
राम मंदिर की स्वर्ण रामचरितमानस पर विवाद, ट्रस्ट ने जारी की तस्वीर
राम मंदिर ट्रस्ट ने स्वर्ण रामचरितमानस की तस्वीर जारी कर उसके सुरक्षित होने का दावा किया। पूर्व गृह सचिव एस. लक्ष्मी नारायण ने इसके गायब होने का आरोप लगाया था।
राम मंदिर से करीब पांच करोड़ रुपये मूल्य की स्वर्ण जड़ित रामचरितमानस के गायब होने के आरोपों पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सफाई दी है। ट्रस्ट ने दावा किया है कि स्वर्ण रामचरितमानस पूरी तरह सुरक्षित है और इसे मंदिर परिसर के कोठार (सुरक्षित भंडार) में रखा गया है। इसके साथ ही ट्रस्ट ने इसकी तस्वीर भी जारी की है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब पूर्व आईएएस अधिकारी और केंद्र सरकार के पूर्व गृह सचिव एस. लक्ष्मी नारायण ने आरोप लगाया कि उन्होंने रामलला को भेंट की गई स्वर्ण रामचरितमानस के बारे में कई बार जानकारी मांगी, लेकिन उन्हें न तो कोई रसीद दी गई और न ही इसकी मौजूदगी को लेकर स्पष्ट जवाब मिला।
ट्रस्ट ने क्या कहा?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार, स्वर्ण रामचरितमानस कुछ समय तक गर्भगृह के पास रखी गई थी। बाद में सुरक्षा कारणों से इसे मंदिर परिसर में बने कोठार में सुरक्षित रख दिया गया।ट्रस्ट का कहना है कि यदि एस. लक्ष्मी नारायण चाहें, तो वे आकर स्वयं इसे देख सकते हैं।
क्या हैं पूर्व गृह सचिव के आरोप?
पूर्व गृह सचिव एस. लक्ष्मी नारायण का कहना है कि उन्होंने अपनी दिवंगत मां की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए उनके गहनों को गलवाकर स्वर्ण रामचरितमानस तैयार कराई थी।उन्होंने बताया कि 8 अप्रैल 2024 को रामनवमी से पहले वह इसे अयोध्या लेकर पहुंचे और रामलला को समर्पित करने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दिया।उनके मुताबिक, शुरुआत में स्वर्ण रामचरितमानस मंदिर में रखी गई और उसकी पूजा भी होती रही। लेकिन तीन-चार महीने बाद उन्हें जानकारी मिली कि वह वहां दिखाई नहीं दे रही है।
कई बार मांगी जानकारी, नहीं मिला संतोषजनक जवाब
एस. लक्ष्मी नारायण का दावा है कि उन्होंने इस मामले में कई बार फोन, पत्र और व्हाट्सएप संदेश के जरिए जानकारी मांगी, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्होंने 10 से 12 पत्र भी लिखे और कई बार अयोध्या जाकर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मिलने की कोशिश की। इसके बावजूद उन्हें न तो दान की रसीद मिली और न ही यह बताया गया कि स्वर्ण रामचरितमानस कहां रखी गई है।
चंपत राय के व्यवहार पर भी उठाए सवाल
एक टीवी इंटरव्यू में एस. लक्ष्मी नारायण ने आरोप लगाया कि जब वह जानकारी लेने अयोध्या पहुंचे तो उन्हें करीब नौ घंटे तक इंतजार कराया गया।उनका कहना है कि मुलाकात के दौरान चंपत राय ने कहा, "मेरे पास बहुत सारे सोने-चांदी के आभूषण आते हैं, क्या मैं सबका प्रदर्शन करता फिरूं?"पूर्व गृह सचिव का कहना है कि उन्होंने केवल यह अनुरोध किया था कि उनकी मां की याद में समर्पित स्वर्ण रामचरितमानस को किसी उचित स्थान पर रखा जाए, ताकि श्रद्धालु भी उसे देख सकें।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि का भी दिया उदाहरण
एस. लक्ष्मी नारायण ने बताया कि उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मभूमि को भी स्वर्ण पत्रों पर अंकित श्रीमद्भगवद्गीता की प्रति भेंट की थी।उनके अनुसार, श्रीकृष्ण जन्मभूमि प्रबंधन ने उस समय उनकी भेंट स्वीकार करते हुए रसीद भी जारी की थी। वर्तमान में वह स्वर्णमयी श्रीमद्भगवद्गीता मंदिर परिसर में सुरक्षित है और प्रतिदिन उसकी पूजा-अर्चना की जाती है।उन्होंने यह भी दावा किया कि Droupadi Murmu ने भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि में इस स्वर्णमयी गीता की पूजा की थी।
फिलहाल क्या है स्थिति?
स्वर्ण रामचरितमानस को लेकर उठे विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने तस्वीर जारी कर दावा किया है कि यह पूरी तरह सुरक्षित है। वहीं, पूर्व गृह सचिव एस. लक्ष्मी नारायण का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि उनकी मां की श्रद्धा से समर्पित यह धरोहर सुरक्षित रहे और उसके बारे में पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

