
राज्यसभा से बिल पास, पीएम मोदी के वीडियो पर CJP की विवादित टिप्पणी
राज्यसभा से एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक पास हो गया। पीएम मोदी ने इसे बड़ा सुधार बताया, जबकि CJP ने कानून और सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।
लोकसभा के बाद गुरुवार को राज्यसभा ने भी एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। अब यह विधेयक राष्ट्रपति के अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा। नए प्रावधानों के तहत प्रश्नपत्र लीक करने के दोषियों को अधिकतम 10 साल की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।
विधेयक पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश जारी कर इसे देश में विश्वसनीय परीक्षा प्रणाली स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार पेपर माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी और तकनीक व कड़े कानूनों के जरिए परीक्षा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित बनाया जाएगा।
हालांकि, प्रधानमंत्री के इस वीडियो पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। इंस्टाग्राम पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने लिखा, "आपकी त्वचा देश के भविष्य से ज्यादा चमकदार है।" यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई।
सात घंटे चली बहस, विपक्ष के संशोधन खारिज
राज्यसभा में इस विधेयक पर करीब सात घंटे तक चर्चा हुई। वामदलों और डीएमके की ओर से पेश किए गए संशोधन प्रस्तावों को सदन ने खारिज कर दिया। चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह कानून सरकार की पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि देश में अधिकांश पेपर लीक के मामले राज्य एजेंसियों द्वारा आयोजित परीक्षाओं से जुड़े रहे हैं और इनमें राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की भूमिका सीमित रही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार छात्रों के हितों के प्रति संवेदनशील है और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
यह संशोधन विधेयक 2024 के मौजूदा कानून को और सख्त बनाता है। इसके तहत:
पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के मामलों में सजा और जुर्माना बढ़ाया गया है।
मामलों की समयबद्ध जांच अनिवार्य की गई है।
राज्यों को पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का दावा है कि कानून केवल दोषियों को दंडित करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने और छात्रों का भरोसा बहाल करने में भी मदद करेगा।
छात्र आंदोलन के बाद आया कानून
इस वर्ष सामने आए पेपर लीक विवादों के बाद देशभर में बड़े स्तर पर छात्र आंदोलन हुए थे। इन आंदोलनों के बीच तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया था, जिसके बाद प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाला।
CJP ने पहले भी उठाए थे सवाल
विधेयक पारित होने से पहले भी CJP ने इसके प्रस्तावित प्रावधानों की आलोचना की थी। पार्टी का कहना था कि कानून का फोकस अपराध होने के बाद सजा देने पर है, जबकि पेपर लीक रोकने के लिए आवश्यक संस्थागत सुधारों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा था कि सरकार फास्ट-ट्रैक कोर्ट, सख्त सजा और जुर्माने की बात तो कर रही है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कर रही कि पेपर लीक की घटनाएं होने से पहले उन्हें रोकने के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने NTA में सुधार, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और संस्थागत बदलाव की मांग की थी।
वहीं, अभिजीत दीपके ने संसद में विधेयक पारित होने से एक दिन पहले कहा था कि केवल नए कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनके अनुसार, कानूनों का प्रभाव तभी दिखेगा जब उन्हें लागू करने वाली व्यवस्था ईमानदारी और दक्षता के साथ काम करेगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि फास्ट-ट्रैक कोर्ट की घोषणा के बावजूद पहली ही सुनवाई सीबीआई के वकील की अनुपस्थिति के कारण स्थगित हो गई, जिससे व्यवस्था की चुनौतियां सामने आती हैं।

