कराने के लिए पेश कर सकते हैं।

भाजपा के एक वरिष्ठ मंत्री के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष की मांगों से डरकर या दबाव में आकर बयान नहीं देंगे, बल्कि जब वे FCRA बिल पर चर्चा का जवाब देंगे, तो वे अपनी शर्तों पर विपक्ष को अत्यंत कड़ा और करारा जवाब देंगे।

दूसरी तरफ, कांग्रेस ने भी अपनी कमर कस ली है। कांग्रेस ने शुक्रवार को ही अपने सभी सांसदों को 10 अगस्त से 12 अगस्त तक लोकसभा में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के लिए 3-लाइन का व्हिप (Whip) जारी कर दिया है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा कि विपक्ष की रणनीति बिल्कुल साफ है। जैसे ही गृह मंत्री सदन में कदम रखेंगे, विपक्ष सबसे पहले 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई पर उनके जवाब और माफी की मांग करेगा। उसके बाद ही किसी बिल पर चर्चा होने दी जाएगी।

FCRA बिल पर INDIA गठबंधन की लामबंदी

विदेशी फंड से जुड़े FCRA कानून में प्रस्तावित संशोधन को लेकर पूरा INDIA गठबंधन और द्रमुक (DMK) जैसी क्षेत्रीय पार्टियां भी बेहद आक्रामक हैं। विपक्षी दलों का मानना है कि इस कानून में कई ऐसे कठोर और दमनकारी प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं, जिनका इस्तेमाल नागरिक समाज (Civil Society) के संगठनों, गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और धार्मिक व भाषाई अल्पसंख्यकों द्वारा चलाए जा रहे संस्थानों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।

विपक्षी दल चाहते हैं कि इस बिल पर जल्दबाजी में वोटिंग कराने के बजाय इसे विस्तृत जांच के लिए संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) या स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाए। इस बिल पर साझा रणनीति बनाने के लिए सोमवार सुबह राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के संसद स्थित कक्ष में INDIA गठबंधन के फ्लोर लीडर्स की एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है।

क्या होगा आगे? संसद के अंतिम सप्ताह का सियासी गणित

13 अगस्त को मानसून सत्र समाप्त हो रहा है और यह अंतिम हफ्ता बेहद हंगामेदार रहने के आसार हैं। सत्ता पक्ष का दावा है कि अमित शाह के जवाब के बाद विपक्ष के पास भागने का रास्ता नहीं रहेगा, जबकि विपक्ष इस बात पर अड़ा है कि वह गृह मंत्री को बिना जवाब दिए बिल पास नहीं करने देगा।

अब देखना यह होगा कि क्या सोमवार को संसद में FCRA बिल पर गरिमापूर्ण चर्चा हो पाएगी, या फिर जंतर-मंतर लाठीचार्ज की गूंज और विपक्ष के शोर-शराबे के बीच यह विधेयक भी बिना किसी सार्थक बहस के पारित कर दिया जाएगा। देश के युवाओं, छात्रों और आम जनता की नजरें अब सोमवार को शुरू होने वाले इस संसदीय युद्ध पर टिकी हैं।

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