
पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा में भारी भीड़ से मची भगदड़, 2 श्रद्धालुओं की मौत
मरीचिकोट चौक के पास पहंडी रस्म के दौरान बिगड़े हालात, 300 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती, सीएम मोहन माझी ने दिए जांच के आदेश।
Jagannath Rath Yatra: ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध वार्षिक रथ यात्रा के पहले ही दिन एक बड़ा और दर्दनाक हादसा हो गया है। ग्रैंड रोड (बड़ा डंडा) पर सिंहद्वार के पास मरीचिकोट चौक पर अचानक उमड़ी लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के चलते भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस भीषण अफरा-तफरी में दम घुटने और बेहोश होने के कारण दो भक्तों की मौत हो गई, जबकि 300 से अधिक लोग बीमार और घायल हो गए हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस पूरी घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग को तुरंत पुरी पहुंचने और हादसे की उच्च स्तरीय जांच करने के निर्देश दिए हैं।
ऑक्सीजन सपोर्ट देकर बचाई गई कई भक्तों की जान
ओडिशा पुलिस और दमकल विभाग की स्पेशल रेस्क्यू यूनिट (SRU) ने मुस्तैदी दिखाते हुए भीड़ के बीच फंसे 33 गंभीर रूप से बीमार भक्तों को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू टीमों ने एम्बुलेंस और स्ट्रेचर की मदद से लोगों को निकाला और तुरंत प्राथमिक उपचार के साथ ऑक्सीजन सपोर्ट दिया, जिसके बाद उन्हें पुरी जिला मुख्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया। कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बताया कि मृत भक्तों में से एक की पहचान कटक जिले के सिरलोग्राम निवासी 35 वर्षीय अनिल दास के रूप में हुई है, जबकि दूसरे मृतक की शिनाख्त की कोशिशें जारी हैं। जिला अस्पताल में अब तक 180 से ज्यादा मरीजों का आधिकारिक पंजीकरण किया जा चुका है।
नवीन पटनायक ने जताया दुख, विपक्ष ने कहा प्रशासनिक लापरवाही
इस दर्दनाक हादसे के बाद सूबे की सियासत भी गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (बीजेडी) के सुप्रीमो नवीन पटनायक ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि वह बड़ा डंडा पर हुए इस हादसे से बेहद दुखी हैं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं। पटनायक ने कहा कि बीजेडी कार्यकर्ता प्रशासन की मदद के लिए तैयार हैं, साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार भीड़ का बेहतर प्रबंधन करेगी। वहीं, बीजेडी के वरिष्ठ नेता संजय दास बर्मा ने सीधे तौर पर इस घटना को प्रशासनिक लापरवाही करार दिया है और पूछा है कि इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बल होने के बावजूद दोपहर 2 बजे ऐसी स्थिति कैसे बन गई।
भारी बारिश और आस्था के सैलाब के बीच शुरू हुई रथ यात्रा
इस हादसे से पहले, पुरी के श्रीक्षेत्र में 9 दिनों तक चलने वाले इस पावन धार्मिक उत्सव का आगाज बेहद भव्य तरीके से हुआ था। लगातार हो रही बारिश और देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं की गगनभेदी जयकारों के बीच 'पहंडी' की पारंपरिक रस्म शुरू हुई। घंटियों, शंख और झांझ की दिव्य ध्वनि के बीच सबसे पहले चक्रराज सुदर्शन को मुख्य मंदिर से बाहर लाकर देवी सुभद्रा के ‘दर्पदलन’ रथ पर विराजमान किया गया। इसके बाद भगवान बलभद्र अपने ‘तालध्वज’ रथ पर और अंत में महाप्रभु जगन्नाथ अपने रथ पर सवार हुए। ओडिसी नर्तकों और सांस्कृतिक दलों की प्रस्तुतियों के बीच आस्था का सैलाब उमड़ रहा था, लेकिन दोपहर में हुई इस भगदड़ ने उत्सव के उत्साह को गम में बदल दिया।

