
सोने की चमक बनी सरकार की चिंता! PM मोदी ने क्यों कहा- अभी Gold खरीदने से बचें?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने की अपील की है। आखिर सोने की बढ़ती मांग का भारत के डॉलर भंडार, रुपये और व्यापार घाटे से क्या कनेक्शन है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर देशवासियों से सोने की खरीदारी से बचने की अपील की है। प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर सरकार सोने की खरीद को लेकर इतनी चिंतित क्यों है? क्या लोगों के सोना खरीदने से भी देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है?
दरअसल, इसके पीछे सिर्फ सोने की कीमत या घरेलू मांग की कहानी नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध भारत के आयात बिल, डॉलर की मांग, व्यापार घाटे और रुपये की स्थिति से है।
विदेशी सोने पर निर्भरता
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में शामिल है। लेकिन देश में सोने का घरेलू उत्पादन मांग की तुलना में बेहद कम है। यानी देश में होने वाली बड़ी मांग को पूरा करने के लिए सोने का आयात करना पड़ता है। यही वजह है कि जब भारतीय बाजार में सोने की मांग बढ़ती है, तो उसका एक बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदना पड़ता है।
आंकड़े इस दबाव को समझने के लिए काफी अहम हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोना आयात 24 फीसदी से ज्यादा बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर पहुंच गया। इससे एक साल पहले यानी 2024-25 में यह आंकड़ा करीब 58 अरब डॉलर था। इससे पहले 2023-24 में भारत ने करीब 45.54 अरब डॉलर और 2022-23 में करीब 35 अरब डॉलर का सोना आयात किया था।
अब सवाल है कि इतना बड़ा सोना आयात अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय क्यों बनता है?
इसे आसान भाषा में समझिए। जब भारत विदेशों से सोना खरीदता है तो इसके भुगतान के लिए डॉलर की जरूरत होती है। यानी सोने का आयात बढ़ने पर डॉलर की मांग भी बढ़ती है। ऐसे में देश के विदेशी मुद्रा संसाधनों पर दबाव पड़ सकता है और रुपये पर भी असर पड़ सकता है।
मध्य पूर्व में युद्ध का असर
मौजूदा दौर में यह चिंता इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि पश्चिम एशिया में युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भारत के आयात बिल पर पहले ही दबाव बढ़ाया हुआ है। इसके साथ ही रुपया भी डॉलर के मुकाबले दबाव में रहा है। Moneycontrol के मुताबिक, मई में रुपया 96.96 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था।
सोने का दूसरा बड़ा असर देश के व्यापार घाटे पर पड़ता है। जब भारत जितना निर्यात करता है, उससे ज्यादा सामान विदेशों से खरीदता है, तो व्यापार घाटा बढ़ता है। सोने का बड़ा आयात इस अंतर को और बढ़ा सकता है।
यही वजह है कि सरकार की कोशिश सिर्फ सोने की मांग कम करने तक सीमित नहीं है। सरकार ने इस साल सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 फीसदी किया है और आयात से जुड़े नियमों को भी सख्त किया है। साथ ही घरेलू स्तर पर पहले से मौजूद सोने को दोबारा बाजार में लाने यानी गोल्ड रिसाइक्लिंग को बढ़ावा देने की कोशिश भी हो रही है।
दरअसल, भारत के कई घरों में बड़ी मात्रा में सोना पड़ा हुआ है। ऐसे में हर बार नई मांग को पूरा करने के लिए विदेश से सोना मंगाने की जरूरत नहीं है। पुराने सोने को बेचकर, दोबारा इस्तेमाल करके या जरूरत पड़ने पर उसके बदले लोन लेकर भी आर्थिक जरूरतें पूरी की जा सकती हैं।
पीएम की अपील का मकसद
प्रधानमंत्री की अपील का मकसद इसी दिशा में लोगों को सोचने के लिए प्रेरित करना है। अगर नए सोने की मांग घटती है और पुराने सोने का इस्तेमाल बढ़ता है, तो आयात में कमी आ सकती है। इससे डॉलर की मांग घटेगी, व्यापार घाटे पर दबाव कम हो सकता है और रुपये को भी कुछ राहत मिल सकती है।
लेकिन प्रधानमंत्री की अपील का असर सिर्फ अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहा। इसका सीधा असर शेयर बाजार में ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों पर भी दिखाई दिया।
सितंबर की नई अपील के बाद टाइटन कंपनी के शेयर 1.12 फीसदी गिरकर 5,045.50 रुपये और कल्याण ज्वेलर्स के शेयर 4.50 फीसदी गिरकर 587 रुपये पर आ गए। इससे पहले मई में प्रधानमंत्री की इसी तरह की अपील के बाद टाइटन, कल्याण ज्वेलर्स और सेंको गोल्ड जैसी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई थी। इससे पहले जब मई में मोदी ने ही ऐसी ही अपील की थी तब भी बड़ी ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई थी।
इसका कारण सीधा है। अगर लोग सोना खरीदने से बचते हैं तो ज्वेलरी की बिक्री प्रभावित हो सकती है। और सितंबर से फरवरी के बीच का समय ज्वेलरी कारोबार के लिए बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि इसी दौरान त्योहारी सीजन के बाद शादी का सीजन आता है। ऐसे में मांग में कमी का असर कंपनियों की बिक्री और निवेशकों की उम्मीदों पर पड़ सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार सोने को अर्थव्यवस्था के लिए बेकार मानती है या लोगों को अपनी जरूरत का सोना खरीदने से रोक रही है। प्रधानमंत्री की अपील का जोर गैर-जरूरी खरीदारी को टालने पर है।
सरकार का संदेश साफ है—अगर जरूरत नहीं है तो नई खरीदारी को टाला जाए, घरों में मौजूद सोने का बेहतर इस्तेमाल हो और देश की विदेशी मुद्रा उन चीजों के आयात पर खर्च हो जिनकी अर्थव्यवस्था को ज्यादा जरूरत है।
अब देखना यह होगा कि प्रधानमंत्री की इस अपील का असर आने वाले त्योहारी और शादी के सीजन में सोने की मांग पर कितना पड़ता है और क्या इससे भारत के सोना आयात तथा डॉलर की मांग में वास्तव में कमी आती है।

