
सचिन पायलट बने पंजाब कांग्रेस प्रभारी: क्या खत्म होगी अंदरूनी जंग?
पंजाब चुनाव से पहले कांग्रेस का बड़ा दांव: भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट बने प्रभारी। चन्नी और राजा वडिंग गुट की खींचतान और राहुल गांधी की बस यात्रा पर रिपोर्ट।
Punjab Congress: पंजाब विधानसभा चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस आलाकमान ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया महासचिव प्रभारी (General Secretary In-charge) नियुक्त किया है। राज्य में अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सचिन पायलट के सामने सबसे बड़ी और तात्कालिक चुनौती पार्टी की प्रदेश इकाई में चरम पर पहुंची गुटबाजी और कलह पर लगाम लगाने की होगी।
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब विरोधी दल चुनावी तैयारियों में पूरी ताकत झोंक रहे हैं, जबकि कांग्रेस अपने ही नेताओं के बीच मची खींचतान को शांत करने में उलझी नजर आ रही थी।
चन्नी बनाम वडिंग खेमा: कैसे भड़की बगावत की आग?
पंजाब कांग्रेस में आंतरिक कलह की शुरुआत 1 जुलाई को आलाकमान के उस फैसले के बाद तेज हुई, जिसमें अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष (PCC Chief) बनाए रखने और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति (Campaign Committee) का चेयरमैन नियुक्त करने की घोषणा की गई थी:
अध्यक्ष पद और सीएम चेहरे की जंग: चन्नी समर्थक खेमे ने वडिंग को अध्यक्ष पद पर बनाए रखने का कड़ा विरोध किया और उन्हें हटाने की मांग उठाई। साथ ही चन्नी के समर्थकों ने उन्हें आगामी चुनावों के लिए कांग्रेस का मुख्यमंत्री (CM) चेहरा घोषित करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
'हर बूथ, कांग्रेस मजबूत' में खुला टकराव: 31 जुलाई से 8 अगस्त तक चले पार्टी के 'हर बूथ, कांग्रेस मजबूत' अभियान के दौरान दोनों गुटों के बीच खुलेआम टकराव देखने को मिला। बैठकों में चन्नी समर्थकों ने "चन्नी लाओ, पंजाब बचाओ" के नारे लगाए, जिसको लेकर दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं में तीखी नोकझोंक हुई।
बघेल का मिशन रहा नाकाम: 'गो बैक' के लगे थे पोस्टर
पूर्व प्रभारी भूपेश बघेल के दौरों के बावजूद दोनों खेमों में कोई सुलह नहीं हो सकी, बल्कि उनके दौरों के साथ खींचतान और बढ़ती गई:
सड़कों पर विरोध: मुक्तसर में भूपेश बघेल के खिलाफ "गो बैक बघेल" (Go Back Baghel) के पोस्टर लगाए गए।
लुधियाना का विवाद: लुधियाना के एक कार्यक्रम में कुछ लोग 'बघेल गो बैक' लिखी टी-शर्ट पहनकर पहुंचे। स्थिति तब और बिगड़ गई जब प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग ने इन प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर "आरएसएस एजेंट" कह दिया।
15 विधायकों की चिट्ठी: अंतर्कलह इस हद तक बढ़ी कि पिछले महीने 15 कांग्रेस विधायकों ने सीधे राहुल गांधी को पत्र लिखकर राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर आपात बैठक की मांग कर डाली। बघेल का रुख यह था कि आलाकमान का फैसला अंतिम है और इसे बदला नहीं जा सकता, जिससे असंतुष्ट गुट और नाराज हो गया।
राहुल गांधी की बस यात्रा और पायलट का इम्तिहान
गुटबाजी को थामने के लिए पार्टी अब राहुल गांधी की प्रस्तावित बस यात्रा पर दांव लगा रही है, जो संभावित रूप से 15 सितंबर के आसपास शुरू हो सकती है। इस यात्रा के जरिए पार्टी कैडर में नया जोश भरने और सभी नेताओं को एक मंच पर लाने की योजना है।
संगठनात्मक मामलों के अनुभवी रणनीतिकार माने जाने वाले सचिन पायलट के लिए पंजाब का यह प्रभार कांटों का ताज साबित हो सकता है। चन्नी और वडिंग के धड़ों के बीच तालमेल बैठाना, नाराज विधायकों को साधना और चुनाव से पहले एकजुट अभियान खड़ा करना उनकी पहली और सबसे अहम अग्निपरीक्षा होगी।
(हेडलाइन को छोड़कर, इस स्टोरी को द फेडरल स्टाफ ने एडिट नहीं किया है और यह सिंडिकेटेड फ़ीड से ऑटो-पब्लिश की गई है।)
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