रुबियो के दौरे से भारत-अमेरिका रिश्तों में नई शुरुआत? ट्रेड डील की आखिरी अड़चनें होंगी दूर!
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रुबियो के दौरे से भारत-अमेरिका रिश्तों में नई शुरुआत? ट्रेड डील की आखिरी अड़चनें होंगी दूर!

मार्को रुबियो की भारत यात्रा से दोनों देशों के बीच व्यापारिक मतभेद सुलझने और आर्थिक व रणनीतिक सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद बढ़ी है।


अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो मंगलवार (20 अक्टूबर) दोपहर को मुंबई पहुंचे। यह ऐसे समय में हुआ है जब भारत-अमेरिका संबंधों के लिए एक निराशाजनक रहे साल में, अब कुछ सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे हैं।

इसका मुख्य कारण दोनों पक्षों के बीच बढ़ता यह भरोसा है कि लंबे समय से प्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौता जल्द ही पूरा हो सकता है। इस समझौते के बारे में खुद रुबियो ने कहा है: "हम इसके बहुत, बहुत करीब हैं। हम समझौते के अंतिम रूप लेने के बिल्कुल करीब हैं। बस कुछ ही चीजें तय होनी बाकी हैं, और मुझे लगता है कि वे भी जल्द ही पूरी हो जाएंगी।"

ईंधन के मोर्चे पर राहत
नई दिल्ली के लिए एक और राहत की बात यह है कि वाशिंगटन ने रूस से तेल खरीदने के मामले में भारत पर संभावित प्रतिबंध लगाने के फैसले को फिलहाल रोक दिया है। रुबियो ने माना है कि इस फैसले के पीछे व्यापार समझौते पर हुई प्रगति भी एक अहम वजह रही है। इसके अलावा, अमेरिका ने खुद रूस से डीजल खरीदने का समझौता भी किया है। इससे यह साफ होता है कि घरेलू ऊर्जा जरूरतें, मॉस्को के प्रति वाशिंगटन की नीति तय करने में कितनी बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।

रुबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की और व्यापार, ऊर्जा, रक्षा तथा महत्वपूर्ण तकनीकों पर चर्चा की। बैठक के बाद, जयशंकर ने 'X' पर पोस्ट किया, "आज मुंबई में अमेरिकी @SecRubio से मिलकर खुशी हुई। हमने व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और लोगों के बीच आपसी संबंधों पर ध्यान केंद्रित करते हुए, अपने रिश्तों को और आगे बढ़ाने के बारे में विचारों का आदान-प्रदान किया। साथ ही, क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भी चर्चा हुई।"

मुंबई में आयोजित अमेरिका के 250 वर्षों के जश्न में जयशंकर मुख्य अतिथि थे। मुंबई से जारी एक बयान में विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा, "मुंबई यात्रा के दौरान, दोनों पक्षों ने भारत-अमेरिका संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की और 'व्यापक वैश्विक साझेदारी' (Comprehensive Global Partnership) को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।" इस दौरान व्यापार, रक्षा तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर बातचीत हुई।

रिलायंस, वेनेजुएला का कच्चा तेल और टेक्सास की एक रिफाइनरी
रुबियो की इस यात्रा का मुख्य जोर व्यापार और वाणिज्य पर है। इसके तहत वे भारतीय कारोबारी दिग्गजों से मुलाकात करेंगे और बुधवार को गुजरात में रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी का दौरा भी करेंगे।

रिलायंस रिफाइनरी ने पहले भी वेनेजुएला के कच्चे तेल का इस्तेमाल किया है, और रुबियो अंबानी को वहां से और अधिक कच्चा तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। इसके अलावा, रिलायंस अमेरिका को डीजल और अन्य रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद बेचने की स्थिति में भी है।

कहा जाता है कि रुबियो वेनेजुएला को लेकर बड़े फैसले ले रहे हैं और इस दक्षिण अमेरिकी देश के मामले में वे ट्रम्प प्रशासन के मुख्य प्रतिनिधि हैं। अंबानी परिवार भी टेक्सास में एक बड़ी रिफाइनरी में निवेश करने की योजना बना रहा है, क्योंकि यह परिवार अमेरिका के साथ अपने दीर्घकालिक व्यावसायिक और कारोबारी संबंध मजबूत कर रहा है।

मध्य-अवधि चुनाव से जुड़ी चिंताएं
ट्रम्प प्रशासन के लिए, नवंबर में होने वाले मध्य-अवधि चुनावों से पहले ऊर्जा की कीमतों को कम करना एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। डीजल की कीमतों का असर अमेरिकी ट्रक चालकों, किसानों और माल भेजने वालों (शिपर्स) पर पड़ता है। इसलिए, भारत की ऊर्जा जरूरतों को समझने पर रुबियो का जोर ऐसे समय में आया है, जब वाशिंगटन को खुद रूस के प्रति अपनी नीति और घरेलू आर्थिक दबावों के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है।

यह दौरा उन रिश्तों को स्थिर करने का एक मौका देता है, जो टैरिफ, रूसी तेल और अन्य मतभेदों के कारण तनावपूर्ण हो गए थे। लेकिन इस सकारात्मक सोच को व्यापार के मोर्चे पर ठोस प्रगति और एक अधिक स्थिर रिश्ते में बदलना होगा। फिलहाल, एक समझौते की संभावना दोनों पक्षों को हालिया तनावों को पीछे छोड़ने का एक कारण देती है, भले ही उनके बीच के मूल मतभेद बने रहें।

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