सतलुज फिल्म पर रवनीत बिट्टू का हमला, 25 हजार शवों के दावे पर मांगे सबूत
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'सतलुज' फिल्म पर रवनीत बिट्टू का हमला, 25 हजार शवों के दावे पर मांगे सबूत

केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने 'सतलुज' फिल्म में 25 हजार लापता या अवैध दाह संस्कार के दावे पर सबूत मांगे। प्रमाण न मिलने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।


केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने फिल्म 'सतलुज' के निर्माता और निर्देशक को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि वे पंजाब के लोगों के सामने फिल्म में दिखाए गए 25,000 लापता या कथित अवैध रूप से अंतिम संस्कार किए गए लोगों के दावे से जुड़े सभी दस्तावेजी साक्ष्य, सरकारी रिकॉर्ड, न्यायिक निष्कर्ष और प्रमाणित आंकड़े सार्वजनिक करें। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो वे आगे कानूनी कदम उठाएंगे।

मीडिया को जारी बयान में बिट्टू ने कहा कि फिल्म निर्माता "क्रिएटिव फ्रीडम" का हवाला देकर विवादित दावों को स्थापित इतिहास के रूप में पेश नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि पंजाब का दर्दनाक इतिहास किसी एक पक्ष की कहानी के अनुरूप संपादित करने की चीज नहीं है।

25 हजार के आंकड़े पर उठाए सवाल

रवनीत सिंह बिट्टू ने सवाल उठाया कि यदि 25,000 का आंकड़ा केवल अनुमान या आरोपों पर आधारित है, तो इसे फिल्म में ऐतिहासिक तथ्य के रूप में क्यों प्रस्तुत किया गया? उन्होंने पूछा कि दर्शकों को यह क्यों नहीं बताया गया कि इस संख्या की पुष्टि किसी अंतिम न्यायिक निर्णय या आधिकारिक जांच से नहीं हुई है।उन्होंने कहा कि यदि फिल्म निर्माता इस आंकड़े को प्रमाणित कर देते हैं, तो वह सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए तैयार हैं।


फिल्म की कहानी पर भी जताई आपत्ति

केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि फिल्म में पंजाब के आतंकवाद के दौर की घटनाओं को एकतरफा तरीके से दिखाया गया है। उन्होंने सवाल किया कि निर्दोष हिंदुओं, बस यात्रियों, दुकानदारों, सरकारी कर्मचारियों, मजदूरों और आम नागरिकों की आतंकवादियों द्वारा की गई हत्याओं को उसी गंभीरता से क्यों नहीं दिखाया गया।

बिट्टू ने यह भी कहा कि पंजाब पुलिस, सुरक्षा बलों और आतंकवाद के खिलाफ लड़ने वाले बहादुर नागरिकों के बलिदान को भी फिल्म में पर्याप्त स्थान नहीं दिया गया। उन्होंने पूछा कि आतंकवादी हिंसा से प्रभावित हजारों परिवारों की पीड़ा को कहानी से लगभग गायब क्यों रखा गया।

'इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का अधिकार नहीं'

रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि किसी भी जिम्मेदार फिल्म निर्माता को विवादित आंकड़ों को निर्विवाद सत्य के रूप में पेश करने का अधिकार नहीं है। उनके अनुसार, आतंकवाद के दौर में पंजाब ने भारी कीमत चुकाई है और हर निर्दोष पीड़ित—चाहे वह किसी भी धर्म, समुदाय या विचारधारा से जुड़ा हो—उसे न्याय और सम्मान मिलना चाहिए।

सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग

बिट्टू ने फिल्म के निर्माताओं से मांग की कि वे उचित समय के भीतर 25,000 के आंकड़े का दस्तावेजी आधार सार्वजनिक करें। उन्होंने कहा कि यदि वे विश्वसनीय और सत्यापित साक्ष्य पेश करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें पंजाब की जनता के सामने स्पष्ट रूप से स्वीकार करना चाहिए कि यह आंकड़ा आधिकारिक रूप से प्रमाणित नहीं है।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो उपलब्ध सभी कानूनी और संवैधानिक विकल्पों पर विचार किया जाएगा, ताकि देश के सामने ऐतिहासिक तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत न किया जा सके।

'तथ्य भावनाओं से ऊपर होने चाहिए'

अपने बयान के अंत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पंजाब का इतिहास चुनिंदा घटनाओं के आधार पर दोबारा नहीं लिखा जा सकता। उन्होंने कहा कि "सत्य को प्रचार पर, तथ्य को कल्पना पर और साक्ष्यों को भावनाओं पर हमेशा प्राथमिकता मिलनी चाहिए।"

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