नीट पर राहुल का हमला: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और PM की माफी मांगी
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नीट पर राहुल का हमला: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और PM की माफी मांगी

मॉनसून सत्र का तीसरा दिन भी ठप; पीएम हाउस के बाहर हिरासत में लिए गए राहुल गांधी की प्रेसवार्ता; शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत रखीं 3 मांगें।


Rahul Gandhi Press Conference: नीट (NEET) पेपरलीक और जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए पुलिसिया लाठीचार्ज को लेकर देश की सियासत चरम पर पहुंच गई है। संसद के मानसून सत्र का तीसरा दिन भी विपक्ष के भारी हंगामे की भेंट चढ़ गया और दोनों सदनों की कार्यवाही पूरी तरह ठप रही। इससे पहले लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी को कांग्रेस सांसदों के साथ प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध-प्रदर्शन करने के दौरान दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। रिहाई के तुरंत बाद एक तीखी प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला।



'10 साल में 152 पेपरलीक, शिक्षा व्यवस्था बनी धांधली'
प्रेस वार्ता के दौरान राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर हुए लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे निर्दोष छात्रों पर दिल्ली पुलिस ने बर्बर हमला किया।

राहुल गांधी ने कहा:

"हमारा एजुकेशन सिस्टम कभी दुनिया के सबसे बेहतरीन ढांचों में गिना जाता था, लेकिन आज वह पूरी तरह धांधली बन चुका है। देश में पिछले 10 वर्षों के भीतर 152 पेपरलीक की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इससे 7.5 करोड़ गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्र सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। बच्चे दिन-रात तनाव झेल रहे हैं, लेकिन अब तक न तो किसी की जवाबदेही तय हुई और न ही किसी दोषी को सजा मिली।"

शिक्षा बजट के बराबर नीट परीक्षा का खर्च
राहुल गांधी ने परीक्षाओं के आर्थिक बोझ पर भी चौंकाने वाले आंकड़े रखे। उन्होंने बताया कि हर साल देश में नीट (NEET) परीक्षा की तैयारी और प्रवेश प्रक्रियाओं पर लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जबकि भारत सरकार का पूरा सालाना शिक्षा बजट 1.4 लाख करोड़ रुपये के करीब है। यानी देश का आम परिवार एक परीक्षा की प्रक्रिया पर लगभग उतना ही धन खर्च करने को मजबूर है, जितना सरकार पूरे देश की शिक्षा पर लगाती है।

छात्रों के समर्थन में राहुल गांधी की 3 प्रमुख मांगें
राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी और पूरा विपक्ष छात्रों की मांगों के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। उन्होंने सरकार के सामने तीन मुख्य शर्तें रखीं:

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: पेपरलीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।

दोषियों पर सख्त कार्रवाई: जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हमला करने वाले और लाठीचार्ज के जिम्मेदार हर पुलिस अधिकारी व व्यक्ति की जवाबदेही तय कर उन पर कानूनी कार्रवाई की जाए।

पीएम मोदी मांगें माफी: देश के करोड़ों पीड़ित छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से हुए खिलवाड़ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।

संसद के ठप रहने और सड़कों पर राहुल गांधी के आक्रामक रुख से यह साफ है कि विपक्ष नीट पेपरलीक और जंतर-मंतर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर बैकफुट पर जाने को तैयार नहीं है।


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