पीएम से मिली माफी, नाबालिग की मां बोलीं- बेटी को मिला नया जीवनदान
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पीएम से मिली माफी, नाबालिग की मां बोलीं- बेटी को मिला नया जीवनदान

PM मोदी द्वारा जंतर-मंतर विवाद की 15 वर्षीय किशोरी को माफ करने पर मां ने जताया आभार। दर्ज FIR रद्द करने की मांग के साथ 18 से कम उम्र वालों के लिए सोशल मीडिया बैन की अपील।


Jantar Mantar Protest: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने वाली 15 वर्षीय किशोरी को माफ किए जाने के एक दिन बाद, उसकी मां ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया है। मां ने कहा कि पीएम मोदी ने उनकी बेटी को "नया जीवन" (जीवनदान) दिया है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से अपील की है कि नाबालिग बेटी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले (FIR) को तुरंत वापस लिया जाए ताकि वह अपना जीवन शांति से आगे जी सके।


इसके अलावा, किशोरी की मां ने केंद्र सरकार से एक महत्वपूर्ण मांग करते हुए 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के इस्तेमाल को प्रतिबंधित करने की भी अपील की है।

"पीएम ने दिखाई महानता, FIR में गलत नाम-उम्र दर्ज"
न्यूज़ एजेंसी PTI से बात करते हुए किशोरी की मां ने प्रधानमंत्री के बयान को एक 'दयालुता का कार्य' बताया और कहा कि उनका परिवार इसके लिए हमेशा आभारी रहेगा।

पीएम का जताया आभार: मां ने कहा, "मेरी बेटी द्वारा इस्तेमाल किए गए अपमानजनक शब्दों के बावजूद उसे माफ करके प्रधानमंत्री ने अपनी महानता दिखाई है। आज मेरी बेटी के लिए एक नया जन्म जैसा है। उन्होंने उसे नया जीवनदान दिया है।"

गलत पहचान का दावा: उन्होंने दावा किया कि पुलिस शिकायत/FIR में उनकी बेटी का नाम और उम्र दोनों गलत दर्ज किए गए हैं। FIR में आरोपी की पहचान "रुचिका सिंह", उम्र 25 वर्ष बताई गई है, जो कि पूरी तरह गलत है।

FIR वापसी की गुहार: उन्होंने सीधे पीएम मोदी से हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा, "हम स्वीकार करते हैं कि गलती हुई थी। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध करती हूं कि गलत नाम और उम्र के तहत दर्ज की गई इस FIR को रद्द/वापस करवाया जाए ताकि मेरी बेटी शांति से रह सके। अब वह आपकी छत्रछाया में है।"

"18 से कम उम्र वालों के लिए सोशल मीडिया हो बैन"
किशोरी की मां ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि 18 साल से कम उम्र के नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक पहुंच को सीमित या प्रतिबंधित करने पर विचार किया जाए।

आसानी से भटक जाते हैं बच्चे: उन्होंने तर्क दिया कि कम उम्र में बच्चे ऑनलाइन माध्यमों से बहुत जल्दी प्रभावित हो जाते हैं और उनका गलत इस्तेमाल या ब्रेनवॉश किया जा सकता है।

पढ़ाई पर हो ध्यान: मां ने कहा, "बच्चों को अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। उन्हें इतनी कम उम्र में विरोध प्रदर्शन स्थलों या सोशल मीडिया के संपर्क में नहीं लाया जाना चाहिए क्योंकि उन्हें आसानी से गुमराह किया जा सकता है। वे अभी दुनिया को समझ रहे हैं और दूसरों का सम्मान करना सीख रहे हैं।"

नाबालिग की वीडियो जारी कर माफी
विवाद तब शुरू हुआ था जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में 15 साल की यह किशोरी पीएम मोदी, एक महिला नेता और पीएम की दिवंगत माताजी के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल करती दिखी थी।

व्यापक जनाक्रोश के बाद नोएडा पुलिस ने मामले में जीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज की थी, जिसे बाद में जांच के लिए दिल्ली पुलिस को ट्रांसफर कर दिया गया।

मामला बढ़ने पर किशोरी ने खुद एक वीडियो जारी कर हाथ जोड़कर पूरे देश से माफी मांगी थी। किशोरी ने कहा था:

"मैं सिर्फ 15 साल की हूं। मैंने जो किया वह माफी के लायक नहीं है। मैंने बेहद बुरे शब्दों का इस्तेमाल किया। यह मेरी पहली और आखिरी गलती है। मैं पूरे देश से माफी मांगती हूं। मुझे बहुत शर्मिंदगी महसूस हो रही है और मैं सभी से क्षमा मांगती हूं। मैंने वहां मौजूद अन्य लोगों के बहकावे में आकर यह सब बोला था।"

"भटके हुए बच्चे": पीएम मोदी का संदेश
शुक्रवार (31 जुलाई) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो संदेश जारी कर इस पूरे विवाद पर अपना रुख स्पष्ट किया था। पीएम मोदी ने कहा था कि गाली-गलौज या अभद्र भाषा कभी भी किसी असहमति का समाधान नहीं हो सकती।

प्रदर्शनकारियों को "भटके हुए बच्चे" बताते हुए पीएम ने कहा था:

"ये भटके हुए बच्चे हैं। इन्हें सही रास्ता दिखाना समाज का कर्तव्य है। उन्हें सजा देना, अदालत घसीटना और परेशान करना परिस्थितियों को नहीं बदलेगा। मैंने उन्हें माफ कर दिया है, और मैं समाज से भी अपील करता हूं कि वे भी उन्हें माफ कर दें।"


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