सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोला- सिर्फ प्रदर्शन पर नहीं हो सकता लाठीचार्ज
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सुप्रीम कोर्ट सख्त, बोला- सिर्फ प्रदर्शन पर नहीं हो सकता लाठीचार्ज

छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ प्रदर्शन के आधार पर लाठीचार्ज नहीं हो सकता। बल प्रयोग के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग पर सुनवाई हुई।


हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कथित ज्यादती को लेकर बढ़ते विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख्त रुख अपनाया। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि सिर्फ किसी आंदोलन या प्रदर्शन के आधार पर पुलिस लाठीचार्ज नहीं कर सकती।भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी उस समय की, जब देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शनकारियों पर कथित अत्यधिक बल प्रयोग से जुड़ी नई याचिकाओं का उल्लेख (मेंशनिंग) अदालत के समक्ष किया गया।

छात्रों ने लगाया पुलिस मारपीट का आरोप

सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी गई एक याचिका छात्रों के एक समूह की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया और उनके साथ मारपीट की।

सिवान में AK-47 इस्तेमाल का भी आरोप

एक अन्य याचिका में बिहार के सिवान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित तौर पर AK-47 राइफलों के इस्तेमाल का गंभीर आरोप लगाया गया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस द्वारा अंधाधुंध या अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

जंतर-मंतर पुलिस कार्रवाई पर भी पहुंचा मामला

इस बीच, जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए हाई-लेवल जांच की मांग करने वाले एक वकील ने भी सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है। इससे पहले उन्होंने इसी मुद्दे पर चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की थी, लेकिन उस पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया था। अब उसी मामले को लेकर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है।सुप्रीम कोर्ट में इन याचिकाओं की सुनवाई ऐसे समय हो रही है, जब छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है।

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