हल्द्वानी में खड़गे की रैली के बाद रामलीला मैदान के शुद्धिकरण पर बवाल, कांग्रेस बोली- यह दलित विरोधी सोच
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हल्द्वानी में खड़गे की रैली के बाद रामलीला मैदान के शुद्धिकरण पर बवाल, कांग्रेस बोली- 'यह दलित विरोधी सोच'

उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की 'विजय शंखनाद रैली' के बाद रामलीला मैदान में कराए गए शुद्धिकरण यज्ञ को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।


उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस की 'विजय शंखनाद रैली' के समाप्त होने के बाद राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। 8 अगस्त को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मैदान से रैली को संबोधित किया था। खड़गे के जाने के बाद रामलीला मैदान में एक संगठन द्वारा कराए गए शुद्धिकरण यज्ञ ने कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच जुबानी जंग तेज कर दी है।

श्री राम सेना का दावा और शुद्धिकरण का कारण

रैली के बाद श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास नाम के संगठन की ओर से रामलीला मैदान में शुद्धिकरण यज्ञ का आयोजन किया गया। संगठन के पदाधिकारियों ने इस कदम के पीछे तर्क देते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने समय-समय पर सनातन धर्म और हिंदू संगठनों के खिलाफ कथित बयानबाजी की है। संगठन का कहना है कि जिस स्थान पर प्रतिवर्ष पवित्र रामलीला का मंचीकरण किया जाता है, वहां ऐसे विचार रखने वाले नेता की सभा के बाद जगह का शुद्धिकरण किया जाना उनकी आस्था से जुड़ा मामला है।

कांग्रेस का हमला: 'यह दलित और पिछड़ा विरोधी सोच'

शुद्धिकरण यज्ञ की खबर सामने आते ही कांग्रेस पार्टी आक्रामक रुख में आ गई। कांग्रेस अनुसूचित मोर्चे और वरिष्ठ नेताओं ने इस पूरी घटना को दलित और पिछड़ा वर्ग विरोधी मानसिकता का प्रतीक करार दिया।

कांग्रेस का कहना है कि 8 अगस्त की रैली में मंच पर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य जैसे प्रमुख नेता मौजूद थे। इन नेताओं की सामाजिक पृष्ठभूमि को निशाना बनाने की नीयत से ही यह अनुष्ठान कराया गया है।

इस घटना के विरोध में कांग्रेस अनुसूचित मोर्चे ने हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में जोरदार धरना प्रदर्शन किया और इसके लिए सत्तारूढ़ पार्टी को जिम्मेदार ठहराया।

गणेश गोदियाल की पुलिस जांच की मांग

कांग्रेस के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने इस घटना की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे जी के संबोधन वाले मंच का शुद्धिकरण किया जाना बेहद निंदनीय, अलोकतांत्रिक और संकीर्ण मानसिकता की पराकाष्ठा है।

गणेश गोदियाल ने नैनीताल के पुलिस अधीक्षक (SSP) से इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आधुनिक भारत में छुआछूत और सामाजिक भेदभाव जैसी कुरीतियों के लिए कोई जगह नहीं है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

बीजेपी की सफाई: 'हमारा कोई संबंध नहीं'

विवाद गहराने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने खुद को इस पूरे प्रकरण से पूरी तरह अलग कर लिया है। बीजेपी के जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट ने स्पष्ट किया कि इस शुद्धिकरण यज्ञ से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में बीजेपी का कोई भी पदाधिकारी शामिल नहीं था और न ही पार्टी ऐसे किसी निजी संगठन के कृत्य का समर्थन करती है।

राजनीतिक गलियारों में गहराया विवाद

हल्द्वानी का रामलीला मैदान अब एक बड़े राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो चुका है। जहां एक तरफ कांग्रेस इसे जातिगत भेदभाव और सामाजिक सम्मान से जोड़कर जनभावनाएं भुनाने की कोशिश में है, वहीं हिंदूवादी संगठन इसे अपनी धार्मिक आस्था और सनातन के सम्मान की बात बता रहे हैं।

उत्तराखंड में आगामी राजनीतिक समीकरणों के बीच इस घटनाक्रम ने जाति, धर्म और सामाजिक न्याय की बहस को एक बार फिर केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है।

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